आमतौर पर केवल खट्टी चटनी, अचार या मुरब्बे के लिए इस्तेमाल होने वाला करौंदा, जिसे कई जगहों पर करवन भी कहा जाता है, सेहत के लिहाज से एक चमत्कारी औषधीय पौधा है। आयुर्वेद में इस कटीले पौधे को गुणों का एक बड़ा भंडार माना गया है। इसके कच्चे फल शुरुआत में चमकीले हरे रंग के होते हैं, लेकिन जैसे-जैसे ये पकते हैं, इनका रंग गहरा लाल या काला हो जाता है। स्वाद में काफी खट्टा होने के कारण लोग इसका इस्तेमाल जैम और चटनी जैसी कई स्वादिष्ट चीजें बनाने में करते हैं। हालांकि, यह केवल स्वाद बढ़ाने वाला फल नहीं है, बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने वाले कई जरूरी पोषक तत्वों का प्राकृतिक स्रोत भी है।
फल, जड़ और पत्तियों के बेमिसाल औषधीय फायदे
करौंदा जब पूरी तरह पक जाता है, तब इसके गुण शरीर की पाचन क्रिया को दुरुस्त करने, भूख बढ़ाने और शारीरिक ऊर्जा को बढ़ाने में काफी मदद करते हैं। इस पौधे का हर हिस्सा, चाहे वह फल हो, पत्तियां हों या फिर जड़, अपने आप में औषधीय गुणों से भरपूर है। इसकी जड़ में पेट के कीड़ों को खत्म करने वाले तत्व पाए जाते हैं, जबकि जड़ की छाल का उपयोग कफ और वात से जुड़ी शारीरिक समस्याओं से राहत पाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, शरीर के भीतर होने वाली जलन को शांत करने, हाजमे को बेहतर बनाने और सामान्य शारीरिक कमजोरी को दूर करने में भी यह पौधा काफी असरदार माना गया है।
दांतों की सेहत और सूखी खांसी में एक्सपर्ट की सलाह
हमारे दांतों और मसूड़ों को सेहतमंद रखने में भी करौंदा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया में पांच साल का अनुभव रखने वाली चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के मुताबिक, करौंदे में कई ऐसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो स्कर्वी जैसी मसूड़ों की गंभीर बीमारी को दूर करने में सहायक हैं। इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति लगातार सूखी खांसी से परेशान है, तो करौंदे की पत्तियों के ताजे रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर लेने से गले की खराश और खांसी में तुरंत राहत मिलती है।
पेट की समस्याओं और अपच का प्राकृतिक इलाज
पाचन तंत्र से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के इलाज में पारंपरिक तौर पर इस पौधे का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। करौंदे के कच्चे सूखे फलों और इसकी जड़ को पीसकर तैयार किए गए चूर्ण का सेवन करने से दस्त, पेट के कीड़े और पेट से जुड़ी अन्य दिक्कतों से आसानी से छुटकारा मिल जाता है। यदि किसी को सामान्य से बहुत ज्यादा प्यास लगने की समस्या है, तो पके हुए करौंदे के चूर्ण का सेवन इस परेशानी को कम कर सकता है। वहीं, ज्यादा खा लेने के कारण या एसिडिटी की वजह से होने वाले पेट दर्द में इसके फूलों या जड़ों का इस्तेमाल बेहद फायदेमंद साबित होता है।
यूरिन इन्फेक्शन और महिलाओं के स्वास्थ्य में उपयोगी
यूरिनरी ट्रैक्ट और महिलाओं से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में भी करौंदे के औषधीय गुण काफी कारगर हैं। पेशाब के दौरान होने वाली जलन या दर्द को ठीक करने के लिए पारंपरिक रूप से इसकी जड़ का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, जलोदर यानी पेट में पानी भरने की गंभीर समस्या में करौंदे की पत्तियों के रस का नियमित सेवन करने की सलाह दी जाती है। महिलाओं में अत्यधिक ब्लीडिंग या मासिक धर्म से जुड़ी अन्य समस्याओं को नियंत्रित करने में भी इसकी जड़ का काढ़ा या चूर्ण बेहद असरदार माना गया है।
करौंदे का लेप त्वचा की बीमारियों को ठीक करने में भी बहुत मददगार है। इसके पके हुए फलों या जड़ों को पीसकर बनाया गया लेप खुजली, त्वचा की जलन और अन्य चर्म रोगों पर लगाने से तेजी से आराम मिलता है। यदि किसी को तेज बुखार है, तो इसकी पत्तियों से तैयार काढ़ा पीना बेहद फायदेमंद हो सकता है। फटी एड़ियों की समस्या से परेशान लोग इसके बीजों का लेप प्रभावित हिस्से पर लगा सकते हैं। यहां तक कि मिर्गी के दौरों के लक्षणों को कम करने में भी इसके पत्ते काफी सहायक माने गए हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय परामर्श लेना सबसे ज्यादा जरूरी है।
उपयोग का तरीका और कुछ जरूरी सावधानियां
करौंदे के पत्ते, जड़ और फल इस पौधे के सबसे उपयोगी हिस्से हैं। इन्हें आप ताजे फल, चटनी, अचार, चूर्ण या फिर काढ़े के रूप में अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। हालांकि, औषधीय रूप में इसका कितनी मात्रा में सेवन करना चाहिए, यह व्यक्ति की उम्र, उसकी बीमारी की गंभीरता और शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है। इसलिए, किसी भी गंभीर बीमारी के घरेलू उपचार के तौर पर इसे अपनाने से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह जरूर लें।
इसके साथ ही यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि यह सुपरफूड हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होता। गठिया, गाउट, साइटिका और पेट के अल्सर से पीड़ित मरीजों को इसके सेवन से बचना चाहिए या बेहद सावधानी बरतनी चाहिए। संतुलित खानपान और डॉक्टर की सही सलाह के साथ ही इसका सेवन सुरक्षित रहता है।











