सामान्य दिखने वाले स्वास्थ्य के पीछे कई बार ऐसी बीमारियां छुपी होती हैं, जो इंसान को किसी स्पष्ट चेतावनी या लक्षण के बिना लंबे समय तक नुकसान पहुंचाती रहती हैं। हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज इसी श्रेणी में आने वाली समस्याएं हैं, जिन्हें आम तौर पर साइलेंट बीमारी के रूप में देखा जाता है। बहुत से व्यक्तियों को वर्षों तक यह आभास ही नहीं हो पाता कि उनका रक्तचाप अथवा ब्लड शुगर सामान्य सीमा से ऊपर चल रहा है। इस पूरी अवधि के दौरान शरीर के अंदरूनी तंत्र को धीमा लेकिन निरंतर नुकसान पहुंचता रहता है, जो आगे चलकर अत्यंत गंभीर और जटिल चिकित्सीय परिस्थितियां पैदा कर सकता है। फोर्टिस ग्रेटर नोएडा के सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजी डॉक्टर हरनिश सिंह भाटिया के अनुसार, आंतरिक अंगों की सुरक्षा के लिए समय-समय पर नियमित रूटीन चेकअप करवाते रहना बेहद जरूरी है।
रक्तचाप और शुगर की नियमित पड़ताल क्यों है आवश्यक
शरीर में हाई ब्लड प्रेशर और अनियंत्रित डायबिटीज, दोनों ही सीधे तौर पर रक्त वाहिकाओं और हृदय की कार्यप्रणाली को क्षति पहुंचाते हैं। जब रक्तचाप लंबे समय तक सीमा से अधिक बना रहता है, तो यह दिल की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इसके परिणामस्वरूप हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर और स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारियों की संभावना में काफी इजाफा हो जाता है। दूसरी तरफ, रक्त में लगातार बढ़ा हुआ शुगर का स्तर नसों की अंदरूनी संवेदनशील परत को धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त करता रहता है। इस तरह का नुकसान हृदय की धमनियों के साथ-साथ किडनी से जुड़े रोगों का खतरा भी बढ़ा देता है। यदि किसी व्यक्ति में उच्च रक्तचाप और मधुमेह दोनों समस्याएं एक साथ मौजूद हों, तो हृदय संबंधी जटिलताओं का जोखिम कई गुना अधिक बढ़ जाता है।
किन लोगों को जांच में बरतनी चाहिए खास सावधानी
इन बीमारियों की पहचान के लिए लक्षणों के उभरने की प्रतीक्षा करना भारी पड़ सकता है। समय रहते कदम उठाने के लिए नियमित रक्तचाप की निगरानी के साथ चिकित्सक की देखरेख में ब्लड शुगर और HbA1c का परीक्षण कराना आवश्यक माना गया है। कुछ विशेष समूहों को इस दिशा में और अधिक सजग रहने की जरूरत होती है। जिन व्यक्तियों के परिवार में पहले से डायबिटीज या हृदय रोग का मेडिकल इतिहास रहा है, उन्हें विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए। इसके अतिरिक्त, जो लोग बढ़े हुए वजन से जूझ रहे हैं, जिनकी दिनचर्या में शारीरिक श्रम या व्यायाम की कमी है, अथवा जिनकी उम्र लगातार बढ़ रही है, उन्हें नियमित अंतराल पर स्वास्थ्य स्क्रीनिंग करवाने को अपनी प्राथमिकता में शामिल करना चाहिए।
शुरुआती पहचान से संभव है प्रभावी नियंत्रण
रोग का सही समय पर पता चलने का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि शुरुआती चरण से ही प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं। समय रहते जानकारी मिलने पर जीवनशैली में जरूरी सुधार करके और आवश्यकतानुसार दवाओं के माध्यम से दोनों ही समस्याओं को पूरी तरह नियंत्रित रखा जा सकता है। एक संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाना, नियमित शारीरिक व्यायाम करना, हर रोज पर्याप्त नींद लेना, मानसिक तनाव पर काबू पाना और किसी भी प्रकार के धूम्रपान से दूरी बनाना हृदय की सेहत को मजबूत रखने में अहम योगदान देते हैं।
अदृश्य बीमारियों से बचाव का सही तरीका
व्यक्ति का केवल अच्छा या स्वस्थ महसूस करना इस बात का पूर्ण प्रमाण नहीं है कि शरीर पूरी तरह निरोग है। कई बार आंतरिक स्तर पर बीमारियां धीरे-धीरे अपनी जड़ें जमाती रहती हैं और सामान्य दिनचर्या में उनके संकेत पकड़ में नहीं आते। आधुनिक चिकित्सा पद्धति में कई ऐसे उन्नत परीक्षण उपलब्ध हैं, जिनके जरिए किसी बड़ी जटिलता के पैदा होने से पहले ही समस्या की पहचान की जा सकती है। स्वास्थ्य में किसी भी गंभीर गिरावट से पहले स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नियमित जांच को आदत बनाएं, अपने बीपी और शुगर के आंकड़ों की सटीक जानकारी रखें, और किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें।



















