पारंपरिक भारतीय खानपान में तिल का इस्तेमाल सदियों से मिठास और जायके के लिए होता आ रहा है। सर्दियों के मौसम में बनने वाले लड्डू, चिक्की और गजक से लेकर नमकीन चटनी और रोल तक में यह अहम सामग्री के रूप में शामिल रहता है। आमतौर पर बाजार में तिल दो रूपों में बिकता है, एक गहरा काला तिल और दूसरा सफेद तिल। कई लोग अक्सर इस उलझन में रहते हैं कि शरीर को तंदुरुस्त रखने के लिए इन दोनों में से किसे प्राथमिकता देनी चाहिए। दोनों के रंग, स्वाद, बाहरी छिलके और उनमें मौजूद खास तत्वों के बीच कुछ बुनियादी अंतर होते हैं, जिन्हें समझकर ही सही चुनाव किया जा सकता है।
काले तिल की बनावट, पोषक तत्व और उसके लाभ
काले तिल की सबसे बड़ी खासियत उसका साबुत बाहरी छिलका होता है, जिसका रंग गहरा काला रहता है। इसी छिलके और प्राकृतिक गहरे रंग की वजह से इनमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव में मददगार साबित होते हैं। पोषण के स्तर पर देखें तो काले तिल में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज मौजूद होते हैं। स्वाद के मामले में यह किस्म थोड़ी तेज और मेवे जैसी यानी नटी खुशबू लिए होती है। इसी वजह से पारंपरिक पकवानों और विशेष व्यंजनों में इसका उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है।
सफेद तिल की खासियतें और आधुनिक व्यंजनों में उपयोग
बाजार में मिलने वाले सफेद तिल ज्यादातर वही होते हैं जिनका बाहरी छिलका निकाल दिया जाता है। छिलका हटने के कारण इनका स्वाद काफी सौम्य और हल्का हो जाता है। पोषण की बात करें तो सफेद तिल भी शरीर को प्रोटीन, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे जरूरी मिनरल्स प्रदान करते हैं। इसके अलावा इनमें अनसैचुरेटेड फैट की मात्रा भी पाई जाती है। तिल में मौजूद फैट और प्रोटीन खाने को तृप्तिदायक बनाते हैं, जिससे भोजन के बाद लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। अपने हल्के स्वाद के चलते सफेद तिल का प्रयोग केक, बेकरी उत्पादों और विविध प्रकार की मिठाइयों में सजावट व स्वाद बढ़ाने के लिए खूब किया जाता है।
दोनों में से किसे चुनें और सेवन का सही तरीका
किसी एक किस्म को सभी व्यक्तियों के लिए पूरी तरह बेहतर घोषित करना उचित नहीं होगा, क्योंकि दोनों ही किस्में संतुलित खानपान का एक पौष्टिक हिस्सा बन सकती हैं। काले तिल जहां अपने गहरे रंग से मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट और मजबूत मिनरल प्रोफाइल के लिए जाने जाते हैं, वहीं सफेद तिल आसानी से पचने वाले रूप में जरूरी मिनरल्स और प्रोटीन मुहैया कराते हैं। आप अपने स्वाद, जरूरत और रेसिपी की मांग के अनुसार दोनों में से किसी का भी चयन कर सकते हैं। हालांकि इनका सेवन करते समय संयम बरतना सबसे ज्यादा जरूरी है, क्योंकि तिल में फैट और कैलोरी की मात्रा काफी अधिक होती है। भुने हुए तिल को आप सब्जी की स्टर-फ्राई डिश, पोहा या केक में आसानी से छिड़क सकते हैं। यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी कोई पुरानी समस्या, एलर्जी या आहार से जुड़ी सख्त पाबंदियां हैं, तो इसकी उचित मात्रा तय करने के लिए विशेषज्ञ की राय लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है।



















