ब्रेस्ट में किसी भी प्रकार की गांठ महसूस होते ही महिलाओं के मन में घबराहट होना स्वाभाविक है। अधिकांश महिलाएं यह सोचकर निश्चिंत हो जाती हैं कि अगर गांठ में दर्द नहीं है, तो वह खतरे से बाहर है। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि दर्द न होना हमेशा सामान्य स्थिति की गारंटी नहीं होता। ब्रेस्ट में पाई जाने वाली हर गांठ कैंसर की नहीं होती, लेकिन शरीर में आए किसी भी नए बदलाव की तुरंत डॉक्टरी जांच कराना बेहद आवश्यक है। सही समय पर पहचान होने से सटीक निदान और प्रभावी इलाज संभव हो पाता है।
हर गांठ कैंसर नहीं होती, पर जांच कराना जरूरी
सामान्य शल्य चिकित्सा के स्तन रोग विभाग की वरिष्ठ सलाहकार और सहायक प्रोफेसर डॉक्टर शिवेता रजदान के अनुसार, ब्रेस्ट में बनने वाली गांठें कई तरह की हो सकती हैं। इनमें से कुछ गांठें कैंसरयुक्त हो सकती हैं, जबकि कई पूरी तरह से बेनाइन या सामान्य होती हैं। कम उम्र की महिलाओं में पानी वाली गांठें यानी सिस्ट और फाइब्रोएडीनोमा जैसी सामान्य गांठें काफी देखने को मिलती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन गांठों में दर्द नहीं होता, वे भी कैंसर की गांठें हो सकती हैं। इसलिए किसी भी गांठ को बिना जांच के सुरक्षित मान लेना सही नहीं है।
छोटी गांठ को भी न करें नजरअंदाज
कैंसर की गांठ शुरुआत में बहुत छोटी होती है और धीरे-धीरे विकसित होती है। यदि किसी महिला को अपने ब्रेस्ट में कोई गांठ महसूस होती है और वह दो से तीन सप्ताह के भीतर खुद समाप्त नहीं होती या उसके आकार में बढ़ोतरी होने लगती है, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। शुरुआती चरण में ही बीमारी पकड़े जाने पर इलाज के बेहतर और असरदार विकल्प उपलब्ध होते हैं। यही कारण है कि छोटी गांठ समझकर लापरवाही बरतना घातक साबित हो सकता है।
गांठ के अलावा इन शुरुआती लक्षणों पर दें ध्यान
ब्रेस्ट कैंसर का सबसे मुख्य और आम लक्षण गांठ ही है, लेकिन इसके अलावा भी कई अन्य शारीरिक बदलाव दिखाई दे सकते हैं। यदि निप्पल से किसी भी तरह का पानी या खून जैसा रिसाव आ रहा हो, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। इसके अलावा निप्पल का अंदर की तरफ खिंच जाना या उसकी सामान्य बनावट में बदलाव आना भी अस्वाभाविक संकेत है। ब्रेस्ट की त्वचा में अचानक कोई बदलाव दिखना, आकार का बिगड़ना, लालिमा आना या बार-बार संक्रमण जैसा प्रतीत होना भी जांच कराने की चेतावनी देता है।
कम उम्र की महिलाओं और पारिवारिक इतिहास का जोखिम
यह एक आम धारणा है कि ब्रेस्ट कैंसर केवल अधिक उम्र की महिलाओं को प्रभावित करता है, जबकि वास्तविकता यह है कि कम उम्र में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। 20, 22 और 30 साल की युवा महिलाओं में भी ब्रेस्ट कैंसर देखा जा सकता है, हालांकि इस आयु वर्ग में मामलों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम होती है। जिन महिलाओं के परिवार में मां, मौसी या नानी को ब्रेस्ट कैंसर या अंडाशय का कैंसर रहा हो, उन्हें अधिक सतर्क रहना चाहिए। यदि परिवार में एक या दो से ज्यादा सदस्यों को यह बीमारी रही है, तो डॉक्टर की सलाह पर 30 साल की उम्र से ही नियमित जांच शुरू कर देनी चाहिए।
हर महीने खुद कैसे करें ब्रेस्ट की जांच?
महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। इसके लिए हर महीने पीरियड्स खत्म होने के 4 से 5 दिन बाद खुद ब्रेस्ट की जांच की जा सकती है। यदि इस स्व-जांच के दौरान कोई नई गांठ, आकार में विषमता या अन्य परेशानी महसूस होती है, तो उसे टालना नहीं चाहिए। पीरियड्स खत्म होने के बाद भी यदि कोई गांठ बनी रहती है, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर उसकी जांच करानी चाहिए।
80 से 90 प्रतिशत कैंसर गांठों में नहीं होता दर्द
अधिकांश लोगों में यह भ्रम फैला हुआ है कि कैंसर की गांठ में दर्द जरूर होता है। डॉक्टरी आंकड़ों के अनुसार, 80 से 90 प्रतिशत ब्रेस्ट कैंसर की गांठों में शुरुआती अवस्था में कोई दर्द नहीं महसूस होता। जब कैंसर की गांठ में दर्द शुरू होता है, तो कई बार यह बीमारी के अगले चरण में पहुंचने का इशारा होता है। ऐसा तब होता है जब कैंसर कोशिकाएं आसपास की नसों या मांसपेशियों तक फैलने लगती हैं। इसलिए दर्द होने का इंतजार किए बिना किसी भी गांठ की समय पर जांच कराना ही सबसे बुद्धिमानी भरा कदम है।



















