स्वास्थ्य जगत में एक बार फिर से एवियन इन्फ्लूएंजा यानी H5N1 को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। यह खतरनाक वायरस आम तौर पर पक्षियों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब इसके मामले स्तनधारी जीवों में भी देखे जाने लगे हैं। अमेरिका के वॉशिंगटन से एक ऐसा मामला सामने आया है जहाँ एक व्यक्ति संक्रमित गायों के संपर्क में आने के बाद इस बीमारी की चपेट में आ गया। इस ताजा घटनाक्रम ने आम जनमानस में यह चिंता पैदा कर दी है कि क्या यह बीमारी मवेशियों से इंसानों में फैल सकती है और क्या इसका असर हमारी रोजमर्रा की खान-पान की आदतों पर भी पड़ सकता है।
विशेष तौर पर यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या बिना उबाला या कच्चा दूध पीने से भी बर्ड फ्लू का संक्रमण फैल सकता है। जानकारों के अनुसार, यदि कोई गाय इस वायरस से संक्रमित है, तो उसके कच्चे दूध में वायरस की मौजूदगी संभव हो सकती है। ऐसे में बिना पाश्चुरीकरण वाला दूध पीना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। पाश्चुरीकरण वह वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें दूध को एक तय तापमान पर गर्म करके उसमें मौजूद हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट किया जाता है। इसलिए उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे कच्चा दूध पीने से परहेज करें और दूध को अच्छी तरह उबालकर ही उपयोग में लाएं। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि बाजार में मिलने वाला हर डेयरी उत्पाद दूषित है, बल्कि एहतियात के तौर पर केवल सही तरीके से प्रोसेस किए गए दूध का ही सेवन करना चाहिए।
इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. अरुण गुप्ता ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि भारत में फिलहाल घबराने की कोई बात नहीं है। डॉ. अरुण गुप्ता ने जनता को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा, "बीमार जानवरों से दूरी बनाए रखें और उन्हें छूने से बचें।" उनका कहना है कि हालांकि यह वायरस मुख्य रूप से पक्षियों में पनपता है, लेकिन गायों जैसे अन्य जीवों में इसके मिलने से पशुपालकों और डेयरी या पोल्ट्री उद्योग से जुड़े लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। यदि किसी पशु या पक्षी में संक्रमण के लक्षण नजर आते हैं, तो उसकी सूचना तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य या पशु चिकित्सा अधिकारियों को दी जानी चाहिए।
विशेषज्ञों ने आम जनता के लिए कुछ खास सावधानियां और दिशा-निर्देश साझा किए हैं जिनका पालन करके इस संक्रमण के खतरे से बचा जा सकता है। बीमार या मृत पड़े जानवरों और पक्षियों को अपने हाथों से सीधे न छुएं। पोल्ट्री फार्मिंग या पशुपालन से जुड़े लोग काम के दौरान पूरे सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति ने किसी संदिग्ध जानवर के संपर्क में आने के बाद शरीर में तेज बुखार, खांसी, आंखों में लालीपन या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण महसूस किए हैं, तो उसे बिना देर किए किसी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और अपनी ट्रेवल या संपर्क हिस्ट्री की जानकारी देनी चाहिए।
कुल मिलाकर, वॉशिंगटन की इस घटना ने यह चेतावनी जरूर दी है कि H5N1 अब केवल एवियन प्रजाति तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह स्तनधारियों के जरिए भी फैल सकता है। बावजूद इसके, भारतीय नागरिकों को अभी भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। यदि लोग थोड़ी सी सूझबूझ का परिचय दें, कच्चे दूध के सेवन से बचें और बीमार पशुओं से सुरक्षित दूरी बनाए रखें, तो इस जोखिम को काफी हद तक टाला जा सकता है। स्वास्थ्य महकमा और विशेषज्ञ लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे केवल प्रमाणित और सुरक्षित खाद्य पदार्थों का ही सेवन करें।



















