घरेलू इक्विटी बाजारों में सोमवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए भारी उथल-पुथल और घबराहट से भरा साबित हुआ। वैश्विक बाजारों में फैली तेज बिकवाली की लहर ने भारतीय बाजार को भी अपनी चपेट में ले लिया। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में आई जोरदार गिरावट के दबाव में प्रमुख घरेलू सूचकांक ताश के पत्तों की तरह बिखरते दिखे। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का मानक सूचकांक सेंसेक्स 2200 अंकों से अधिक का गोता लगा गया, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी लगभग 700 अंकों के तीव्र नुकसान के साथ बंद हुआ। विदेशी पूंजी की संभावित निकासी और कमजोर वैश्विक संकेतों ने पूरे दिन दलाल स्ट्रीट पर भयंकर मंदी का माहौल बनाए रखा।
इंडिया विक्स में 2015 के बाद का सबसे बड़ा एकदिवसीय उछाल
बाजार में घबराहट और अस्थिरता को मापने वाले पैमाने इंडिया विक्स में अप्रत्याशित तेजी दर्ज की गई। डर का मीटर कहे जाने वाले इस सूचकांक में एक ही दिन के भीतर 52 प्रतिशत का विशाल उछाल देखा गया, जिसके साथ यह 20 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया। अगस्त 2015 के बाद से यह इस इंडिकेटर की सबसे बड़ी दैनिक छलांग है। सामान्य तौर पर जब विक्स का स्तर नीचे रहता है, तो उसे बाजार के स्थिर अथवा सकारात्मक रहने का संकेत माना जाता है, जबकि इसमें अचानक तेज बढ़त भारी गिरावट की आशंका को पुख्ता करती है। गौर करने वाली बात यह रही कि कोरोना महामारी के चरम दौर में भी दैनिक आधार पर विक्स में ऐसा भयंकर उछाल दर्ज नहीं हुआ था।
ग्लोबल मंदी की आशंका और मिडल ईस्ट में जंग का खतरा
दलाल स्ट्रीट पर इस महाखौफ की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहराते संकट रहे। पश्चिम एशिया यानी मिडल ईस्ट के इलाके में युद्ध भड़कने की बढ़ती आशंकाओं ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को जोखिम वाली संपत्तियों से दूर कर दिया। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी केंद्रीय बैंक यूएस फेड द्वारा ब्याज दरों में कटौती टालने की संभावनाओं ने मंदी के डर को और हवा दे दी। अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों का मानना है कि दर कटौती में देरी से अमेरिका गहरी आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकता है, जिसके चलते दुनिया भर के उभरते बाजारों से विदेशी फंड्स की तेज निकासी शुरू हो सकती है। इसी अंदेशे ने संस्थागत निवेशकों को भारी बिकवाली करने पर मजबूर किया।
500 कंपनियों में लगा लोअर सर्किट, विशेषज्ञ की रणनीति
बिकवाली का दायरा इतना व्यापक था कि व्यापक बाजार के लगभग सभी सेक्टोरल सूचकांक लाल निशान में डूब गए। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में 4 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध करीब 500 कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग के दौरान निचला सर्किट लग गया, जिससे उनमें आगे खरीद-बिक्री थम गई। लोअर सर्किट छूने वाले प्रमुख शेयरों में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, रिलायंस पावर लिमिटेड, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड, जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड, वारी रिन्यूएबल टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और स्वान एनर्जी लिमिटेड जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल रहीं।
बाजार के मौजूदा हालात पर बाजार विशेषज्ञ प्रकाश दीवान ने कहा, “यह सप्ताह कठिन रहने वाला है. और वैश्विक बाजार हमें बता रहे हैं कि हमारे बाजारों के भीतर स्टॉक स्पेसिफिक एक्टीविटीज पर ध्यान केंद्रित करना बेहतर होगा.” विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा माहौल में व्यापक इंडेक्स पर दांव लगाने के बजाय व्यक्तिगत कंपनियों के बुनियादी आधार को परखना अधिक समझदारी भरा कदम होगा।



















