लालबागचा राजा के दर्शन के बाद गरमाया विवाद, कश्मीरा शाह ने घर तोड़ने वालों पर कसा तंजबिना गारंटी 25000 रुपये तक का लोन देकर महिलाओं के स्वरोजगार को सहारा दे रही महतारी शक्ति ऋण योजनाअबरार अहमद ने राशिद खान को पीछे छोड़ हासिल किया आईसीसी टी20 में शीर्ष स्थान, शीर्ष 10 में दो भारतीय शामिलबायोहैकिंग के जरिए एंडोमेट्रियोसिस के गैर-सर्जिकल इलाज की खोज में जुटीं केट टोलोब्रदर्स रिव्यू (2026): मैथ्यू मैककॉनाहे और वुडी हैरेलसन की हल्की-फुल्की कॉमेडीपिछोला झील के सीने पर तैरती मेवाड़ की अनूठी विरासत, पर्यटकों को क्यों लुभाता है जग मंदिरवेस्ट बैंक पर मैक्रों के यूएन भाषण पर भड़के नेतन्याहू, बयानों को बताया बेतुकापुष्य नक्षत्र में मंगल के प्रवेश से 4 राशियों को 24 दिन तक मिलेंगे बड़े लाभस्वीडिश क्रोना को मजबूत आर्थिक विकास और ब्याज दरों में बढ़ोतरी से मिल सकता है बड़ा सहाराठंड के मौसम में कमरा गर्म रखने के लिए सबसे भरोसेमंद स्पेस हीटर और खरीदारी गाइड
दैनिक थाली में प्रोटीन की पूर्ति के लिए अरहर, मूंग, मसूर और उड़द का सही पोषण गणितस्वास्थ्य
23 सित॰ 2026, 5:38 pm (36 मिनट पहले)· 0

दैनिक थाली में प्रोटीन की पूर्ति के लिए अरहर, मूंग, मसूर और उड़द का सही पोषण गणित

शाकाहारी भोजन में प्रोटीन और फाइबर का अहम जरिया मानी जाने वाली दालों के पोषण मूल्य पकाने के तरीके और अनाजों के साथ संतुलन पर निर्भर करते हैं।

भारतीय खानपान की परंपरा में दाल केवल स्वाद का जरिया नहीं है, बल्कि यह दैनिक पोषण की बुनियादी जरूरत भी पूरी करती है। विशेषकर शाकाहारी आहार लेने वाले लोगों के लिए शरीर में प्रोटीन और डाइटरी फाइबर की कमी को दूर करने में दालों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। जब लोग अपने भोजन की योजना बनाते हैं, तो अक्सर यह सवाल सामने आता है कि अरहर, मूंग, मसूर और उड़द में से पोषण की दृष्टि से किसका चयन अधिक लाभकारी साबित हो सकता है। वास्तव में किसी भी दाल से मिलने वाले पोषक तत्वों का स्तर इस बात पर निर्भर करता है कि दाल की किस्म कौन सी है और उसका विश्लेषण सूखी अवस्था में किया जा रहा है अथवा पकने के बाद।

उड़द दाल की पौष्टिकता और पकाने का असर

उड़द की दाल प्रोटीन और फाइबर के मामले में काफी समृद्ध मानी जाती है। पारंपरिक व्यंजनों में इसका उपयोग बहुत व्यापक स्तर पर देखने को मिलता है। इडली, डोसा, दाल मखनी और सामान्य दाल के रूप में इसका नियमित उपयोग किया जाता है। जब इस दाल को पकाया जाता है, तो पानी सोखने के कारण इसका आयतन और वजन काफी बढ़ जाता है। इस वजह से सौ ग्राम सूखी उड़द दाल और सौ ग्राम पकी हुई उड़द दाल के पोषक तत्वों की आपस में सीधी तुलना नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि पकाने के बाद प्रति सौ ग्राम में पोषक तत्वों का घनत्व बदल जाता है।

ये भी पढ़ें

मसूर दाल का सुपाच्य विकल्प और उसके रूप

मसूर दाल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अन्य दालों की तुलना में बहुत जल्दी पककर तैयार हो जाती है। यह शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और फाइबर दोनों एक साथ उपलब्ध कराती है, जिससे इसे हर दिन की डाइट में बहुत सहजता से शामिल किया जा सकता है। बाजार और रसोई में मसूर दो रूपों में देखने को मिलती है, जिसमें एक टूटी हुई लाल मसूर और दूसरी साबुत मसूर शामिल है। इन दोनों ही रूपों के पोषक प्रोफाइल में थोड़ा बहुत अंतर देखने को मिल सकता है, लेकिन दोनों ही स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद उपयोगी मानी जाती हैं।

