स्मार्टफोन की बैटरी दो-तीन साल में ही जवाब देने लगे और बैकअप आधा रह जाए, तो ज़्यादातर लोग इसके लिए बैटरी की क्वालिटी को कोसते हैं। जबकि असल वजह अक्सर रोज़ाना की चार्जिंग आदत में छिपी होती है। ऐपल, सैमसंग और गूगल जैसी बड़ी कंपनियां अब खुलकर यह सलाह दे रही हैं कि फोन को हर बार 100 प्रतिशत तक चार्ज करने से बचना चाहिए। सवाल यह है कि यह सलाह आखिर क्यों दी जा रही है और इसे मानने से सच में कोई फायदा होता है या नहीं।
80 प्रतिशत पर चार्जिंग रोकने की सलाह क्यों
ऐपल, सैमसंग और गूगल जैसी कंपनियों का कहना है कि बैटरी को लगातार 80 प्रतिशत के आसपास रखना उसकी सेहत के लिए बेहतर रहता है। इसकी वजह यह है कि बैटरी को बार-बार पूरी क्षमता तक भरने से उस पर लगातार दबाव बनता है, जिसका असर लंबे समय में उसकी परफॉर्मेंस पर दिखने लगता है। यही कारण है कि सेटिंग्स में यह सुझाव अब सीधे यूजर्स को दिखाया जाने लगा है।
लिथियम-आयन बैटरी के अंदर क्या होता है
आजकल लगभग हर फोन में लिथियम-आयन बैटरी इस्तेमाल होती है। जब यह बैटरी पूरी तरह यानी 100 प्रतिशत तक चार्ज हो जाती है, तो उसके अंदर मौजूद केमिकल पर ज़्यादा जोर पड़ने लगता है। बार-बार इस स्थिति से गुजरने पर बैटरी की भीतरी संरचना धीरे-धीरे कमजोर पड़ती है और उसकी हेल्थ लगातार गिरती चली जाती है। यही वजह है कि पुराने फोन में एक जैसा इस्तेमाल करने के बावजूद बैकअप घटता चला जाता है।
रात भर चार्जिंग और गर्मी का खतरा
बैटरी को नुकसान पहुंचाने में गर्मी की भी बड़ी भूमिका होती है। रात भर फोन को चार्जर पर लगाकर छोड़ देने से फोन गर्म हो जाता है, और यह गर्मी बैटरी को अंदर से कमजोर बनाती है। यही वजह है कि कंपनियां बार-बार यह दोहराती हैं कि बैटरी को 20 से 80 प्रतिशत के बीच रखना सबसे सुरक्षित तरीका है।
कंपनियों के स्मार्ट फीचर क्या करते हैं
ऐपल के आईफोन में ऑप्टिमाइज़्ड बैटरी चार्जिंग नाम की एक सुविधा दी गई है, जो फोन को 80 प्रतिशत तक चार्ज करने के बाद रोक देती है और सुबह उठने के तय समय के आसपास बैटरी को पूरा भर देती है। सैमसंग और दूसरे एंड्रॉयड फोन में भी अडैप्टिव चार्जिंग या बैटरी प्रोटेक्शन मोड जैसे विकल्प मौजूद हैं। कई फोन में यूजर खुद सेटिंग्स में जाकर चार्जिंग की सीमा 80 या 85 प्रतिशत तक तय कर सकते हैं। गूगल के पिक्सल फोन में भी ऐसी ही सुविधा दी गई है, ताकि बैटरी लंबे समय तक बेहतर हालत में बनी रहे।
रोज़ फुल चार्जिंग बनाम 80 प्रतिशत की आदत
जो लोग रोज़ रात भर फोन चार्जिंग पर छोड़ देते हैं, उनकी बैटरी एक से दो साल के भीतर ही कमज़ोर बैकअप देना शुरू कर देती है। इसके उलट, जो लोग बैटरी को ज़्यादातर 80 प्रतिशत के आसपास रखते हैं, उनका फोन तीन से चार साल तक अच्छी हालत में चल सकता है। नतीजा यह होता है कि फोन की उम्र बढ़ जाती है और बार-बार बैटरी बदलवाने का खर्च भी बचता है।
क्या फुल चार्ज न करने से बैकअप कम मिलेगा
बहुत से लोगों को लगता है कि अगर फोन को पूरा चार्ज नहीं किया जाएगा, तो बैकअप कम मिलेगा। जबकि हकीकत में रोज़ाना थोड़ा-थोड़ा चार्ज करने से कोई नुकसान नहीं होता। आधुनिक बैटरियों में मेमोरी इफेक्ट जैसी दिक्कत नहीं होती, यानी आधा चार्ज करके फिर से चार्जिंग पर लगाने से बैटरी को कोई समस्या नहीं आती। हां, ज़रूरत पड़ने पर, जैसे किसी लंबी यात्रा से पहले, कभी-कभी फोन को 100 प्रतिशत तक चार्ज किया जा सकता है, लेकिन इसे रोज़ की आदत नहीं बनाना चाहिए।
बैटरी को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के तरीके
- सेटिंग्स में जाकर समय-समय पर बैटरी हेल्थ चेक करते रहें।
- अगर चार्जिंग के दौरान फोन बहुत ज़्यादा गर्म हो रहा हो, तो चार्जिंग तुरंत रोक दें।
- हमेशा ओरिजिनल चार्जर और केबल का ही इस्तेमाल करें, क्योंकि सस्ते और लोकल चार्जर से भी बैटरी को नुकसान पहुंचता है।
कुल मिलाकर कंपनियों की यह सलाह पूरी तरह सही बैठती है। चार्जिंग की सिर्फ एक आदत बदलकर फोन की बैटरी को लंबे समय तक मजबूत रखा जा सकता है। 100 प्रतिशत चार्ज करने का लालच छोड़कर अगर 80 प्रतिशत पर रोकने की आदत डाल ली जाए, तो फोन सालों तक बेहतर परफॉर्मेंस देता रहेगा। एक छोटी सी सावधानी आगे चलकर बड़ी बचत करा सकती है।


















