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गंभीर बीमारी से बचाव के लिए ऑन्कोलॉजिस्ट की बताई छह अहम आदतेंस्वास्थ्य
24 सित॰ 2026, 2:26 am (11 मिनट पहले)· 0

गंभीर बीमारी से बचाव के लिए ऑन्कोलॉजिस्ट की बताई छह अहम आदतें

भारत में साल 2024 के दौरान कैंसर के 15.6 लाख नए मामले सामने आए और 9 लाख लोगों की मौत हुई। विशेषज्ञों ने इस बीमारी के जोखिम को कम करने के लिए रोजमर्रा की जिंदगी में छह बुनियादी बदलाव अपनाने की सलाह दी है।

भारत में कैंसर के बढ़ते मामले एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनकर उभर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार साल 2024 में देश के भीतर इस बीमारी के 15.6 लाख नए मरीज दर्ज किए गए, जबकि इसी एक साल के दौरान 9 लाख लोगों ने अपनी जान गंवा दी। यह रोग किसी भी उम्र, वर्ग या आर्थिक स्थिति के व्यक्ति को अपना शिकार बना सकता है। मौजूदा समय में जिस तेजी से इसके मरीज बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए सुरक्षात्मक कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है। हालांकि यह सटीक रूप से तय नहीं किया जा सकता कि यह बीमारी कब किसे प्रभावित करेगी, लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि जीवनशैली से जुड़ी सही दिनचर्या अपनाकर इसके खतरे को काफी हद तक घटाया जा सकता है। ऑन्कोलॉजिस्ट ने इस जोखिम से खुद को सुरक्षित रखने के लिए छह बुनियादी आदतों पर अमल करने का सुझाव दिया है।

गहरी और सुकून भरी नींद से डीएनए मरम्मत

शरीर को स्वस्थ बनाए रखने और गंभीर रोगों से दूरी के लिए पर्याप्त नींद सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। वैज्ञानिक अध्ययनों से यह बात साबित हो चुकी है कि जब इंसान सोता है, तब उसका शरीर आंतरिक टूट-फूट की मरम्मत करता है। कैंसर की शुरुआत का एक प्रमुख कारण कोशिकाओं के डीएनए में आने वाली खराबी है। जब शरीर पूरी तरह विश्राम में होता है, तब डीएनए रिपेयर की प्रक्रिया सक्रिय रूप से काम करती है। इसके अलावा एक तय समय पर सोने से हार्मोन का संतुलन ठीक रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। हालांकि सिर्फ अच्छी नींद किसी बीमारी से बचने की पूर्ण गारंटी नहीं देती, मगर यह अनियंत्रित कोशिका वृद्धि के खतरे को काफी नीचे ले आती है।

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पारंपरिक खानपान और संतुलित पोषण

मौजूदा दौर में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, जंक फूड, फास्ट फूड, अत्यधिक वसा वाले उत्पाद, चीज, मक्खन, बहुत अधिक नमक और चीनी का सेवन लगातार बढ़ रहा है। इस तरह का खानपान शरीर के भीतर सूजन और कैंसर के खतरे को तेजी से बढ़ाता है। ऑन्कोलॉजिस्ट इन अस्वास्थ्यकर चीजों से पूरी तरह बचने की सलाह देते हैं। इसके विपरीत पारंपरिक तरीके से पकाए गए साबुत अनाज को आहार में प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जैसा पिछली पीढ़ियों में खाया जाता था। जरूरत से ज्यादा खाने के बजाय संतुलित आहार लें, जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा का सही अनुपात हो। भोजन करते समय आपकी आधी थाली विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियों से भरी होनी चाहिए। इसके साथ ही हर दिन ताजे फल, बीज और सूखे मेवों को अपने आहार का हिस्सा बनाएं।

