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फल की मिठास और मिठाई की चीनी में फर्क क्यों है, हार्ट सर्जन ने खोला राज़स्वास्थ्य
11 जुल॰ 2026, 8:00 am (109 दिन पहले)· 6

फल की मिठास और मिठाई की चीनी में फर्क क्यों है, हार्ट सर्जन ने खोला राज़

हार्ट सर्जन डॉक्टर जेरेमी लंदन ने इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया कि फल और मिठाई की चीनी रासायनिक रूप से एक जैसी होती है, लेकिन शरीर पर असर उसके साथ मौजूद फाइबर और पानी की वजह से अलग होता है।

मीठा खाने को लेकर सलाहें अक्सर एक-दूसरे से टकराती नजर आती हैं। एक तरफ चीनी और मिठाइयों से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है, तो दूसरी तरफ मीठे फल भरपूर खाने की सलाह दी जाती है। फलों में मौजूद नेचुरल शुगर की वजह से लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या यह शुगर मिठाई, कोल्ड ड्रिंक या प्रोसेस्ड फूड में मौजूद चीनी से सच में अलग होती है। हार्ट सर्जन डॉक्टर जेरेमी लंदन ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए इस उलझन को सुलझाने की कोशिश की है।

डॉक्टर जेरेमी लंदन का कहना है कि इस सवाल का जवाब हां भी है और ना भी। वजह यह है कि चीनी रासायनिक रूप से हर जगह एक जैसी ही होती है, लेकिन शरीर इसे किस तरह पचाता है, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि उसके साथ और क्या-क्या शरीर में जा रहा है।

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चीनी के अणु एक जैसे, तो फर्क कहां है?

डॉक्टर लंदन के मुताबिक फल और मिठाई, दोनों की मिठास मूल रूप से एक ही तरह के शुगर अणुओं से आती है। अगर इन अणुओं को उनके आसपास मौजूद बाकी चीजों से अलग करके सिर्फ अकेले खाया जाए, तो शरीर उन्हें एक जैसे तरीके से ही लेगा। यानी असली अंतर शुगर के अणुओं में नहीं, बल्कि उनके इर्द-गिर्द मौजूद चीजों में छिपा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक सेब में भी चीनी होती है और एक ग्लेज़्ड डोनट में भी चीनी होती है, दोनों में रासायनिक रूप से चीनी एक जैसी है। लेकिन शरीर इन दोनों को जिस तरीके से पचाता है, वह पूरी तरह अलग है। चीनी तो दोनों में मौजूद है, मगर चीनी के साथ क्या मिला हुआ है, इससे शरीर पर पड़ने वाला असर बहुत बड़ा फर्क पैदा कर देता है।

साबुत फल शरीर पर धीमी रफ्तार से असर क्यों डालते हैं?

डॉक्टर लंदन बताते हैं कि साबुत फलों में नेचुरल शुगर तो होती ही है, लेकिन इसके साथ फाइबर और पानी भी मौजूद रहता है। यही फाइबर और पानी पाचन क्रिया को धीमा कर देते हैं, जिससे ब्लड शुगर में वह अचानक उछाल नहीं आता, जो आमतौर पर उतनी ही मात्रा में सीधी चीनी खाने पर देखने को मिलता है। इसके अलावा फल पॉलीफेनॉल और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भी भरपूर होते हैं, जो उन्हें ऐसे पोषण संबंधी फायदे देते हैं जो प्रोसेस्ड चीनी में कभी नहीं मिलते। उदाहरण के तौर पर सेब में फाइबर, पानी, पॉलीफेनॉल और एंटीऑक्सीडेंट सभी मौजूद होते हैं। ये सभी तत्व मिलकर पाचन क्रिया को सुस्त कर देते हैं, जिसका सीधा असर इस बात पर पड़ता है कि शरीर शुगर को किस तरह प्रोसेस करता है। यही वजह है कि यह फल के ग्लाइसेमिक इंडेक्स के साथ-साथ शरीर में शुगर के पूरे मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित करता है।

जूस और सूखे मेवे उतने फायदेमंद क्यों नहीं?

डॉक्टर लंदन ने साफ किया कि ये सारे फायदे खासतौर से साबुत फलों पर ही लागू होते हैं। उनके मुताबिक जब वह साबुत फल की बात करते हैं, तो उनका मतलब सचमुच पूरे और साबुत फल से ही होता है, क्योंकि फलों का रस निकालते ही या उन्हें सुखाते ही यह जरूरी पोषक तत्व काफी हद तक खत्म हो जाते हैं। फलों के रस में से लगभग सारा फाइबर निकल जाता है, जिसके बाद यह किसी मीठे पेय पदार्थ की तरह ही काम करने लगता है। वहीं सूखे मेवे अपने अंदर फाइबर तो बचाए रखते हैं, लेकिन उनका ज्यादातर पानी निकल जाता है। पानी कम होने से उनमें चीनी की मात्रा गाढ़ी हो जाती है, जिससे कम समय में ज्यादा मात्रा में इसका सेवन करना आसान हो जाता है।

फल ही क्यों हैं शुगर का बेहतर विकल्प?

डॉक्टर लंदन के मुताबिक साबुत फल कैलोरी की मात्रा के हिसाब से देखा जाए तो मीठे पेय पदार्थों या प्रोसेस्ड स्नैक्स के मुकाबले कहीं ज्यादा पेट भरा होने का एहसास कराते हैं। यही वजह है कि नेचुरल शुगर के लिए फल को सबसे बेहतर स्रोत माना जाता है। फल खाने से शरीर को ऐसे जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं, जो प्रोसेस्ड शुगर से कभी हासिल नहीं हो सकते। कुल मिलाकर डॉक्टर लंदन का यह पोस्ट इस बात को साफ करता है कि सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि किसी चीज में चीनी कितनी है, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि उस चीनी के साथ शरीर में और क्या पहुंच रहा है।

सवाल-जवाब

क्या फलों की शुगर और मिठाई की चीनी रासायनिक रूप से अलग होती है?
नहीं, डॉक्टर जेरेमी लंदन के मुताबिक दोनों की चीनी रासायनिक रूप से एक जैसी ही होती है, फर्क इस बात में है कि उसके साथ शरीर में और क्या जा रहा है।
फल शरीर के लिए मिठाई से बेहतर क्यों माने जाते हैं?
साबुत फलों में मौजूद फाइबर और पानी पाचन क्रिया को धीमा कर देते हैं, जिससे ब्लड शुगर में वह अचानक उछाल नहीं आता जो सीधी चीनी खाने पर होता है।
क्या फलों का जूस पीना साबुत फल खाने जितना ही फायदेमंद है?
नहीं, जूस बनाते समय लगभग सारा फाइबर निकल जाता है, जिससे यह एक मीठे पेय पदार्थ की तरह काम करने लगता है।
सूखे मेवे खाने में क्या दिक्कत है?
सूखे मेवे फाइबर तो बरकरार रखते हैं, लेकिन पानी निकल जाने से इनमें चीनी की मात्रा गाढ़ी हो जाती है, जिससे कम समय में ज्यादा चीनी खाई जा सकती है।
यह जानकारी किसने शेयर की है?
हार्ट सर्जन डॉक्टर जेरेमी लंदन ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए यह बात समझाई है।
फल खाने का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
फल कैलोरी के हिसाब से ज्यादा पेट भरा होने का एहसास कराते हैं और साथ में ऐसे पोषक तत्व देते हैं जो प्रोसेस्ड चीनी से नहीं मिलते।
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