सूर्य की रोशनी मानव शरीर में विटामिन D के निर्माण का प्राकृतिक जरिया है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय आबादी में विटामिन D की कमी एक बेहद आम समस्या बन चुकी है। जब शरीर में इस आवश्यक पोषक तत्व का स्तर गिरता है, तो हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और उनके टूटने या दर्द की आशंका बढ़ जाती है। इस कमी को दूर करने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञ अक्सर सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं। हालांकि, सप्लीमेंट शुरू करने के बाद भी कई लोगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता, क्योंकि इसके सेवन का समय और तरीका सही नहीं होता। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका सहरावत ने बताया है कि सप्लीमेंट को शरीर में पूरी तरह अवशोषित करने के लिए किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
विटामिन D सप्लीमेंट के प्रकार और शरीर में अवशोषण की प्रक्रिया
चिकित्सा क्षेत्र में विटामिन D सप्लीमेंट मुख्य रूप से कैप्सूल, लिक्विड शीशी, सिरप और पाउडर वाले सैशे के रूप में उपलब्ध होते हैं। सिरप या कैप्सूल का सेवन आसानी से किया जा सकता है, जबकि सैशे वाले पाउडर को किसी लिक्विड में घोलकर लेना पड़ता है। जैविक रूप से विटामिन D एक फैट-सॉल्यूबल यानी वसा में घुलनशील विटामिन की श्रेणी में आता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि शरीर इस विटामिन को तभी प्रभावी ढंग से सोख पाता है जब हमारे पाचन तंत्र और आंतों में वसा की मौजूदगी हो। बिना वसा के लिया गया सप्लीमेंट शरीर में पूरी तरह अवशोषित नहीं हो पाता।
सप्लीमेंट लेने का सबसे उपयुक्त समय और आहार की भूमिका
न्यूरोलॉजिस्ट के मुताबिक, विटामिन D सप्लीमेंट लेने का सबसे अच्छा समय वह होता है जब व्यक्ति अपने दिन का सबसे बड़ा या भारी खाना खा रहा हो। जब भोजन में हेल्दी फैट शामिल होता है, तो यह वसा में घुलनशील इस विटामिन को आंतों द्वारा सोखे जाने की दर को काफी बढ़ा देता है। यदि आपके सुबह के नाश्ते या दोपहर के भोजन में सही मात्रा में वसा मौजूद है, तो वह समय सप्लीमेंट के लिए आदर्श हो सकता है। डॉ. सहरावत स्पष्ट करती हैं कि वह अपने मरीजों को हमेशा इसे दिन के मुख्य भोजन यानी मेन मील के साथ लेने का सुझाव देती हैं, जिसमें कार्बोहाइड्रेट, फैट और प्रोटीन अच्छी मात्रा में शामिल हों।
सैशे पाउडर को पानी के बजाय दूध में मिलाने का वैज्ञानिक कारण
जहाँ कैप्सूल या सिरप को खाने के साथ सीधे लिया जा सकता है, वहीं पाउडर सप्लीमेंट का उपयोग करते समय लोग अक्सर गलती कर बैठते हैं। आमतौर पर लोग सैशे के पाउडर को पानी में मिलाकर पी लेते हैं क्योंकि यह सबसे आसान तरीका लगता है। हालांकि, डॉ. सहरावत पानी के साथ इसका सेवन न करने की सलाह देती हैं। पानी में वसा का कोई अंश नहीं होता, जिससे सप्लीमेंट का अवशोषण बेहतर तरीके से नहीं हो पाता।
इसके स्थान पर, वह पाउडर वाले सप्लीमेंट को एक गिलास दूध में घोलकर पीने की सिफारिश करती हैं। दूध प्राकृतिक रूप से हेल्दी फैट का एक बेहतरीन जरिया है, जो विटामिन के घुलने और अवशोषित होने में मदद करता है। इसके अलावा दूध कैल्शियम का भी समृद्ध स्रोत है। जब शरीर में पर्याप्त विटामिन D मौजूद होता है, तो यह हड्डियों को भोजन या दूध से मिलने वाले कैल्शियम को तेजी से अवशोषित करने में सहायता करता है। इसलिए दूध के साथ सैशे लेने से विटामिन D का अवशोषण भी अधिकतम होता है और हड्डियों को कैल्शियम का पूरा पोषण भी मिलता है।



















