अव्यवस्थित जीवनशैली और बढ़ते तनाव के दौर में दिल की बीमारियों के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। ऐसे नाजुक समय में सही प्राथमिक कदम किसी मरीज की जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकते हैं। मेदांता अस्पताल के सीएमडी डॉक्टर नरेश त्रेहन ने एक साक्षात्कार के दौरान हृदय रोगियों और उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए बेहद जरूरी चिकित्सकीय परामर्श साझा किया है। उन्होंने बताया कि जिन व्यक्तियों को कोरोनरी आर्टरी डिजीज की शिकायत है या जो दिल के दौरे के गंभीर खतरे के दायरे में आते हैं, वे अप्रत्याशित आपात स्थिति के लिए डॉक्टर के मार्गदर्शन में तीन विशेष दवाएं अपने पास रख सकते हैं। इनमें एस्पिरिन, सबलिंग्वल टेबलेट और स्टेटिन शामिल हैं।
सीने में दर्द की स्थिति में तुरंत राहत देने वाले उपाय
हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों और बेचैनी से निपटने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा करते हुए डॉक्टर नरेश त्रेहन ने स्पष्ट किया कि कोरोनरी आर्टरी डिजीज से जूझ रहे अथवा हाई रिस्क श्रेणी के मरीजों को सावधानी बरतनी चाहिए। यदि अचानक सीने में लगातार दर्द महसूस होने लगे, तो डॉक्टरी परामर्श के अनुसार एस्पिरिन को पानी में घोलकर पिया जा सकता है। इसके साथ ही, सबलिंग्वल श्रेणी की गोली, जैसे सोरबिट्रेट की आधी गोली को बैठकर या लेटकर जीभ के नीचे रखा जाता है। यह दवा रक्त वाहिकाओं यानी धमनियों को चौड़ा करने का काम करती है, जिससे रक्त प्रवाह सुधरता है और फौरी तौर पर मरीज को राहत मिलती है। इसके अलावा संबंधित विशेषज्ञ 20 मिलीग्राम अटोर्वास्टेटिन या इसके समकक्ष किसी अन्य स्टेटिन दवा के उपयोग का परामर्श भी देते हैं।
बिना डॉक्टरी पर्ची के खुद दवाएं लेने से बचें
दवाओं के उपयोग को लेकर डॉक्टर नरेश त्रेहन ने बेहद गंभीर चेतावनी भी जारी की है। उन्होंने आगाह किया कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी योग्य चिकित्सक की सलाह और लिखित पर्ची के इन दवाओं का सेवन अपनी मर्जी से बिल्कुल न करे। हर जीवनरक्षक दवा के अपने संभावित दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, जिनका मूल्यांकन केवल डॉक्टर ही कर सकता है। उदाहरण के तौर पर, सबलिंग्वल दवा के सेवन से रक्तचाप में अचानक कुछ गिरावट आ सकती है। वहीं दूसरी ओर, एस्पिरिन उन लोगों के लिए बेहद घातक साबित हो सकती है जो पहले से पेट के अल्सर या किसी प्रकार की ब्लीडिंग डिसऑर्डर की समस्या से ग्रस्त हैं। इसलिए इन जीवनरक्षक दवाओं का उपयोग केवल आपातकालीन परिस्थितियों में और डॉक्टर के पहले से दिए गए निर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
शुगर के मरीजों के लिए साइलेंट अटैक का गंभीर जोखिम
डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों के संदर्भ में बातचीत करते हुए डॉक्टर त्रेहन ने एक चौंकाने वाला पहलू उजागर किया। उन्होंने बताया कि मधुमेह के मरीजों में नर्व्स यानी तंत्रिका तंत्र को लगातार नुकसान पहुंचता रहता है। नर्व एंडिंग्स क्षतिग्रस्त हो जाने की वजह से हृदय से मस्तिष्क तक दर्द का संकेत पहुंचाने वाला प्राकृतिक अलार्म सिस्टम पूरी तरह निष्क्रिय हो जाता है। इस स्थिति के चलते डायबिटीज के मरीजों को हार्ट अटैक आने के बावजूद सीने में तीव्र दर्द या सामान्य बेचैनी का अनुभव नहीं हो पाता। दर्द का अहसास न होने के कारण मरीज समय पर सचेत नहीं हो पाता और भीतर ही भीतर हृदय की मांसपेशियों को भारी नुकसान पहुंचता रहता है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में साइलेंट अटैक भी कहा जाता है। इसलिए ऐसे मरीजों को नियमित जांच और अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।



















