माहवारी शुरू होने से कुछ दिन पहले महिलाओं के शरीर में कई तरह के शारीरिक और भावनात्मक बदलाव दिखाई देने लगते हैं। आयुर्वेदिक फिजिशियन डॉ. पूजा के अनुसार, इन दिनों कुछ महिलाओं को मूड स्विंग्स या मिजाज में अचानक बदलाव का सामना करना पड़ता है, जबकि कई महिलाओं में पेट फूलने अथवा ब्लोटिंग की समस्या देखी जाती है। इसके अलावा कुछ महिलाओं को बार-बार कुछ न कुछ खाने की तीव्र इच्छा होती है, जिसे फूड क्रेविंग्स कहा जाता है। कई मामलों में सिरदर्द, तेज माइग्रेन या गर्दन के पिछले हिस्से यानी सर्वाइकल एरिया में दर्द की शिकायत भी सामने आती है। हालांकि ये शारीरिक संकेत सामान्य स्थिति का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन जब ये हर महीने गंभीर रूप लेने लगें तो सतर्क होना जरूरी हो जाता है।
लगातार बढ़ती तकलीफों को सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें
डॉ. पूजा स्पष्ट करती हैं कि यद्यपि कई बार ये लक्षण प्राकृतिक बदलावों के तहत महसूस होते हैं, लेकिन यदि हर महीने इनकी तीव्रता बढ़ती जा रही हो और इनका सीधा असर आपकी रोजमर्रा की दिनचर्या पर पड़ने लगे, तो इन्हें केवल माहवारी से पहले का साधारण बदलाव समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। जब भी किसी महिला को लगे कि हर नए मासिक चक्र में दर्द, सिरदर्द या अन्य परेशानियां पहले की तुलना में अधिक कष्टदायी हो रही हैं और सामान्य कामकाज प्रभावित हो रहा है, तो समय रहते योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना बेहद आवश्यक हो जाता है।
मासिक चक्र के पैटर्न में बदलाव की अनदेखी पड़ सकती है भारी
सिर्फ माहवारी से पूर्व दिखने वाले लक्षणों पर ही नहीं, बल्कि पूरे चक्र के समय और पैटर्न में आने वाले उतार-चढ़ाव पर भी करीबी नजर रखना जरूरी है। डॉ. पूजा के अनुसार, यदि किसी महिला की माहवारी पहले एक निश्चित समयावधि पर आती थी, परंतु अब उसमें बार-बार असामान्य देरी हो रही है या फिर चक्र बहुत जल्दी-जल्दी आने लगा है, तो इस बदलाव के मूल कारण को समझना बेहद जरूरी है। इसी प्रकार यदि दो नियमित मासिक धर्मों के बीच में अचानक रक्तस्राव यानी ब्लीडिंग की स्थिति बन जाए, तो इसे किसी भी सूरत में साधारण समझकर टालना नहीं चाहिए। इस तरह के अनियमित बदलावों के पीछे विभिन्न शारीरिक या स्वास्थ्य संबंधी कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जिनकी सटीक पहचान के लिए डॉक्टरी जांच और सही परामर्श ही एकमात्र उचित मार्ग है।
अपने शरीर के संकेतों को पहचानना और समय पर सलाह लेना
प्रत्येक महिला की शारीरिक संरचना और आंतरिक प्रकृति एक-दूसरे से भिन्न होती है, जिस वजह से माहवारी से पहले महसूस होने वाले लक्षणों का स्वरूप और गंभीरता भी हर किसी में अलग दिखाई दे सकती है। महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों को गहराई से समझना चाहिए और इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि कौन सा लक्षण किस समय और कितनी बार प्रकट हो रहा है। यद्यपि हर उभरता लक्षण किसी गंभीर बीमारी की ओर संकेत नहीं करता, फिर भी जब कोई तकलीफ लगातार बनी रहे, उसकी तीव्रता हर चक्र के साथ बढ़े या वह सामान्य जीवनशैली में बाधा डालने लगे, तो लापरवाही बरतने से बचना चाहिए और विशेषज्ञ डॉक्टर से उचित जांच करवाकर समाधान खोजना चाहिए।



















