धार्मिक नगरी अजमेर अपनी प्राचीन परंपराओं और ऐतिहासिक मंदिरों के लिए अपनी एक खास पहचान समेटे हुए है। इस शहर में ऐसे कई आध्यात्मिक स्थल मौजूद हैं जिनके साथ सदियों पुरानी मान्यताएं और लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। इन्हीं विशेष धार्मिक स्थलों में अजमेर का प्रसिद्ध खोड़ा गणेश मंदिर भी शामिल है। गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर इस पवित्र स्थान पर दूर-दूर से भारी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
स्वयं प्रकट हुई थी प्रतिमा
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यहां विराजमान भगवान गणेश की प्रतिमा को किसी मनुष्य द्वारा स्थापित नहीं किया गया था। इस स्थान पर गणेश जी की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी। इतिहास और मान्यताओं के अनुसार करीब 1700 ईस्वी में इस स्थान पर एक विशाल तालाब हुआ करता था। उसी तालाब की मुंडेर पर भगवान गणेश की यह चमत्कारी प्रतिमा प्रकट हुई थी, जिसके बाद से इस पावन स्थल की महत्ता और अधिक बढ़ गई।
पेड़ के तनों में दिखती हैं आकृतियां
इस धार्मिक स्थल की एक और सबसे बड़ी विशेषता यहां परिसर में मौजूद तीन सौ वर्षों से भी अधिक पुराने बड़ और इमली के पेड़ हैं। इन दोनों प्राचीन पेड़ों के तने आपस में मजबूती से जुड़े हुए हैं। इन दोनों पेड़ों के मिले हुए तनों में लगभग 12 अलग-अलग स्थानों पर भगवान गणेश की स्पष्ट आकृतियां दिखाई देती हैं, जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।
मन्नत का धागा बांधने की परंपरा
भक्त इन प्राकृतिक आकृतियों को साक्षात भगवान गणेश का स्वरूप मानकर अत्यंत श्रद्धा के साथ दर्शन करते हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए इस पवित्र पेड़ पर मन्नत का धागा भी बांधते हैं और बप्पा से प्रार्थना करते हैं। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है, जहां भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है।
कैसे पहुंचें मंदिर
यदि आप भी गणेश चतुर्थी के अवसर पर या किसी अन्य दिन खोड़ा गणेश मंदिर जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह पावन स्थल अजमेर शहर से करीब 26 किलोमीटर और किशनगढ़ से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए निजी कार, बस, टेंपो और बाइक जैसे साधनों का आसानी से उपयोग किया जा सकता है।


















