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मोबाइल फोन और वाई-फाई से ब्रेन ट्यूमर: क्या है वैज्ञानिक सच्चाई? जानें न्यूरोलॉजिस्ट की रायस्वास्थ्य
19 जून 2026, 3:57 pm (39 दिन पहले)· 4

मोबाइल फोन और वाई-फाई से ब्रेन ट्यूमर: क्या है वैज्ञानिक सच्चाई? जानें न्यूरोलॉजिस्ट की राय

कई लोगों को यह डर सताता है कि मोबाइल फोन और वाई-फाई का अधिक इस्तेमाल ब्रेन ट्यूमर का कारण बन सकता है। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मधुकर भारद्वाज के अनुसार, वर्तमान में ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो इस आशंका की पुष्टि करता हो।

आजकल मोबाइल फोन हमारी रोजमर्रा की ज़िंदगी का एक अनिवार्य हिस्सा बन गए हैं। वे लगभग हर समय हमारे साथ रहते हैं। इसी बीच, सोशल मीडिया पर एक सवाल तेजी से फैल रहा है, जिसने कई लोगों में चिंता पैदा कर दी है: क्या मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल से ब्रेन ट्यूमर हो सकता है? इस महत्वपूर्ण सवाल पर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मधुकर भारद्वाज ने अपनी स्पष्ट राय साझा की है।

डॉ. मधुकर भारद्वाज का कहना है कि दुनिया भर में अब तक कोई भी ऐसी निश्चित रिसर्च सामने नहीं आई है, जो यह पुख्ता तौर पर साबित कर सके कि मोबाइल फोन, अधिक स्क्रीन टाइम, वाई-फाई का उपयोग या तनाव ब्रेन ट्यूमर का कारण बनता है। वे बताते हैं कि इस विषय पर लंबे समय से बहस चल रही है, लेकिन मेडिकल साइंस के पास ऐसा कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है जो मोबाइल फोन को ब्रेन ट्यूमर से सीधे तौर पर जोड़ता हो। इसलिए, मौजूदा स्थिति में इसे केवल एक मिथक ही माना जा सकता है।

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रेडिएशन और ट्यूमर का संबंध

मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडिएशन को लेकर चिंताएँ लंबे समय से व्यक्त की जाती रही हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि कुछ प्रकार की रेडिएशन कोशिकाओं के DNA में परिवर्तन ला सकती है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडिएशन और ब्रेन ट्यूमर के बीच सीधे संबंध को अभी तक सिद्ध नहीं किया जा सका है। जिन शुरुआती अध्ययनों में ऐसी आशंकाएँ जताई गई थीं, वे बहुत छोटे स्तर पर किए गए थे और उनका सैंपल साइज़ भी सीमित था।

डॉ. मधुकर भारद्वाज ने यह भी बताया कि कुछ अध्ययनों में यह पाया गया कि जिन लोगों ने लंबे समय तक मोबाइल का इस्तेमाल किया, उनमें कैंसर या ब्रेन ट्यूमर के कोई विशेष लक्षण नहीं दिखे। यही वजह है कि रिसर्चर अभी भी मोबाइल फोन को ब्रेन ट्यूमर का सीधा कारण नहीं मानते। इस संबंध में अनुसंधान अभी भी जारी है, लेकिन वर्षों से दुनिया भर में मोबाइल के व्यापक उपयोग के बावजूद कोई स्पष्ट खतरा सामने नहीं आया है।

ब्रेन ट्यूमर क्या है?

ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क के अंदर असामान्य कोशिकाओं का एक समूह या गांठ होता है। यह तब बनता है जब मस्तिष्क की कुछ कोशिकाएँ अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। यह मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों में विकसित हो सकता है, और इसके आकार तथा स्थान के आधार पर अलग-अलग समस्याएँ पैदा कर सकता है। कई बार शुरुआती चरणों में इसके लक्षण बहुत कम या न के बराबर दिखाई देते हैं, लेकिन ट्यूमर के बढ़ने के साथ-साथ समस्याएँ बढ़ सकती हैं।

ब्रेन ट्यूमर के प्रकार

मुख्य रूप से ब्रेन ट्यूमर दो प्रकार के होते हैं: बिनाइन (benign) और मेलिगनेंट (malignant)।

  • बिनाइन ट्यूमर: यह ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ता है और आमतौर पर शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैलता। हालाँकि, यदि इसका आकार बड़ा हो जाए तो यह मस्तिष्क के महत्वपूर्ण हिस्सों पर दबाव डाल सकता है, जिससे समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
  • मेलिगनेंट ट्यूमर: यह कैंसरस होता है और तेजी से बढ़ सकता है, जिससे आसपास के ऊतकों को नुकसान पहुँच सकता है। इसे अधिक खतरनाक माना जाता है और कई बार सफल इलाज के बाद भी यह दोबारा लौट सकता है।

कई लोग सोचते हैं कि बिनाइन ट्यूमर खतरनाक नहीं होता, लेकिन यह धारणा हमेशा सही नहीं है। अगर यह ट्यूमर मस्तिष्क के किसी बहुत महत्वपूर्ण हिस्से के पास विकसित हो जाए और आकार में काफी बड़ा हो जाए, तो यह नसों पर गंभीर दबाव डाल सकता है। उदाहरण के लिए, यदि यह हाथ-पैर को नियंत्रित करने वाली नसों पर दबाव डालता है, तो व्यक्ति के हाथ-पैर कमजोर हो सकते हैं, सुन्न पड़ सकते हैं, या झुनझुनी महसूस हो सकती है। कुछ गंभीर मामलों में दौरे भी पड़ सकते हैं।