शारीरिक सक्रियता और दैनिक कसरत

रोजाना व्यायाम को अपनी दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है। हर व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा कसरत के लिए जरूर निकालना चाहिए। यदि भारी व्यायाम करना संभव न हो, तो रोजाना न्यूनतम 10 हजार कदम पैदल चलने का लक्ष्य रखें। जो लोग शारीरिक रूप से समर्थ हैं, वे दौड़ने का विकल्प चुन सकते हैं। उद्देश्य शरीर को सक्रिय रखना और पसीना बहाना है, जिससे मांसपेशियां थकें और शरीर प्राकृतिक रूप से ऊर्जावान महसूस करे। नियमित वर्कआउट न सिर्फ कैंसर के खतरे को कम करता है, बल्कि शरीर को कई अन्य गंभीर बीमारियों से भी सुरक्षित रखता है।

पाचन तंत्र की मजबूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता

आजकल अधिकांश लोग पेट और पाचन से जुड़ी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए हमेशा समय पर भोजन करना चाहिए और ऐसा खाना चुनना चाहिए जो पचने में आसान हो। हमारे पाचन का सीधा संबंध शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली से होता है। जब पाचन सही रहता है, तो इम्यून सिस्टम भी मजबूती से काम करता है। एक ताकतवर प्रतिरक्षा प्रणाली बाहरी हानिकारक तत्वों और विषाक्त पदार्थों के प्रभाव को सीमित करती है, जिससे डीएनए को नुकसान नहीं पहुंचता। जब डीएनए की बनावट सुरक्षित रहती है, तो असामान्य कोशिकाओं के कैंसर में तब्दील होने की आशंका खत्म हो जाती है।

तंबाकू और शराब से पूर्ण दूरी

कैंसर के सबसे बड़े और प्रमुख कारणों में सिगरेट यानी तंबाकू का सेवन और शराब का उपयोग शामिल है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इन दोनों नशीले पदार्थों से किसी भी रूप में दूर रहने की सख्त हिदायत देते हैं। यदि कोई व्यक्ति इनका सेवन करता है, तो उसे तुरंत इस आदत को छोड़ देना चाहिए। सिगरेट और शराब की मामूली मात्रा भी शरीर के अंदर जाकर कैंसर के जोखिम को कई गुना तक बढ़ा देती है, इसलिए इनसे पूरी तरह दूरी बनाना ही बचाव का सबसे सुरक्षित रास्ता है।

शरीर के असामान्य संकेतों और लक्षणों पर निगरानी

कई बार कैंसर शरीर में विकसित होने में लंबा वक्त लेता है, लेकिन शुरुआत में यह कुछ हल्के या साधारण संकेत जरूर देता है। इन शुरुआती बदलावों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि त्वचा में कोई असामान्य परिवर्तन दिखे, किसी तिल का रंग, रूप या आकार बदलने लगे, शरीर में कोई गांठ महसूस हो, त्वचा पर चकत्ते उभरें, लगातार गले में दर्द बना रहे, आवाज में बदलाव आए या बिना किसी स्पष्ट वजह के अचानक वजन घटने लगे, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। ऐसे कोई भी लक्षण दिखने पर बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क कर जांच करवानी चाहिए।

सवाल-जवाब

भारत में साल 2024 में कैंसर के कितने मामले दर्ज किए गए?
साल 2024 में भारत में कैंसर के 15.6 लाख नए मरीज सामने आए और इस दौरान 9 लाख लोगों की जान गई।
नींद का कैंसर के जोखिम को कम करने से क्या संबंध है?
गहरी नींद के दौरान शरीर डीएनए की मरम्मत करता है और हार्मोन संतुलन व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाता है।
रोजाना कितनी देर शारीरिक कसरत करने की सलाह दी गई है?
हर दिन कम से कम आधा घंटा व्यायाम करने या न्यूनतम 10 हजार कदम पैदल चलने का सुझाव दिया गया है।
शरीर में कौन से शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
तिल के रंग या आकार में बदलाव, त्वचा में परिवर्तन, गांठ, लगातार गले में दर्द, आवाज बदलना या अचानक वजन कम होने पर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
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