उम्र बढ़ने के साथ घुटनों का दर्द और कूल्हों की जकड़न जैसी शिकायतें अब लगभग हर घर की कहानी बनती जा रही हैं। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए इस बार योग के सबसे बड़े आयोजन की दिशा भी तय की गई है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने विश्व योग दिवस 2026 के लिए थीम “हेल्दी एजिंग के लिए योग” तय की है। मंत्रालय का मानना है कि हर उम्र में बेहतर जीवन जीने के लिए शारीरिक सेहत के साथ-साथ मानसिक संतुलन भी उतना ही जरूरी है।
क्यों चुना गया उम्र और सेहत का यह विषय
इसी सोच के तहत लोगों को ऐसे योग अभ्यासों की जानकारी दी जा रही है जो ढलती उम्र में भी शरीर को चुस्त और स्वस्थ बनाए रख सकें। इन्हीं अभ्यासों में से एक है “नी मूवमेंट”, जिसे जोड़ों को सक्रिय रखने का सरल जरिया माना जा रहा है।
आधुनिक जीवनशैली और कमजोर होते जोड़
आज की बैठे-बैठे काम करने वाली दिनचर्या ने हालात और बिगाड़े हैं। घंटों एक ही जगह बैठे रहना और शारीरिक हलचल का अभाव — यही दो बड़े कारण हैं जिनसे घुटनों में दर्द, कूल्हों में जकड़न और शरीर के निचले हिस्से की कमजोरी आम हो चली है। ऐसे में नी मूवमेंट जैसा अभ्यास शरीर के निचले हिस्से को दोबारा ताकत देने में कारगर साबित हो सकता है।
नी मूवमेंट क्या है और कैसे काम करता है
आयुष मंत्रालय के मुताबिक यह बेहद सहज योग व्यायाम है, जो खासतौर पर घुटनों और कूल्हों के जोड़ों को मजबूती देने का काम करता है। नियमित अभ्यास से शरीर का संतुलन सुधरता है और चलना, बैठना, खड़ा होना तथा सीढ़ियां चढ़ना जैसे रोजमर्रा के काम आसान हो जाते हैं। जो लोग लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहते हैं या जिनकी शारीरिक गतिविधि बहुत कम है, उनके लिए इसे विशेष रूप से उपयोगी माना गया है।
लचीलापन, चिकनाई और दर्द से राहत
इस अभ्यास से जोड़ों का लचीलापन बढ़ता है और आसपास की मांसपेशियां सक्रिय बनी रहती हैं। यह जोड़ों में मौजूद प्राकृतिक चिकनाई को भी बनाए रखता है, जिससे अकड़न और असहजता कम होने लगती है। लगातार अभ्यास करते रहने पर घुटनों के दर्द में राहत मिलने की संभावना रहती है और चोट लगने का जोखिम भी घटता है।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि घुटनों में दर्द, कमजोरी या डगमगाहट अक्सर इस बात का संकेत होती है कि जोड़ों का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। ऐसी स्थिति में हल्के और सुरक्षित योग अभ्यास शरीर को फिर से गतिशील बनाने में मदद करते हैं। नी मूवमेंट भी ऐसा ही एक सरल अभ्यास है, जिसके लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं पड़ती और इसे घर पर ही किया जा सकता है।
शुरुआत में रखें ये सावधानियां
इसे धीरे-धीरे शुरू करना चाहिए। अगर किसी के घुटनों या कूल्हों में तेज दर्द बना रहता है, तो पहले योग प्रशिक्षक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह ले लेना समझदारी होगी। सही तरीके और नियमितता के साथ किया गया यह अभ्यास शरीर की मुद्रा सुधारने, संतुलन बढ़ाने और जोड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मददगार हो सकता है।













