असम स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी (ASACS) ने पूरे राज्य में एचआईवी की रोकथाम और इलाज के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 60 दिवसीय सघन सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) अभियान की आधिकारिक शुरुआत की है। इस राज्यव्यापी जन जागरूकता अभियान का औपचारिक उद्घाटन बुधवार को डिब्रूगढ़ स्थित जिला पुस्तकालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान किया गया। इस दो महीने लंबे अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों, विशेषकर युवा पीढ़ी को एचआईवी संक्रमण से बचाव के उपायों के बारे में शिक्षित करना तथा समाज में इससे जुड़े भ्रम और भय को दूर करना है।
युवाओं के बचाव और नशीली दवाओं के खतरों पर राज्य मंत्रियों का संबोधन
कार्यक्रम के दौरान असम के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अशोक सिंघल ने एक विशेष IEC जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह वाहन राज्य के विभिन्न हिस्सों में घूमकर एचआईवी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रसारित करेगा। जनसभा को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य में एचआईवी संक्रमण के आंकड़ों पर गहरी चिंता व्यक्त की और बताया कि असम में एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने वाले अधिकांश मामले सुई के जरिए नशीली दवाएं लेने वाले व्यक्तियों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और यदि वे गलत राह पर चले जाएंगे तो पूरा समाज प्रभावित होगा। युवाओं को सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह देते हुए मंत्री ने कहा, "युवा हमारी संपत्ति हैं। यदि युवा भटकता है, तो समाज भटकता है।" उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नशे से पूरी तरह दूर रहें और ऐसे किसी भी जोखिम भरे व्यवहार से बचें जो उनके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाकर अवसाद की ओर ले जाए।
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए परिवर्तन एवं विकास तथा चाय जनजाति और आदिवासी कल्याण मंत्री रामेश्वर तेली ने इस सघन अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि एक दौर ऐसा था जब एचआईवी का कोई कारगर इलाज उपलब्ध नहीं था, लेकिन आज चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के कारण इसके इलाज के लिए दवाएं मौजूद हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि असुरक्षित यौन संबंध और सुई से नशीली दवाओं के सेवन जैसे जोखिम भरे व्यवहार से बचकर एचआईवी को फैलने से रोका जा सकता है, इसलिए युवाओं को अपनी जीवनशैली के प्रति बेहद सतर्क रहना चाहिए।
हजारों गांवों और संस्थानों तक पहुंचेगा जमीनी अभियान
अभियान की रूपरेखा की जानकारी देते हुए ASACS की परियोजना निदेशक इन्द्राणोशी दास ने बताया कि 60 दिनों के इस कार्यक्रम को जमीनी स्तर तक ले जाने के लिए व्यापक योजना तैयार की गई है। इस अवधि के दौरान राज्य भर के लगभग 3,900 गांवों, 500 स्कूलों, 200 कॉलेजों, 100 सरकारी अस्पतालों और शहरी मलिन बस्तियों (स्लम क्षेत्रों) में जागरूकता गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। इस विस्तृत पहुंच के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी एचआईवी जांच और उपचार सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य संजीव काकती ने भी छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने युवा वर्ग से अस्वास्थ्यकर जीवनशैली को त्यागने की अपील की और चेतावनी दी कि जोखिम भरा व्यवहार जीवन को पूरी तरह तबाह कर सकता है।
समारोह में 1,000 से अधिक लोगों की उपस्थिति और सांस्कृतिक कार्यक्रम
डिब्रूगढ़ के जिला पुस्तकालय में आयोजित इस उद्घाटन समारोह में 1,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थी, शिक्षक, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक शामिल थे। इस अवसर पर खोवांग के MLA चक्रधर गोगोई, राज्यसभा MP जोगेन मोहन तथा राज्य व जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मंच संचालन और भाषणों के बाद स्कूल व कॉलेज के छात्रों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गईं, जिनके जरिए रचनात्मक अंदाज में एचआईवी से बचाव का संदेश प्रस्तुत किया गया।



















