खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गुजरात प्रशासन ने राज्य में एनालॉग पनीर के उत्पादन और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी है। गांधीनगर से जारी आदेशों के अनुसार, बाजार में नकली और सिंथेटिक डेयरी उत्पादों की बढ़ती खपत को रोकने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है। यह प्रतिबंध राज्य भर में निर्माण इकाइयों और विक्रेताओं पर तुरंत लागू हो गया है।
एनालॉग पनीर और असली पनीर में क्या है अंतर?
दिखने, स्वाद और बनावट में एनालॉग पनीर बिल्कुल पारंपरिक असली पनीर जैसा लगता है, लेकिन इसकी सामग्री पूरी तरह अलग होती है। पारंपरिक असली पनीर तैयार करने के लिए शुद्ध दूध को नीबू, सिरका या दही की मदद से फाड़ा जाता है। इसके विपरीत, एनालॉग पनीर में दूध के प्राकृतिक फैट और प्रोटीन को हटाकर सस्ते विकल्पों को मिलाया जाता है।
किन चीजों से तैयार होता है यह नकली पनीर?
एनालॉग पनीर के निर्माण में प्राकृतिक दूध के फैट या प्रोटीन की जगह वनस्पति तेल जैसे पाम ऑयल या नारियल तेल का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, मिश्रण को पनीर जैसी रंगत और शेप देने के लिए टैपिओका या अन्य स्टार्च, आंशिक रूप से मिल्क पाउडर या मिल्क सॉलिड्स, सोया प्रोटीन, इमल्सीफायर, स्टेबलाइजर, फ्लेवरिंग एजेंट और विभिन्न केमिकल एडिटिव्स को प्रोसेस किया जाता है।
अन्य राज्यों में भी कस रहा है शिकंजा
डेयरी उत्पादों में मिलावट के खिलाफ देश भर में सख्ती बढ़ रही है। इससे पहले महाराष्ट्र में होटल और रेस्तरां समेत एनालॉग पनीर की बिक्री पर एक साल का पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था, जहां उल्लंघन पर जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। वहीं छत्तीसगढ़ में भी पाम ऑयल और मिल्क पाउडर से तैयार होने वाले एनालॉग पनीर पर रोक लगाई गई है। सूरत में पाम ऑयल और केमिकल से नकली पनीर बनाने वाली फैक्ट्री पर पुलिस केस भी दर्ज किया गया था। गुजरात सरकार का यह ताजा फैसला उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम कदम है।



















