डिजिटल युग के बढ़ते प्रभाव के बीच बिहार से बच्चों की मोबाइल पर बढ़ती निर्भरता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बेगूसराय जिले में एक बच्चे को फोन की ऐसी लत लगी कि घर का रिचार्ज खत्म होने पर उसने लगातार दो दिनों तक भोजन करने से साफ इंकार कर दिया। परिजनों की लाख कोशिशों के बावजूद जब वह नहीं माना, तो आखिरकार उसे खाना खिलाने के लिए मोबाइल में रिचार्ज करवाना पड़ा। इस अनोखी और गंभीर घटना ने बाल विकास और बच्चों की मानसिक आदतों को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छेड़ दी है।
बेगूसराय के मयंक कुमार की माता ने इस पूरी स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी साझा करते हुए बताया कि उनका बेटा फोन के बिना एक निवाला भी मुंह में नहीं डालता है। उनके अनुसार, पिछले दिनों उनके घर के इंटरनेट और कॉलिंग प्लान की वैधता समाप्त हो गई थी और लगभग दो दिनों तक फोन का रिचार्ज नहीं हो पाया था। इस समयावधि के दौरान मयंक ने जिद पकड़ ली और पूरी तरह से भोजन का त्याग कर दिया। घर वालों ने उसे समझाने और मनाने के कई प्रयास किए, लेकिन उसकी जिद के आगे उन्हें झुकना ही पड़ा।
जब दो दिन बीत जाने के बाद फोन में नया रिचार्ज पैक डलवाया गया और भोजन करते समय उसे स्क्रीन देखने दी गई, तब जाकर उसने कुछ खाया। हालांकि, तब तक लगातार दो दिन भूखे रहने के कारण उसकी शारीरिक स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी और कमजोरी बढ़ने के कारण उसे तुरंत इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में ले जाना पड़ा। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि किस तरह गैजेट्स की लत बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य पर सीधा और खतरनाक असर डाल रही है।
डॉक्टरों ने इसे बताया गंभीर हैबिट डिसऑर्डर
इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए बेगूसराय सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कृष्ण कुमार ने इसे बच्चों में पनप रही आदत संबंधी बीमारी यानी हैबिट डिसऑर्डर करार दिया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की अत्यधिक निर्भरता भविष्य में बच्चों के लिए बेहद घातक साबित हो सकती है और उनकी मानसिक व शारीरिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि जब तक फोन दोबारा एक्टिव नहीं हुआ, तब तक बच्चे ने जिद नहीं छोड़ी, जो कि सीधे तौर पर स्क्रीन एडिक्शन की ओर इशारा करता है।
शिशु रोग विशेषज्ञ ने माता-पिता को सलाह दी है कि वे बहुत कम उम्र से ही बच्चों को गैजेट्स की आदत न डालें। उनके अनुसार, बच्चे अपने आसपास के परिवेश और घर के माहौल से ही सब कुछ सीखते हैं। जैसा वातावरण उन्हें बचपन में मिलता है, उनका व्यवहार और स्वभाव भी उसी के अनुरूप ढल जाता है। डॉक्टर ने अभिभावकों से पुरजोर अपील की है कि वे बच्चों को स्क्रीन से दूर रखें और उनकी दैनिकचर्या में आउटडोर गेम्स, खेलकूद तथा परिवार के साथ संवाद जैसी सकारात्मक गतिविधियों को शामिल करें।
अभिभावकों के लिए एक बड़ी चेतावनी
यह घटना उन तमाम माता-पिता के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो बच्चों को आसानी से शांत करने या उन्हें भोजन कराने के लिए रोजमर्रा की जिंदगी में मोबाइल का सहारा लेते हैं। शुरुआती दौर में सुविधा के लिए दिया जाने वाला फोन धीरे-धीरे बच्चों की जिद और मानसिक कमजोरी का कारण बन जाता है। यदि समय रहते इस आदत पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में बच्चों का मानसिक विकास खतरे में पड़ सकता है। समाज के हर अभिभावक को इस मामले से सीख लेकर अपने बच्चों के साथ अधिक समय बिताने की आवश्यकता है ताकि उन्हें डिजिटल दुनिया के दुष्प्रभावों से बचाया जा सके।



