ब्रेन ट्यूमर के संभावित कारण

ब्रेन ट्यूमर का सटीक कारण अभी तक पूरी तरह से ज्ञात नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, यह कोशिकाओं में होने वाले आनुवंशिक बदलावों के कारण विकसित हो सकता है। कुछ मामलों में, अधिक मात्रा में रेडिएशन के संपर्क को भी जोखिम कारक माना जाता है, लेकिन इसके प्रमाण भी सीमित हैं। जैसा कि डॉ. मधुकर भारद्वाज ने बताया है, मोबाइल फोन, वाई-फाई या सामान्य स्क्रीन टाइम को लेकर अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो इन्हें ब्रेन ट्यूमर का कारण साबित करे।

प्रमुख लक्षण और उपचार

ब्रेन ट्यूमर का सबसे आम और प्रमुख लक्षण लगातार रहने वाला सिर दर्द है। जब ट्यूमर बढ़कर आसपास की स्वस्थ कोशिकाओं और ऊतकों पर दबाव डालता है, तो सिर में दर्द और सूजन जैसी समस्या हो सकती है। कई मरीजों में यह दर्द धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। हालाँकि, केवल सिर दर्द होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को ब्रेन ट्यूमर ही है, लेकिन लंबे समय तक बने रहने पर डॉक्टर से जाँच कराना आवश्यक होता है।

सिर दर्द के अलावा, ब्रेन ट्यूमर के कई अन्य लक्षण भी हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • बार-बार जी मिचलाना और उल्टी होना
  • आँखों से धुँधला दिखना या एक चीज़ दो दिखाई देना
  • हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन
  • बोलने में परेशानी
  • चलने-फिरने में दिक्कत
  • बहुत ज्यादा थकान और चक्कर आना
  • याददाश्त कमजोर होना
  • दौरे पड़ना
  • कुछ मामलों में सुनने में भी दिक्कत हो सकती है

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सभी लक्षण एक साथ दिखना ज़रूरी नहीं है।

ब्रेन ट्यूमर का इलाज कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे ट्यूमर का प्रकार, उसका आकार और मस्तिष्क में उसकी सटीक स्थिति। यदि ट्यूमर बिनाइन है और सुरक्षित तरीके से निकाला जा सकता है, तो सर्जरी को सबसे प्रभावी उपचार माना जाता है। वहीं, कई मामलों में रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी का भी उपयोग किया जाता है। कुछ मरीजों को बेहतर परिणामों के लिए सर्जरी के साथ-साथ रेडिएशन या कीमोथेरेपी दोनों की आवश्यकता पड़ सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, मोबाइल फोन और ब्रेन ट्यूमर के बीच अब तक कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है। हालाँकि, ब्रेन ट्यूमर एक गंभीर बीमारी है, और इसके लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। लगातार सिर दर्द, चक्कर आना, धुँधला दिखना या दौरे पड़ने जैसी कोई भी समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना बेहद ज़रूरी है।

सवाल-जवाब

क्या मोबाइल फोन के इस्तेमाल से सच में ब्रेन ट्यूमर होता है?
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मधुकर भारद्वाज के अनुसार, दुनिया में अब तक ऐसी कोई ठोस वैज्ञानिक रिसर्च नहीं है जो यह साबित कर सके कि मोबाइल फोन, अधिक स्क्रीन टाइम या वाई-फाई के कारण ब्रेन ट्यूमर होता है। इसे फिलहाल एक मिथक माना जा सकता है।
मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडिएशन का क्या प्रभाव होता है?
वैज्ञानिक मानते हैं कि कुछ प्रकार की रेडिएशन कोशिकाओं के DNA में बदलाव ला सकती है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडिएशन और ब्रेन ट्यूमर के बीच सीधा संबंध अभी तक साबित नहीं हुआ है।
ब्रेन ट्यूमर कितने प्रकार के होते हैं?
ब्रेन ट्यूमर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: बिनाइन (benign), जो धीरे-धीरे बढ़ता है और फैलता नहीं है; और मेलिगनेंट (malignant), जो कैंसरस होता है, तेजी से बढ़ता है और आसपास के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है।
ब्रेन ट्यूमर के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
ब्रेन ट्यूमर का सबसे सामान्य लक्षण लगातार रहने वाला सिर दर्द है। अन्य लक्षणों में जी मिचलाना, उल्टी, धुंधला दिखना, हाथ-पैर में कमजोरी, बोलने में परेशानी, चक्कर आना और दौरे पड़ना शामिल हो सकते हैं।
क्या बिनाइन ट्यूमर हमेशा हानिरहित होता है?
नहीं, हमेशा नहीं। यदि बिनाइन ट्यूमर मस्तिष्क के किसी महत्वपूर्ण हिस्से के पास विकसित हो जाए और बड़ा हो जाए, तो यह नसों पर दबाव डाल सकता है, जिससे हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन जैसी गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं।
ब्रेन ट्यूमर का इलाज कैसे किया जाता है?
ब्रेन ट्यूमर का इलाज उसके प्रकार, आकार और स्थान पर निर्भर करता है। प्रभावी उपचार विकल्पों में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी शामिल हैं। कई बार बेहतर परिणामों के लिए इन उपचारों का संयोजन भी आवश्यक हो सकता है।
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