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बंगाल में बदलाव खुद बोलेगा: सुवेंदु अधिकारी ने पांच हफ्ते के कामकाज का दिया हिसाब, मेट्रो से लेकर सीमा तक गिनाए कदमराजनीति
14 जून 2026, 12:04 am (45 दिन पहले)· 6

बंगाल में बदलाव खुद बोलेगा: सुवेंदु अधिकारी ने पांच हफ्ते के कामकाज का दिया हिसाब, मेट्रो से लेकर सीमा तक गिनाए कदम

बालीगंज के 'बंगाल विकास फोरम' में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सरकार के पांच सप्ताह पूरे होने पर विकास के दावे किए, वहीं भाजपा कार्यालय में लगे जनता दरबार में लोगों ने इलाज और नौकरी से जुड़ी अपनी फरियादें रखीं।

कोलकाता के बालीगंज में हुए 'बंगाल विकास फोरम' के मंच से पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य की नई सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा जनता के सामने रखा। उन्होंने जोर देकर कहा कि सत्ता संभाले अब पांच सप्ताह बीत चुके हैं और इतने ही समय में लोगों को जमीनी बदलाव महसूस होने लगा है। अधिकारी का तर्क था कि बदलाव का आकलन करने के लिए किसी प्रचार की जरूरत नहीं — जनता खुद देख ले कि क्या अब भी कहीं लाउडस्पीकरों का शोर गूंजता है या सड़कों को जाम कर देने जैसी तस्वीरें सामने आ रही हैं।

मुख्यमंत्री ने साफ किया कि उनके पद की अपनी मर्यादाएं हैं और वे बेवजह की बयानबाजी पर भरोसा नहीं करते। उन्होंने कहा, "मैं ज्यादा बात नहीं करूंगा, मैं काम करूंगा. मेरा काम ही खुद बोलेगा." उनके इस अंदाज को राज्य में विकास की रफ्तार दिखाने के दावे के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें संकेत साफ था कि उनकी प्राथमिकता राजनीतिक जुमलेबाजी नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले नतीजे हैं।

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सीमा से लेकर मेट्रो तक गिनाए काम

अधिकारी ने अपने भाषण में कई ठोस कदमों का जिक्र किया। उनके मुताबिक सीमावर्ती इलाकों में भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, और अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें हटाने का काम चल रहा है। बुनियादी ढांचे की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि कोलकाता के चिंगरीघाटा इलाके में मेट्रो परियोजना का जो काम लंबे अरसे से ठप पड़ा था, उसे अब फिर से रफ्तार दे दी गई है। उन्होंने बताया कि सरकार का पूरा ध्यान तीन चीजों पर टिका है — बुनियादी ढांचे का विकास, प्रशासनिक सुधार और कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाना।

भाजपा दफ्तर में लगा जनता दरबार

इसी कड़ी में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को भाजपा कार्यालय में अपना जनता दरबार लगाया। यहां उन्होंने अलग-अलग मसलों पर पहुंचे लोगों की शिकायतें खुद सुनीं और संबंधित अधिकारियों को उनके जल्द समाधान के निर्देश दिए। यह साप्ताहिक सिलसिला उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद शुरू किया था, यह कहते हुए कि अब नागरिक हर हफ्ते सीधे उनसे मिल सकेंगे। पहला 'जनता दरबार' 18 मई को आयोजित हुआ था।

शनिवार के दरबार में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के परिजन, स्वास्थ्यकर्मी और रोजगार की तलाश में भटक रहे लोग बड़ी तादाद में पहुंचे, ताकि अपनी परेशानियां सीधे मुख्यमंत्री तक रख सकें। ऐसी ही एक फरियादी करुणा ने बताया कि वे अपनी बेटी के इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लगाने आई हैं।

नौकरी की सुरक्षा की मांग लेकर पहुंचे लोग

एक अन्य महिला तनिमा चटर्जी अपनी नौकरी पक्की करने की मांग के साथ इस साप्ताहिक शिकायत निवारण कार्यक्रम में शामिल हुईं। वे सरकार की मिशन वात्सल्य पहल में कार्यक्रम अधिकारी के तौर पर काम करती हैं। उन्होंने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, "हम कठिन परिस्थितियों में रह रहे बच्चों के लिए परिवार-आधारित और गैर-संस्थागत देखभाल को बढ़ावा देते हैं. राज्य में 876 कर्मचारी कार्यरत हैं, फिर भी हमें नौकरी की सुरक्षा नहीं मिली है. हमें केवल एकमुश्त मानदेय दिया जाता है."

पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए चटर्जी ने जोड़ा, "पिछली सरकार ने हमारे लिए कभी कुछ नहीं किया, लेकिन हमें उम्मीद है कि भाजपा सरकार हमारी नौकरियों को स्थायी करेगी." दरबार में कई और लोग पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे। उनका आरोप था कि पिछली सरकार ने हत्या के मामलों समेत दूसरे अपराधों को दबाने की कोशिश की थी।

जनता तक पहुंच का बड़ा जरिया

राजनीतिक हलकों में इस साप्ताहिक जनसंपर्क पहल को बंगाल में सत्ता में आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के शुरुआती जनोन्मुखी प्रशासनिक कदमों में से एक माना जा रहा है। भाजपा शासित दूसरे राज्यों में भी इस तरह की जनसुनवाई का चलन रहा है, और पार्टी इसे आम लोगों तक पहुंच बढ़ाने और शिकायतों के तुरंत निपटारे का असरदार माध्यम बताती आई है।

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