बढ़ती उम्र, गलत जीवनशैली या शारीरिक कमजोरी के कारण जब जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न शुरू होती है, तो उठना, बैठना और चलना भी दूभर हो जाता है। हड्डियों और जोड़ों की इस परेशानी से निपटने के लिए चिकित्सकीय दवाइयों के साथ-साथ सही पोषण पर ध्यान देना बेहद जरूरी माना जाता है। आहार में पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करने से जोड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है और सूजन कम करने में मदद मिलती है। आयुर्वेदिक हेल्थ कोच डिंपल जांगड़ा ने ऐसे कुछ खास प्राकृतिक खाद्य पदार्थों और घरेलू उपायों का उल्लेख किया है, जो जोड़ों की सेहत सुधारने और रोजमर्रा की तकलीफ को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
हल्दी वाला दूध और सूजन पर इसका असर
हल्दी का सेवन भारतीय घरों में सदियों से कई स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के रूप में किया जाता रहा है। हल्दी में करक्यूमिन नामक एक शक्तिशाली सक्रिय यौगिक मौजूद होता है, जो अपने सूजन-रोधी गुणों के लिए जाना जाता है। जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत पाने के लिए हल्दी वाले दूध को अपनी संतुलित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। रात के समय गर्म दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर पीने से शरीर को आराम मिलता है और जोड़ों के अंदर पैदा होने वाले खिंचाव तथा जकड़न में कमी आ सकती है।
तिल के बीज, तेल और कैल्शियम का पोषण
जोड़ों को मजबूती प्रदान करने के लिए हड्डियों का घनत्व और ताकत अच्छी होना अनिवार्य है। तिल के बीज कैल्शियम, स्वस्थ वसा और कई अन्य आवश्यक खनिजों के बेहतरीन स्रोत माने जाते हैं। कैल्शियम हड्डियों की संरचना को सुरक्षित रखने और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से बचाव में मदद करता है। खानपान में सफेद या काले तिल को शामिल करने के अलावा पारंपरिक रूप से इसके तेल का उपयोग मालिश के लिए भी किया जाता रहा है, जिससे जोड़ों के आसपास रक्त संचार बेहतर बना रहता है।
अदरक का पानी और मेथी के दानों के फायदे
अदरक में जिंजरॉल नामक प्राकृतिक तत्व पाया जाता है, जिसमें जोड़ों की पुरानी सूजन को कम करने वाले गुण होते हैं। नियमित रूप से सुबह अदरक का उबला पानी पीने से जोड़ों की जकड़न में कुछ हद तक राहत मिल सकती है। विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों में भी यह बात सामने आई है कि अदरक का नियमित सेवन हल्के दर्द को नियंत्रित करने में सहयोग कर सकता है।
इसी तरह मेथी के बीज भी जोड़ों के लिए काफी गुणकारी माने जाते हैं। मेथी में प्रचुर मात्रा में फाइबर और महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं। रात भर पानी में भिगोकर रखे गए मेथी के दानों का सेवन किया जा सकता है या फिर इन्हें भोजन की तैयारियों में मिलाया जा सकता है। इसके अलावा, भीगे हुए मेथी के दानों से बनने वाले जेल जैसे पेस्ट का पारंपरिक रूप से जोड़ों को ठंडक और आराम पहुंचाने के लिए बाहरी उपयोग भी किया जाता है।
अखरोट, अलसी और लहसुन वाले तेल की मालिश
अखरोट और अलसी के बीज शरीर में स्वस्थ वसा का संतुलन बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं। इन दोनों ही चीजों में अल्फा-लिनोलेनिक एसिड पाया जाता है, जो ओमेगा-3 फैटी एसिड का एक वनस्पति आधारित प्रकार है। ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर की आंतरिक सूजन को धीमा करने और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन्हें दैनिक आहार में सूखे मेवों या स्मूदी के साथ शामिल करना फायदेमंद होता है।
खानपान के अलावा गर्म तिल के तेल में लहसुन की कलियां पकाकर घुटनों की मालिश करना एक बहुत पुराना घरेलू उपाय है। लहसुन के औषधीय गुण और गर्म तिल के तेल की चिकनाई मिलकर मांसपेशियों के तनाव को कम करती है। घुटनों पर इस तेल से हल्की मालिश करने से कई लोगों को तात्कालिक और अस्थायी रूप से दर्द में आराम का अहसास होता है।
लक्षण बिगड़ने पर डॉक्टरी सलाह लेना न भूलें
घरेलू नुस्खे जोड़ों को सामान्य आराम देने के लिए उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन यह किसी गंभीर बीमारी का संपूर्ण इलाज नहीं हैं। यदि जोड़ों में लगातार तेज दर्द, गंभीर सूजन या अत्यधिक अकड़न बनी रहती है, तो बिना देर किए विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर अचानक किसी जोड़ में असहनीय दर्द उठे, त्वचा पर लालिमा दिखे, गर्माहट महसूस हो या साथ में बुखार आ जाए, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें। केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहकर जरूरी चिकित्सकीय जांच और उपचार में देरी करना स्थिति को और अधिक बिगाड़ सकता है।





















