बच्चों में किसी गंभीर बीमारी की आशंका सामने आते ही परिजन घबरा जाते हैं, लेकिन प्रारंभिक चरण में पहचान हो जाने पर इलाज की सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। वयस्कों की तुलना में बाल्यकाल में पनपने वाली घातक बीमारियों के संकेत अक्सर सामान्य मौसमी संक्रमण या रोजमर्रा की तकलीफों जैसे प्रतीत होते हैं। यही कारण है कि शुरुआत में अभिभावक या शिक्षक अक्सर इन्हें साधारण मानकर अनदेखा कर देते हैं। शरीर में होने वाले मामूली बदलावों, बिना स्पष्ट वजह के लगातार चढ़ने वाले तापमान, अचानक गिरते वजन, त्वचा पर अकारण उभरने वाले नीले धब्बों, शरीर के किसी अंग में गांठ, आंखों में असामान्य चमक या सुबह के वक्त तेज सिरदर्द और उल्टी को गंभीरता से परखना चाहिए। समय रहते चिकित्सीय परामर्श लेना मासूम की जान सुरक्षित रखने का सबसे अहम कदम साबित होता है।
शुरुआती पहचान और समय पर इलाज का महत्व
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, कम उम्र में होने वाले कैंसर का समय रहते पता चलना बच्चे के पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना को काफी हद तक मजबूत कर देता है। बचपन में उभरने वाले लक्षणों का स्वरूप सामान्य सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार या पेट की आम समस्याओं से मिलता-जुलता होता है। ऐसे में माता-पिता और डॉक्टरों दोनों के लिए सतर्क रहना जरूरी हो जाता है, ताकि बीमारी अंदरूनी अंगों तक गंभीर प्रभाव न डाल सके।
बिना किसी स्पष्ट वजह के लंबे समय तक बुखार बना रहना
बच्चों में यह स्थिति सबसे अधिक सामने आने वाले कैंसर के लक्षणों में शामिल है। जब कैंसर कोशिकाएं अस्थि मज्जा (बोन मैरो) में सामान्य रक्त कोशिकाओं की जगह कब्जा करने लगती हैं, तब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बुरी तरह कमजोर पड़ जाती है। प्रतिरक्षा प्रणाली के क्षीण होने के कारण शरीर मामूली संक्रमणों से भी नहीं लड़ पाता, जिससे बुखार लगातार बना रहता है। इसके अतिरिक्त, कैंसर कोशिकाएं स्वयं ऐसे रासायनिक तत्व (पायरोजन) स्रावित करती हैं, जो मस्तिष्क के तापमान नियंत्रण केंद्र को उत्तेजित कर देते हैं, जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है।
असामान्य गांठें या शरीर में दर्द रहित सूजन
शरीर की लसिका ग्रंथियों में कैंसर कोशिकाओं का जमाव होने पर त्वचा के नीचे बिना दर्द वाली गिल्टियां या सूजन उभर आती हैं। यदि यह गांठ 2 सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे और साथ में बुखार व वजन में गिरावट भी दिखे, तो तत्काल विशेष जांच कराई जानी चाहिए। किसी स्थान पर गांठ बनने का सीधा अर्थ है कि अवांछित कोशिकाएं वहां इकट्ठा हो रही हैं। यदि समय पर समुचित चिकित्सा न मिले, तो ये कोशिकाएं रक्त प्रवाह के माध्यम से फेफड़ों, यकृत (लीवर) और मस्तिष्क तक फैल सकती हैं।
हड्डियों तथा जोड़ों में लगातार दर्द की शिकायत
हड्डी और जोड़ों में दर्द की समस्या विशेष रूप से 10 से 18 साल के किशोरों में ज्यादा देखी जाती है, क्योंकि इस उम्र में हड्डियों का विकास बहुत तेजी से हो रहा होता है। कैंसर कोशिकाएं हड्डियों के अंदरूनी हिस्से में तेजी से विभाजित होकर उन्हें भीतर से कमजोर और खोखला बना देती हैं, जिससे किशोरों को चलने-फिरने या सामान्य गतिविधियों में भी गहरा दर्द महसूस होता है।
अकारण वजन का कम होना और अत्यधिक कमजोरी
कैंसर की अवांछित कोशिकाएं तेजी से पनपने के लिए बच्चे के आहार से मिलने वाली लगभग पूरी कैलोरी और प्रोटीन को अवशोषित कर लेती हैं। ऐसी स्थिति में बच्चा सामान्य रूप से भोजन तो करता है, मगर उसका वजन बढ़ने के बजाय तेजी से घटने लगता है। इसके साथ ही कैंसर कोशिकाएं शरीर में ऐसे रसायन भी छोड़ती हैं, जिससे भूख में कमी आती है, जी मिचलाता है और मांसपेशियों का द्रव्यमान तेजी से घटने लगता है।
शरीर पर नीले निशान पड़ना और आसानी से रक्तस्राव होना
बच्चों में रक्त कैंसर (ल्यूकेमिया) या अन्य गंभीर विकारों के मुख्य संकेतों में छोटी सी चोट पर गहरा नीला निशान बनना या मसूड़ों व नाक से खून बहना शामिल है। अस्थि मज्जा में विकृत कोशिकाओं की अनियंत्रित बढ़ोतरी से स्वस्थ प्लेटलेट्स का निर्माण बाधित हो जाता है। प्लेटलेट्स का मुख्य कार्य रक्त का थक्का जमाना होता है, और इनकी भारी कमी के चलते हल्का सा आघात भी अनियंत्रित रक्तस्राव का कारण बन जाता है। यदि इनमें से कोई भी लक्षण 2 सप्ताह से ज्यादा समय तक बना रहे या स्थिति बिगड़े, तो बिना देर किए विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करवानी चाहिए।



















