बालों को घना बनाने में रोजमेरी या करी पत्ता, जानिए वैज्ञानिक रिसर्च का क्या है फैसलाछपवा के केला प्लांट संचालक ने बताया एसी और केमिकल से पके केले में अंतर, इस तरह करें असली पहचान72 गानों वाली भारतीय क्लासिक जिसका वर्ल्ड रिकॉर्ड आज भी अटूट हैअभिषेक शर्मा ने टी20 इंटरनेशनल में रचा इतिहास, 25 या उससे कम गेंदों में 12वीं बार पचास रन बनाकर स्थापित किया कीर्तिमानइंग्लैंड में एशेज 2027 खेलने पर स्टीव स्मिथ का संशय, ओलंपिक 2028 और टी20 लीग पर टिका ध्यानइटली में रानी मुखर्जी और आदित्य चोपड़ा की सीक्रेट शादी के अनसुने किस्से आए सामने, सिर्फ 13 मेहमान थे मौजूदआकिब जावेद और वहाब रियाज पर गिर सकती है गाज, पीसीबी में बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारीओवल में नंबर 10 और 11 के दो भारतीय बल्लेबाजों ने जब जड़े थे शतक, आठ दशकों तक कायम रहा कीर्तिमानद पैराडाइज रिव्यू (2026): स्पेशल स्क्रीनिंग में नानी के जादल अवतार की धूम, जानिए कैसा है फर्स्ट हाफनीम करौली बाबा पर बनी 2 करोड़ की फिल्म ने रचा इतिहास, कम बजट वाली ब्लॉकबस्टर की पुरानी यादें ताजा
तिल की दोनों किस्मों के पोषण और स्वाद में बड़ा फर्क, जानिए अपनी थाली के लिए सही विकल्पस्वास्थ्य
19 सित॰ 2026, 9:32 pm (2 घंटे पहले)· 0

तिल की दोनों किस्मों के पोषण और स्वाद में बड़ा फर्क, जानिए अपनी थाली के लिए सही विकल्प

काले और सफेद तिल दोनों ही शरीर के लिए जरूरी खनिजों से भरपूर होते हैं, लेकिन छिलके और एंटीऑक्सीडेंट्स की मौजूदगी इनके पोषण और इस्तेमाल का तरीका बदल देती है।

पारंपरिक भारतीय खानपान में तिल का इस्तेमाल सदियों से मिठास और जायके के लिए होता आ रहा है। सर्दियों के मौसम में बनने वाले लड्डू, चिक्की और गजक से लेकर नमकीन चटनी और रोल तक में यह अहम सामग्री के रूप में शामिल रहता है। आमतौर पर बाजार में तिल दो रूपों में बिकता है, एक गहरा काला तिल और दूसरा सफेद तिल। कई लोग अक्सर इस उलझन में रहते हैं कि शरीर को तंदुरुस्त रखने के लिए इन दोनों में से किसे प्राथमिकता देनी चाहिए। दोनों के रंग, स्वाद, बाहरी छिलके और उनमें मौजूद खास तत्वों के बीच कुछ बुनियादी अंतर होते हैं, जिन्हें समझकर ही सही चुनाव किया जा सकता है।

काले तिल की बनावट, पोषक तत्व और उसके लाभ

काले तिल की सबसे बड़ी खासियत उसका साबुत बाहरी छिलका होता है, जिसका रंग गहरा काला रहता है। इसी छिलके और प्राकृतिक गहरे रंग की वजह से इनमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव में मददगार साबित होते हैं। पोषण के स्तर पर देखें तो काले तिल में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज मौजूद होते हैं। स्वाद के मामले में यह किस्म थोड़ी तेज और मेवे जैसी यानी नटी खुशबू लिए होती है। इसी वजह से पारंपरिक पकवानों और विशेष व्यंजनों में इसका उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है।

ये भी पढ़ें

सफेद तिल की खासियतें और आधुनिक व्यंजनों में उपयोग

बाजार में मिलने वाले सफेद तिल ज्यादातर वही होते हैं जिनका बाहरी छिलका निकाल दिया जाता है। छिलका हटने के कारण इनका स्वाद काफी सौम्य और हल्का हो जाता है। पोषण की बात करें तो सफेद तिल भी शरीर को प्रोटीन, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे जरूरी मिनरल्स प्रदान करते हैं। इसके अलावा इनमें अनसैचुरेटेड फैट की मात्रा भी पाई जाती है। तिल में मौजूद फैट और प्रोटीन खाने को तृप्तिदायक बनाते हैं, जिससे भोजन के बाद लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। अपने हल्के स्वाद के चलते सफेद तिल का प्रयोग केक, बेकरी उत्पादों और विविध प्रकार की मिठाइयों में सजावट व स्वाद बढ़ाने के लिए खूब किया जाता है।

दोनों में से किसे चुनें और सेवन का सही तरीका

किसी एक किस्म को सभी व्यक्तियों के लिए पूरी तरह बेहतर घोषित करना उचित नहीं होगा, क्योंकि दोनों ही किस्में संतुलित खानपान का एक पौष्टिक हिस्सा बन सकती हैं। काले तिल जहां अपने गहरे रंग से मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट और मजबूत मिनरल प्रोफाइल के लिए जाने जाते हैं, वहीं सफेद तिल आसानी से पचने वाले रूप में जरूरी मिनरल्स और प्रोटीन मुहैया कराते हैं। आप अपने स्वाद, जरूरत और रेसिपी की मांग के अनुसार दोनों में से किसी का भी चयन कर सकते हैं। हालांकि इनका सेवन करते समय संयम बरतना सबसे ज्यादा जरूरी है, क्योंकि तिल में फैट और कैलोरी की मात्रा काफी अधिक होती है। भुने हुए तिल को आप सब्जी की स्टर-फ्राई डिश, पोहा या केक में आसानी से छिड़क सकते हैं। यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी कोई पुरानी समस्या, एलर्जी या आहार से जुड़ी सख्त पाबंदियां हैं, तो इसकी उचित मात्रा तय करने के लिए विशेषज्ञ की राय लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है।

सवाल-जवाब

काले तिल और सफेद तिल में मुख्य अंतर क्या होता है?
काले तिल में बाहरी छिलका मौजूद रहता है जिससे इसका रंग गहरा और स्वाद नटी होता है, जबकि सफेद तिल आमतौर पर बिना छिलके वाले और हल्के स्वाद के होते हैं।
काले तिल में कौन से खास पोषक तत्व पाए जाते हैं?
काले तिल में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और गहरे रंग से जुड़े एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाते हैं।
सफेद तिल में कौन से खनिज और फैट मौजूद होते हैं?
सफेद तिल में प्रोटीन, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन और स्वस्थ अनसैचुरेटेड फैट पाए जाते हैं।
तिल का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह क्यों दी जाती है?
तिल में स्वाभाविक रूप से फैट और कैलोरी की मात्रा काफी अधिक होती है, इसलिए अधिक मात्रा में खाने से बचना चाहिए।
दैनिक भोजन में तिल को किस तरह शामिल किया जा सकता है?
भुने हुए तिल को सब्जियों की स्टर-फ्राई डिश, पोहा, केक या मिठाइयों में ऊपर से मिलाकर आसानी से खाया जा सकता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp