भारतीय खानपान की परंपरा में भोजन समाप्त करने के पश्चात पान चबाने का चलन काफी पुराना रहा है। अधिकांश लोग इसे केवल मुंह की ताजगी बनाए रखने या स्वाद बदलने का साधन मानते हैं। हालांकि आयुर्वेद के अनुसार यदि तंबाकू रहित सादा या मीठा पान सही तरीके से खाया जाए तो यह शरीर के लिए एक प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है। मसालेदार या भारी भोजन करने के बाद बिना हानिकारक तत्वों वाला पान चबाने से स्वास्थ्य को कई तरह के शारीरिक फायदे हासिल होते हैं।
पाचन तंत्र को मिलती है तेजी
भोजन करने के तुरंत बाद जब पान चबाया जाता है तो मुंह के भीतर लार ग्रंथियां तेजी से सक्रिय हो जाती हैं। लार के अधिक मात्रा में बनने से उसमें मौजूद पाचक एंजाइम भोजन के कणों को तेजी से तोड़ने का काम शुरू कर देते हैं। इससे पाचन की प्राकृतिक प्रक्रिया बहुत सुगम हो जाती है। भारी या वसायुक्त खाना खाने के बाद होने वाले पेट के भारीपन से मुक्ति पाने में यह लार बेहद मददगार साबित होती है और भोजन आसानी से पच जाता है।
एसिडिटी और गैस की समस्या से राहत
अत्यधिक मसालेदार या भारी भोजन करने के उपरांत अकसर सीने में जलन होने लगती है और खट्टी डकारों के साथ पेट फूलने की शिकायत सामने आती है। पान के ताजे पत्तों में प्राकृतिक रूप से क्षारीय यानी अलकलाइन गुण पाए जाते हैं। यह अलकलाइन प्रभाव पेट में बनने वाले अत्यधिक एसिड को बेअसर करने में प्रभावी भूमिका निभाता है। पेट में बनने वाले तेजाबी असर के कम होने से एसिडिटी, गैस और जलन की परेशानी से तुरंत आराम मिल जाता है।
मुंह के बैक्टीरिया और दुर्गंध का खात्मा
पान के पत्तों के भीतर एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-माइक्रोबियल तत्व मौजूद होते हैं जो ओरल हेल्थ को बेहतर बनाते हैं। खाने के बाद पान चबाने से मुंह के अंदर छिपे हानिकारक बैक्टीरिया समाप्त हो जाते हैं। यह वही बैक्टीरिया होते हैं जो दांतों में कैविटी पैदा करते हैं और सांसों से आने वाली बदबू की मुख्य वजह बनते हैं। इस प्राकृतिक उपाय से मसूड़ों को मजबूती प्राप्त होती है और मुंह कई घंटों तक पूरी तरह तरोताजा बना रहता है।
मेटाबॉलिक रेट और आंतों की सफाई
पान की पत्तियां शरीर के मेटाबॉलिज्म को गति प्रदान करने में भी सहायक होती हैं। जब शरीर की मेटाबॉलिक दर दुरुस्त रहती है तब खाया गया भोजन तेजी से ऊर्जा में रूपांतरित होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर के भीतर जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होने की संभावना काफी घट जाती है। इसके अतिरिक्त यह आंतों की अंदरूनी सफाई करके पूरे शरीर को डिटॉक्स करने में अहम योगदान देता है।
पान का सेवन करते समय जरूरी सावधानियां
आयुर्वेदिक गुणों का पूरा लाभ उठाने के लिए कुछ सावधानियां बरतनी बेहद आवश्यक हैं। यदि पान में तंबाकू, अत्यधिक चूना या सुपारी मिला दी जाए तो यह सेहत के लिए अत्यंत हानिकारक बन जाता है। इस प्रकार के मिलावटी पान से मुंह का कैंसर होने, दांत खराब होने और मसूड़ों की गंभीर बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा बाजार में मिलने वाले अत्यधिक मीठे पान में चाशनी, कृत्रिम रंग और चीनी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। अत्यधिक मीठा पान खाने से वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है और यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी सही नहीं माना जाता।



















