इंसानी जिस्म किसी भी अंदरूनी गड़बड़ी की स्थिति में शुरुआती दौर में ही बारीक चेतावनियां देने लगता है। अक्सर लोग बेवजह महसूस होने वाली भीषण थकान, भूख में गिरावट या पाचन तंत्र की खराबी को सामान्य मानकर टाल देते हैं, जबकि यह किसी छिपे हुए रोग की शुरुआत हो सकती है। ठीक इसी प्रकार मूत्र विसर्जन की सामान्य दिनचर्या में आने वाला अचानक बदलाव भी स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा पैगाम होता है। यदि मूत्र त्यागते वक्त तीखा दर्द महसूस हो रहा हो, बार-बार शौचालय जाने की हाजत बन रही हो अथवा निवृत्त होने के तुरंत बाद भी अधूरापन लगता रहे, तो इसे नजरअंदाज करना सेहत पर भारी पड़ सकता है। यद्यपि कई बार यह समस्या केवल पानी का सेवन कम करने से भी उभरती है, लेकिन अधिकांश मामलों में यह यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी यूटीआई का स्पष्ट संकेत सिद्ध होती है।
संक्रमण की आंतरिक कार्यप्रणाली और उसका विस्तार
यूरिनरी ट्रैक्ट का यह विकार मूल रूप से पेशाब की नली तथा उससे सीधे जुड़े अंदरूनी अंगों में पनपने वाली समस्या है। जब बाहरी हानिकारक जीवाणु मूत्र नली के संकरे रास्ते से शरीर के भीतरी तंत्र में प्रवेश पा जाते हैं और वहां तेजी से अपनी संख्या बढ़ाने लगते हैं, तब यह विकराल संक्रमण जन्म लेता है। यह जीवाणुजनित समस्या मुख्य रूप से मूत्र मार्ग, मूत्र की थैली जिसे ब्लैडर कहा जाता है, तथा आगे बढ़कर गुर्दों यानी किडनी तक को अपनी चपेट में ले सकती है। यदि प्रारंभिक अवस्था में ही इसकी पहचान कर ली जाए तो सामान्य चिकित्सीय परामर्श और दवाओं से इसका उपचार अत्यंत सहजता से संभव है। इसके विपरीत, यदि इस परेशानी की उपेक्षा की जाए और रोगजनक जीवाणु ऊपर चढ़ते हुए किडनी तक घर कर जाएं, तो यह स्थिति जीवन के लिए गंभीर संकट बन सकती है।
शुरुआती लक्षणों की पहचान और शरीर के अलार्म
इस संक्रमण का सबसे प्रमुख और आम लक्षण मूत्र त्याग के दौरान तीखी जलन या चुभन का अहसास होना माना जाता है। इस परेशानी से घिरे इंसान को लगातार कुछ-कुछ मिनटों के अंतराल पर पेशाब लगने की अनुभूति होती रहती है। इसके अलावा पेड़ू यानी पेट के एकदम निचले भाग में लगातार भारीपन, मरोड़ या हल्का दर्द बना रहता है। कई मरीजों में यह भी देखा गया है कि उनके यूरिन से सामान्य दिनों की तुलना में असामान्य रूप से बेहद तीखी और असहज गंध आने लगती है, साथ ही पेशाब का रंग साफ या पारदर्शी रहने के बजाय मटमैला व धुंधला दिखाई पड़ता है। यदि स्थिति बिगड़ जाए और पेशाब के साथ रक्त के अंश नजर आने लगें, तो इसे एक आपात संकेत समझना चाहिए और बिना एक पल गंवाए योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
जब संक्रमण किडनी की ओर बढ़ने लगे
मूत्र विसर्जन में दर्द और लगातार हाजत होने के साथ यदि मरीज को तेज बुखार चढ़ने लगे, कंपकंपी के साथ ठंड छूटे, कमर या पीठ के पिछले हिस्से में गहरा दर्द रहने लगे, अथवा उल्टी और जी मिचलाने की शिकायत जुड़ जाए, तो तुरंत अस्पताल की ओर रुख करना आवश्यक हो जाता है। ये तमाम गंभीर लक्षण इस बात की साफ गवाही देते हैं कि रोगजनक बैक्टीरिया ब्लैडर की परिधि को पार कर दोनों गुर्दों पर हमला बोल चुके हैं। किडनी का संक्रमण मानव शरीर के संपूर्ण फिल्टर तंत्र को पंगु बना सकता है, इसलिए इसे बेहद नाजुक और आपातकालीन स्वास्थ्य परिस्थिति की श्रेणी में रखा जाता है।
महिलाओं में खतरे की अधिकता और अन्य संवेदनशील वर्ग
पुरुषों की तुलना में महिलाओं को इस तरह के यूरिनरी संक्रमण का सामना कहीं अधिक करना पड़ता है। इसका मुख्य आधार दोनों वर्गों की शारीरिक संरचना का अंतर है। महिलाओं में मूत्र बाहर निकालने वाली नलिका आकार में पुरुषों की तुलना में काफी छोटी होती है, जिसके कारण बाहरी जीवाणुओं को तेजी से अंदर दाखिल होकर ब्लैडर तक अपनी पहुंच बनाने में अधिक समय नहीं लगता। इसके अतिरिक्त, शारीरिक संबंध बनाने के बाद भी महिलाओं में इस रोग का जोखिम कई गुना बढ़ सकता है। जीवन के उस पड़ाव पर जब मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति होती है, तब स्त्री के शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव भी इस जीवाणु संक्रमण के अनुकूल माहौल तैयार कर देते हैं।
महिलाओं के अलावा मधुमेह यानी डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों और ऐसे तमाम लोगों में भी यह परेशानी ज्यादा देखी जाती है, जिनकी स्वाभाविक रोग प्रतिरोधक क्षमता क्षीण पड़ चुकी होती है। इसके साथ ही, जो लोग काम के दबाव या यात्रा के दौरान घंटों तक पेशाब को जबरन रोके रखने की आदत पाले रहते हैं, अथवा जिनका ब्लैडर किसी अंदरूनी रुकावट के चलते पूरी तरह खाली नहीं हो पाता, उनके मूत्राशय में ठहरे हुए द्रव में बैक्टीरिया को फलने-फूलने का मुफीद अवसर मिल जाता है।
दैनिक जीवनशैली में बचाव के बुनियादी उपाय
इस तकलीफदेह संक्रमण से अपने शरीर की रक्षा करने का सबसे प्राथमिक और कारगर नियम यह है कि दिनभर में भरपूर मात्रा में शुद्ध जल पिया जाए। प्रचुर जलपान से शरीर में निर्जलीकरण की नौबत नहीं आती और पर्याप्त मात्रा में पेशाब बनने के कारण मूत्र मार्ग में चिपके बैक्टीरिया प्राकृतिक बहाव के साथ बाहर धुल जाते हैं। इसके साथ ही, जब भी शरीर से मूत्र विसर्जन का संकेत मिले, उसे बेवजह लंबे समय तक रोककर रखने की भूल कदापि न करें। व्यक्तिगत अंगों की दैनिक स्वच्छता और साफ-सफाई के प्रति बरती गई छोटी सी सतर्कता भी इस संक्रमण को दूर रखने में अचूक ढाल साबित होती है।

















