शरीर में हीमोग्लोबिन और आवश्यक पोषक तत्वों का स्तर बनाए रखने के लिए केवल पौष्टिक और संतुलित आहार लेना ही पर्याप्त नहीं होता है। जब प्रणाली में इस महत्वपूर्ण खनिज की कमी दर्ज की जाती है, तो भोजन के चयन के साथ-साथ यह भी देखना जरूरी हो जाता है कि उस मुख्य थाली के साथ कौन से अन्य खाद्य पदार्थ परोसे जा रहे हैं। कुछ सामान्य खाद्य उत्पाद और दवाएं पाचन तंत्र में इस पोषक तत्व के अवशोषण की स्वाभाविक प्रक्रिया को धीमा कर देती हैं। नतीजतन, पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करने के बाद भी शरीर को उसका संपूर्ण पोषण लाभ नहीं मिल पाता है। इसी वजह से स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा मुख्य पोषण वाले भोजन के साथ कुछ विशिष्ट चीजों के सेवन में सावधानी बरतने के सुझाव दिए जाते हैं।
डेयरी उत्पाद और कैल्शियम का परस्पर प्रभाव
दूध, दही, पनीर और छाछ जैसे तमाम डेयरी उत्पाद सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं, लेकिन इनके सेवन का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। इन सभी डेयरी पदार्थों में कैल्शियम की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। जब कैल्शियम और यह महत्वपूर्ण खनिज एक ही समय पर पाचन तंत्र में पहुंचते हैं, तो कैल्शियम इसके अवशोषण में सीधा हस्तक्षेप करता है। दोनों पोषक तत्व शरीर में सोखे जाने के लिए एक जैसी प्रक्रियाओं पर निर्भर करते हैं, जिससे मुख्य खनिज का अवशोषण घट जाता है। इसलिए किसी भी प्रमुख पोषण वाली थाली या सप्लीमेंट लेने के तुरंत पहले या बाद में डेयरी उत्पादों का सेवन करने से दूरी बनाना अधिक लाभकारी माना जाता है।
अंडे में पाए जाने वाले घटक और पाचन
अंडे को प्रोटीन और अन्य जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों का बेहतरीन स्रोत माना जाता है, पर भोजन में इसके संयोजन पर ध्यान देना आवश्यक है। अंडे के भीतर कुछ ऐसे स्वाभाविक घटक मौजूद होते हैं जो अन्य खाद्य पदार्थों से मिलने वाले आवश्यक खनिज के अवशोषण की दर को प्रभावित कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति विशेष रूप से अपनी पोषण संबंधी कमी को दूर करने के उद्देश्य से मुख्य भोजन कर रहा है, तो उस समय थाली में अंडा शामिल करने के बजाय उसे दिन के किसी अन्य पहर में खाना अधिक उपयुक्त निर्णय साबित होता है। इस तरह दोनों खाद्य पदार्थों का स्वतंत्र पोषण बिना किसी रुकावट के शरीर को प्राप्त हो सकता है।
सीने में जलन की दवाएं और पेट का एसिड
एसिडिटी, अपच अथवा सीने में जलन से राहत पाने के लिए कई लोग नियमित रूप से एंटासिड दवाओं का सेवन करते हैं। ये दवाएं पेट के भीतर बनने वाले स्वाभाविक एसिड के स्तर को काफी कम कर देती हैं। हालांकि, पाचन प्रक्रिया के दौरान इस विशेष पोषक तत्व को शरीर में पूरी तरह घुलनशील और अवशोषित करने योग्य बनाने के लिए पेट के एसिड की एक तय मात्रा अत्यंत अनिवार्य होती है। जब एसिड कम हो जाता है, तो खनिज का उचित अवशोषण भी बाधित होने लगता है। ऐसे में जो लोग नियमित एंटासिड का इस्तेमाल करते हैं और साथ ही शरीर में पोषण की कमी से जूझ रहे हैं, उन्हें अपने चिकित्सक से मिलकर दवा और भोजन के सही समय का तालमेल तय करना चाहिए।
बैंगन के सेवन को लेकर बरती जाने वाली सावधानी
सब्जियों में बैंगन को लेकर भी कुछ विशेषज्ञ मुख्य पोषण वाले भोजन के साथ सतर्कता रखने की सलाह देते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक अध्ययनों में अभी तक ऐसे बहुत ठोस या पुख्ता प्रमाण सीमित हैं जो बैंगन को सीधे तौर पर अवशोषण को पूरी तरह रोकने वाला कारक साबित करते हों। इसके बावजूद एहतियात के तौर पर इसे पूरी तरह अपनी दैनिक डाइट से बाहर निकालने की आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय सबसे बेहतर और व्यावहारिक तरीका यह है कि बैंगन को मुख्य पोषक भोजन से अलग समय पर खाया जाए, जिससे पोषण की प्राप्ति पर किसी भी तरह का संशय न रहे।


















