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महामारी की दोहरी मार: एक तरफ कोविड की वापसी, तो दूसरी ओर गुजरात में चंडीपुरा वायरस से 8 बच्चों ने तोड़ा दमस्वास्थ्य
22 जुल॰ 2026, 4:52 pm (8 घंटे पहले)· 2

महामारी की दोहरी मार: एक तरफ कोविड की वापसी, तो दूसरी ओर गुजरात में चंडीपुरा वायरस से 8 बच्चों ने तोड़ा दम

देश में एक तरफ कोरोना वायरस का संक्रमण आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में दोबारा पैर पसार रहा है, वहीं दूसरी तरफ गुजरात में जानलेवा चंडीपुरा वायरस ने आठ लोगों की जान ले ली है, जिससे स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है।

भारत का स्वास्थ्य तंत्र एक बार फिर से दोहरे वायरल खतरे का सामना कर रहा है। एक तरफ जहां आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों में कोरोना वायरस (कोविड-19) के मामलों में फिर से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, वहीं देश के पश्चिमी हिस्से में एक और गंभीर संकट पैदा हो गया है। गुजरात में एक जानलेवा चंडीपुरा वायरस ने प्रकोप का रूप ले लिया है। इस बीमारी ने अब तक आठ लोगों की जान ले ली है, जिसके बाद सरकार और प्रशासन ने बड़े पैमाने पर एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

चंडीपुरा वायरस का कहर और बच्चों पर खतरा

चंडीपुरा वायरस का यह नया प्रकोप गुजरात के स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (रेत मक्खी) के काटने से फैलने वाला यह वायरस छोटे बच्चों के लिए विशेष रूप से खतरनाक साबित हो रहा है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक गुजरात में संक्रमण के 63 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से प्रयोगशाला जांच के बाद 12 मरीजों में इस बीमारी की आधिकारिक पुष्टि हुई है। इन पुष्ट मामलों में से नौ मरीज गुजरात के हैं, जबकि तीन पड़ोसी राज्य राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस संक्रमण के कारण अब तक आठ मरीजों की मौत हो चुकी है, जो इसकी उच्च मृत्यु दर को दर्शाता है।

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इस वायरस की गंभीरता का अंदाजा राजस्थान के सिरोही जिले की एक दो वर्षीय बच्ची के मामले से लगाया जा सकता है। इस मासूम बच्ची को विशेष इलाज के लिए गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित एक अस्पताल में लाया गया था। बनास मेडिकल कॉलेज एवं रिसर्च इंस्टीट्यूट के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. सुनील जोशी ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि बच्ची को 13 जुलाई को बेहद गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले ही दिन यानी 14 जुलाई को मेडिकल जांच में उसे चंडीपुरा वायरस से संक्रमित पाया गया। डॉक्टरों की टीम ने उसे छह दिनों तक शिशु रोग संबंधी आईसीयू में रखकर बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन 19 जुलाई को बच्ची ने दम तोड़ दिया।

सैंडफ्लाई नियंत्रण और गुजरात सरकार की तैयारी

बढ़ते खतरे को देखते हुए गुजरात सरकार ने चंडीपुरा प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए अपने संसाधन झोंक दिए हैं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने सरकार की व्यापक कार्ययोजना की जानकारी दी है। बीमारी फैलाने वाली सैंडफ्लाई पर लगाम कसने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में विशेष नियंत्रण अभियान चलाए जा रहे हैं। सैंडफ्लाई आकार में सामान्य मच्छरों से काफी छोटी होती है और नमी वाले अंधेरे स्थानों में पनपती है। यही कारण है कि यह अभियान मुख्य रूप से कच्चे मकानों और पशुशालाओं के आसपास केंद्रित है, क्योंकि ऐसी जगहें इन मक्खियों के पनपने का मुख्य केंद्र होती हैं। इसके साथ ही प्रभावित इलाकों में लोगों की सघन स्वास्थ्य जांच भी की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है। जिला स्तर के अस्पतालों में बच्चों के लिए विशेष आईसीयू बेड, वेंटिलेटर और सभी आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, चंडीपुरा वायरस मस्तिष्क में गंभीर सूजन पैदा करता है, जिसे एन्सेफलाइटिस कहा जाता है। इसके शुरुआती लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, दौरे पड़ना, उल्टी और दस्त होना, तथा मरीज का बेहोश हो जाना शामिल है। सरकार ने सभी अभिभावकों से एक विशेष अपील जारी की है कि यदि उनके बच्चों में इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो बिना समय गंवाए उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर जाएं।

आंध्र प्रदेश में कोरोना की चिंताजनक वापसी

एक तरफ जहां गुजरात चंडीपुरा वायरस से जूझ रहा है, वहीं दक्षिण भारत में कोविड-19 महामारी के फिर से सिर उठाने की खबरें आ रही हैं। आंध्र प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामलों में धीमी लेकिन लगातार वृद्धि देखी जा रही है। राज्य में अब कुल सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर 26 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी हालिया बुलेटिन के अनुसार, सात नए मामले सामने आए हैं। इनमें से चार मामले गुंटूर जिले से, दो पूर्वी गोदावरी से और एक मामला बापटला से दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट किया है कि ये सभी मामले अलग-अलग इलाकों से हैं और यह किसी एक ही जगह पर सामूहिक संक्रमण का हिस्सा नहीं हैं।