अरहर दाल और संतुलित आहार की संरचना

अरहर अथवा तूअर दाल भारत के लगभग हर हिस्से में सबसे अधिक पसंद की जाने वाली दालों में गिनी जाती है। यह शरीर को आवश्यक प्रोटीन देने के साथ साथ कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और कई जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी प्रदान करती है। सामान्य तौर पर लोग इसे रोटी या चावल के साथ खाना पसंद करते हैं। दैनिक आहार में अरहर को शामिल करने से शरीर को लंबे समय तक ऊर्जावान बनाए रखने में मदद मिलती है और यह एक संपूर्ण संतुलित थाली तैयार करने का आधार बनती है।

मूंग दाल और अंकुरण का विशेष महत्व

मूंग दाल को पाचन तंत्र के लिए सबसे हल्का और सुपाच्य विकल्प माना जाता है। पेट की समस्याओं से राहत पाने या हल्के भोजन की जरूरत होने पर लोग अक्सर मूंग दाल की खिचड़ी, सादी दाल या स्प्राउट्स का सेवन करते हैं। जब साबुत मूंग को पानी में भिगोकर अंकुरित कर लिया जाता है, तो इसके पोषण मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है। अंकुरित होने के बाद इसमें फाइबर, विटामिन और महत्वपूर्ण मिनरल्स की मात्रा प्राकृतिक रूप से काफी बढ़ जाती है।

दालों को आपस में मिलाकर पकाने की उपयोगिता और अनाज का संयोजन

प्रतिदिन एक ही प्रकार की दाल का सेवन करने के बजाय अलग-अलग दालों को मिलाकर पकाने से भोजन में पोषण की विविधता सुनिश्चित होती है। रसोई में मूंग और मसूर, अरहर और मसूर अथवा मूंग और उड़द जैसी दालों को एक साथ मिलाकर बेहद स्वादिष्ट मिक्स दाल तैयार की जा सकती है। इससे खाने में स्वाद का नयापन भी बना रहता है और शरीर को विभिन्न दालों के अलग-अलग गुण भी प्राप्त होते हैं।

हालांकि केवल अलग-अलग दालों को एक साथ मिला देने से प्रोटीन की मूल गुणवत्ता में बहुत बड़ा अंतर पैदा नहीं होता है। मानव शरीर को सभी आवश्यक अमीनो एसिड उचित अनुपात में मिल सकें, इसके लिए दालों को अनाजों के साथ मिलाकर खाना सबसे अधिक असरदार माना जाता है। जब दालों का सेवन चावल, गेहूं या बाजरा जैसे अनाजों के साथ किया जाता है, तो प्रोटीन की संरचना पूरी तरह संतुलित हो जाती है और शरीर को संपूर्ण पोषण प्राप्त होता है।

सवाल-जवाब

सूखी और पकी हुई उड़द दाल के पोषण की सीधी तुलना क्यों नहीं करनी चाहिए?
उड़द दाल पकने के बाद पानी सोखकर फूल जाती है, जिससे उसका वजन और आयतन बढ़ जाता है। इसलिए 100 ग्राम सूखी और 100 ग्राम पकी दाल में पोषक तत्वों का घनत्व अलग होता है।
साबुत मूंग को अंकुरित करके खाने से क्या लाभ होता है?
साबुत मूंग को अंकुरित करने से उसमें मौजूद फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स की मात्रा प्राकृतिक रूप से काफी बढ़ जाती है।
क्या अलग-अलग दालों को मिलाकर पकाने से प्रोटीन की गुणवत्ता पूरी तरह बदल जाती है?
सिर्फ दालों को मिलाने से प्रोटीन की मूल गुणवत्ता में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आता, बल्कि इसके लिए दाल को चावल या गेहूं जैसे अनाज के साथ खाना जरूरी होता है।
अरहर दाल से शरीर को कौन-कौन से मुख्य पोषक तत्व मिलते हैं?
अरहर दाल शरीर को प्रोटीन के साथ कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और कई जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स प्रदान करती है।
दैनिक आहार में मसूर दाल का उपयोग क्यों आसान माना जाता है?
मसूर दाल बहुत जल्दी पककर तैयार हो जाती है और यह शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और फाइबर दोनों एक साथ उपलब्ध कराती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp