गिरने का डर बुढ़ापे में क्यों सताता है और योग कैसे बनता है सुरक्षा कवच, समझें पूरी बातस्वास्थ्य
3 घंटे पहले· 0

गिरने का डर बुढ़ापे में क्यों सताता है और योग कैसे बनता है सुरक्षा कवच, समझें पूरी बात

उम्र के साथ संतुलन और मांसपेशियों की ताकत घटने से बुजुर्गों में गिरने का खतरा बढ़ता है, लेकिन रोजाना थोड़ी देर का योगाभ्यास इस जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।

बढ़ती उम्र अपने साथ कई शारीरिक बदलाव लेकर आती है, और इनमें सबसे चुपके से आने वाला खतरा है — गिर पड़ने का डर। शरीर का संतुलन और मांसपेशियों की पकड़ जैसे-जैसे ढीली पड़ती है, वैसे-वैसे चलना, उठना-बैठना या फर्श पर जरा-सी फिसलन भी बड़ी मुसीबत बन सकती है। राहत की बात यह है कि इस जोखिम से लड़ने का एक आसान और बिना खर्च वाला तरीका मौजूद है — नियमित योगाभ्यास।

आखिर उम्र के साथ गिरने का खतरा क्यों बढ़ता है

60 साल या उससे ज्यादा उम्र में शरीर के भीतर कई बदलाव साथ-साथ चलते हैं। मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं, जोड़ों में अकड़न आ जाती है और शरीर को संतुलित रखने की सहज क्षमता घटने लगती है। यही वजह है कि रोजमर्रा के मामूली काम करते वक्त भी पैर लड़खड़ा जाते हैं और गिरने की आशंका बढ़ जाती है।

यह कोई छोटी बात नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, बुजुर्गों में गिरना चोट और विकलांगता की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। यानी एक बार का गिरना किसी बुजुर्ग के लिए लंबे समय की परेशानी और निर्भरता में बदल सकता है।

योग कैसे बनता है बचाव की ढाल

आयुष मंत्रालय का कहना है कि नियमित योगाभ्यास शरीर के संतुलन, लचीलेपन और तालमेल (कोऑर्डिनेशन) को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है। अलग-अलग अध्ययन भी इसी ओर इशारा करते हैं — जिन वरिष्ठ नागरिकों ने योग को अपनी दिनचर्या में शामिल किया, उनके बैलेंस और चलने-फिरने की क्षमता (मोबिलिटी) में सुधार देखा गया। और जब संतुलन बेहतर होता है, तो गिरने का खतरा अपने आप घट जाता है।

बुजुर्गों के लिए सबसे फायदेमंद आसन

कुछ सरल योगासन खासतौर पर बड़ी उम्र के लोगों के लिए असरदार माने जाते हैं। इन्हें धीरे-धीरे और सावधानी से किया जाए तो शरीर ज्यादा स्थिर और सक्रिय बना रहता है।

  • वृक्षासन — शरीर का संतुलन साधने में बेहद कारगर।
  • ताड़ासन — शरीर की मुद्रा सुधारता है और स्थिरता बढ़ाता है।
  • भुजंगासन — पीठ और रीढ़ की मांसपेशियों को मजबूती देता है।
  • सेतु बंधासन — कमर, कूल्हों और पैरों की ताकत बढ़ाने में उपयोगी।

इन आसनों का लगातार अभ्यास शरीर को थामे रखने वाली मांसपेशियों को मजबूत रखता है, जिससे चलने-फिरने में आत्मविश्वास बना रहता है।

सिर्फ शरीर नहीं, मन भी होता है मजबूत

योग का असर शारीरिक मजबूती तक सीमित नहीं रहता। यह तनाव, डर और घबराहट को कम करने में भी काम आता है। नियमित अभ्यास से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह अपने रोजमर्रा के काम कहीं ज्यादा सहजता और बेफिक्री के साथ कर पाता है। गिरने का जो डर मन में बैठा रहता है, वह भी धीरे-धीरे कम होने लगता है।

कितना और कैसे करें

विशेषज्ञ मानते हैं कि रोजाना महज 20 से 30 मिनट का योग भी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। हालांकि एक एहतियात जरूरी है — अगर किसी को पहले से कोई बीमारी, जोड़ों की दिक्कत या दूसरी कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है, तो योग की शुरुआत किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

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