दुर्भाग्य से, कोरोना की इस वापसी ने लोगों की जान भी ली है। स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि की है कि राज्य में चार कोविड-19 मरीजों की मौत हो चुकी है। चिकित्सा अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिन चार मरीजों ने जान गंवाई है, वे सभी कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से पहले ही अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे, जिसने उनकी स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया। राज्य के विभिन्न जिलों में फैले 26 मामलों की बात करें तो कडपा जिले में सबसे अधिक आठ मामले हैं। इसके बाद गुंटूर में छह, पूर्वी गोदावरी में तीन, तथा काकीनाडा और बापटला में दो-दो मामले सामने आए हैं। इसके अलावा विशाखापत्तनम, एलुरु, श्री पोट्टी श्रीरामुलु नेल्लोर, एनटीआर और पार्वतीपुरम मन्यम जिलों में एक-एक संक्रमित व्यक्ति मिला है। विभाग के अनुसार, राज्य में अब तक 145 संदिग्ध नमूनों की जांच की गई है। वर्तमान में संक्रमित 26 लोगों में से 10 का इलाज अस्पतालों में चल रहा है, नौ मरीज अपने घरों में आइसोलेशन में हैं, जबकि तीन मरीज पूरी तरह से स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा चुके हैं।

पुणे और कोलकाता के अस्पतालों में बढ़ती भीड़

कोविड-19 के मामलों में यह वृद्धि केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र के पुणे शहर में लगभग तीन साल के लंबे अंतराल के बाद संक्रमण में फिर से तेजी देखी जा रही है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने पिछले दस दिनों के भीतर कई नए मरीजों की पहचान की है, जो वायरस के प्रसार का स्पष्ट संकेत है।

इसी तरह पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चिकित्सा केंद्रों में भी कोविड-19 के मरीज फिर से पहुंचने लगे हैं। शहर के एक निजी अस्पताल में वर्तमान में चार मरीज इस वायरल संक्रमण का इलाज करा रहे हैं। इनमें सबसे पहले एक 10 वर्षीय लड़के को भर्ती किया गया था, जिसके बाद तीन अन्य वयस्कों को अस्पताल लाना पड़ा। इस अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुभजीत सेन ने बताया कि इस समय मौसमी वायरल संक्रमण, विशेषकर इन्फ्लूएंजा के मामलों में भी भारी वृद्धि देखी जा रही है। डॉ. सेन ने जानकारी दी कि वे सार्स-सीओवी-2 वायरस से संक्रमित तीन मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इनमें से एक मरीज ठीक हो चुका है और उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है। हालांकि, अन्य दो मरीजों के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण उन्हें आईसीयू में भर्ती करना पड़ा था। राहत की बात यह है कि दोनों ने इलाज के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और अब उनकी हालत पूरी तरह से स्थिर है।

वर्तमान लक्षण और बचाव की आवश्यकता

हाल ही में सामने आ रहे कोविड-19 मामलों के पैटर्न का विश्लेषण करते हुए डॉक्टरों ने पाया है कि यह स्थिति काफी हद तक ओमिक्रॉन लहर से मिलती-जुलती है। अधिकांश मरीजों में ऊपरी श्वसन तंत्र से संबंधित बहुत ही हल्के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इनमें हल्का बुखार, गले में खराश, खांसी और शरीर में दर्द जैसी शिकायतें आम हैं। आम आबादी के लिए ये लक्षण आसानी से प्रबंधनीय हैं, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों ने कड़ी चेतावनी दी है कि बुजुर्गों और उन लोगों को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ सकता है जो पहले से ही किसी अन्य पुरानी बीमारी से पीड़ित हैं। मौसम में बदलाव के कारण इन्फ्लूएंजा और कोरोना के लक्षण इतने मिलते-जुलते हैं कि बिना जांच के दोनों में अंतर करना मुश्किल है।

मरीजों की बढ़ती संख्या के बावजूद स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम जनता से घबराहट से बचने की अपील की है। डॉ. सेन ने जोर देकर कहा कि समय पर उचित चिकित्सा देखभाल मिलने से ज्यादातर मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे बुनियादी सुरक्षा आदतों को फिर से अपनाएं। इनमें भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना, हाथों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना और गैर-जरूरी भीड़-भाड़ वाले आयोजनों से बचना शामिल है। यदि किसी व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण बिगड़ते हुए दिखाई दें, तो उसे तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। वर्तमान स्थिति में डरने की नहीं, बल्कि पूरी तरह से सतर्क रहने की जरूरत है।

सवाल-जवाब

चंडीपुरा वायरस के मुख्य लक्षण क्या हैं?
इस वायरस के शुरुआती लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, दौरे पड़ना, उल्टी, दस्त होना और बेहोशी शामिल है, जो मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफलाइटिस) का संकेत है।
चंडीपुरा वायरस मुख्य रूप से कैसे फैलता है?
यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित सैंडफ्लाई (रेत मक्खी) के काटने से फैलता है, जो कच्चे मकानों और पशुशालाओं के आसपास पाई जाती है।
आंध्र प्रदेश में फिलहाल कोरोना के कितने मामले हैं?
आंध्र प्रदेश में कोविड-19 के कुल 26 सक्रिय मामले हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 8 मामले कडपा जिले से हैं।
क्या नए कोरोना मरीजों की स्थिति गंभीर है?
ज्यादातर मरीजों में ओमिक्रॉन लहर की तरह हल्के लक्षण (बुखार, खांसी, गले में खराश) हैं, लेकिन बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह गंभीर साबित हो सकता है।
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