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आईवीएफ और जुड़वा बच्चों का सच: जानिए क्यों अब सिंगल एम्ब्रियो ट्रांसफर बन रहा है डॉक्टरों की पहली पसंदस्वास्थ्य
2 घंटे पहले· 0

आईवीएफ और जुड़वा बच्चों का सच: जानिए क्यों अब सिंगल एम्ब्रियो ट्रांसफर बन रहा है डॉक्टरों की पहली पसंद

आईवीएफ तकनीक को लेकर समाज में फैली गलतफहमियों को दूर करते हुए विशेषज्ञों ने बताया है कि आधुनिक चिकित्सा में अब जुड़वा बच्चों के बजाय एक स्वस्थ शिशु के सुरक्षित जन्म को प्राथमिकता दी जा रही है।

पूजा भट्टपूजा भट्टहेल्थ संवाददाता 4 मिनट पढ़ें AI के लिए
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जौनपुर में आज भी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी आईवीएफ चिकित्सा पद्धति को लेकर कई तरह के भ्रम और गलत जानकारियां फैली हुई हैं। सबसे बड़ा और आम संशय यह है कि आईवीएफ के जरिए गर्भधारण करने पर हमेशा जुड़वा या उससे ज्यादा बच्चों का जन्म होता है। इसी डर और गलतफहमी की वजह से कई संतानहीन दंपत्ति इस बेहतरीन इलाज को अपनाने से कतराते हैं। हालांकि, फर्टिलिटी विशेषज्ञों का कहना है कि यह धारणा पूरी तरह से निराधार और एक मिथक है। आज के उन्नत चिकित्सा युग में आईवीएफ का प्राथमिक लक्ष्य जुड़वा बच्चों को जन्म देना नहीं, बल्कि मां और नवजात शिशु दोनों को पूरी तरह से स्वस्थ और सुरक्षित रखना है।

पहले क्यों बढ़ जाती थी जुड़वा बच्चों के जन्म की दर?

कृष्णा आईवीएफ सेंटर की आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. मधु शारदा ने इस विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि जब शुरुआती दौर में आईवीएफ तकनीक का विकास हुआ था, तब चिकित्सा विज्ञान आज जितना उन्नत नहीं था। उस समय गर्भधारण की सफलता दर को बढ़ाने के लिए डॉक्टर एक साथ दो या तीन भ्रूणों को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर देते थे। इस प्रक्रिया के कारण स्वाभाविक रूप से जुड़वा या तीन बच्चों के जन्म की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती थी। लेकिन समय के साथ चिकित्सा विज्ञान ने अभूतपूर्व प्रगति की है और पुरानी पद्धतियों में बड़े सुधार किए गए हैं।

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सिंगल एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक से आया बड़ा बदलाव

डॉ. मधु शारदा के अनुसार, आधुनिक फर्टिलिटी क्लिनिकों में अब सिंगल एम्ब्रियो ट्रांसफर को ही सबसे सुरक्षित और बेहतर विकल्प माना जाता है। इस आधुनिक प्रक्रिया में सबसे पहले महिला के अंडों और पुरुष के शुक्राणुओं के मेल से बने भ्रूण को आईवीएफ लैब के नियंत्रित वातावरण में पांच से छह दिनों तक विकसित किया जाता है। जब भ्रूण पूरी तरह से स्वस्थ और मजबूत हो जाता है, तो उसमें से केवल एक सबसे अच्छी गुणवत्ता वाले भ्रूण का चयन करके उसे गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है। इस वैज्ञानिक तकनीक की मदद से न केवल गर्भधारण की सफलता दर उत्कृष्ट रहती है, बल्कि एक ही स्वस्थ शिशु के सुरक्षित जन्म की संभावना भी सबसे ज्यादा होती है।

एक से अधिक बच्चों के जन्म से जुड़े गंभीर स्वास्थ्य जोखिम

चिकित्सीय दृष्टिकोण से एक साथ दो या तीन बच्चों का गर्भधारण करना हमेशा सुरक्षित नहीं माना जाता है। डॉ. मधु शारदा ने सचेत करते हुए बताया कि बहु-भ्रूण गर्भावस्था में मां और बच्चों दोनों के लिए कई तरह के स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाते हैं। ऐसी स्थितियों में समय से पहले प्रसव होना, जन्म के समय बच्चों का वजन बहुत कम होना, गर्भाशय के भीतर बच्चों का समुचित विकास रुक जाना, कुपोषण, गंभीर एनीमिया और जन्म के तुरंत बाद नवजात शिशुओं में संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा, ऐसे बच्चों की शारीरिक और मानसिक वृद्धि की गति भी सामान्य बच्चों की तुलना में धीमी होने की आशंका रहती है।

आईवीएफ की वास्तविक सफलता का सही पैमाना क्या है?

विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि किसी भी आईवीएफ उपचार की वास्तविक सफलता इस बात से नहीं मापी जानी चाहिए कि कितने बच्चों का जन्म हुआ है, बल्कि इसका सही पैमाना एक स्वस्थ मां द्वारा एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देना है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का मुख्य ध्येय गर्भावस्था के दौरान होने वाली हर तरह की जटिलता को न्यूनतम करना है। यही कारण है कि आज के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा केवल एक ही भ्रूण को स्थानांतरित करने की सलाह दी जाती है ताकि गर्भावस्था का सफर पूरी तरह सुरक्षित रहे और होने वाली मां को किसी भी प्रकार की चिकित्सीय परेशानी का सामना न करना पड़े।

भ्रम और अफवाहों से बचें, विशेषज्ञ से लें सही परामर्श

डॉ. मधु शारदा ने संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों या अधूरी जानकारियों पर भरोसा करने के बजाय सीधे फर्टिलिटी विशेषज्ञों से मिलकर सही सलाह लें। आईवीएफ को लेकर मन में किसी भी प्रकार का डर या संशय रखना सही नहीं है। आज की नवीनतम तकनीकों ने आईवीएफ को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित, आसान और अत्यधिक सफल बना दिया है। यदि किसी दंपत्ति को माता-पिता बनने में कठिनाई आ रही है, तो उन्हें बिना किसी हिचकिचाहट के विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लेना चाहिए। आईवीएफ की सच्ची सार्थकता जुड़वा बच्चों में नहीं, बल्कि एक स्वस्थ बच्चे के रूप में परिवार में खुशियां लाने में है।

इसका आप पर असर

भारत में: यह डॉक्टरों की सलाह उन दंपत्तियों को मानसिक राहत देगी जो जुड़वा बच्चों के स्वास्थ्य जोखिमों के डर से आईवीएफ तकनीक का सहारा लेने से डर रहे थे।

जौनपुर में: स्थानीय स्तर पर लोग अब कृष्णा आईवीएफ सेंटर जैसी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के बारे में जागरूक होकर बिना किसी संकोच के सुरक्षित मातृत्व का लाभ उठा सकेंगे।

सवाल-जवाब

क्या आईवीएफ (IVF) उपचार से हमेशा जुड़वा बच्चे ही पैदा होते हैं?
नहीं, यह पूरी तरह से एक मिथक है। आधुनिक आईवीएफ तकनीक में केवल एक ही स्वस्थ भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है, जिससे सिंगल बच्चे के जन्म की संभावना सबसे अधिक होती है।
पहले के समय में आईवीएफ के दौरान जुड़वा बच्चों की संभावना क्यों अधिक रहती थी?
शुरुआती दौर में तकनीक नई होने के कारण डॉक्टर गर्भधारण की सफलता सुनिश्चित करने के लिए एक से अधिक भ्रूण गर्भाशय में डालते थे, जिससे अक्सर जुड़वा बच्चे हो जाते थे।
सिंगल एम्ब्रियो ट्रांसफर (SET) क्या है?
यह एक आधुनिक तकनीक है जिसमें आईवीएफ लैब में 5 से 6 दिन तक विकसित किए गए भ्रूणों में से केवल एक सबसे स्वस्थ भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है।
एक साथ दो या तीन बच्चों के गर्भधारण में क्या जोखिम होते हैं?
मल्टीपल प्रेगनेंसी में समय से पहले प्रसव, बच्चों का कम वजन होना, शारीरिक-मानसिक विकास धीमा होना, कुपोषण और संक्रमण जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा रहता है।
आईवीएफ उपचार की वास्तविक सफलता किसे माना जाता है?
आईवीएफ की वास्तविक सफलता बच्चों की संख्या में नहीं, बल्कि एक स्वस्थ मां द्वारा एक स्वस्थ शिशु को सुरक्षित रूप से जन्म देने में है।
पूजा भट्ट
लेखक के बारे मेंपूजा भट्टहेल्थ संवाददाता लखनऊ
विशेषज्ञताहेल्थ समाचार, सार्वजनिक स्वास्थ्य, चिकित्सा रिपोर्टिंग, वेलनेस, फ़िटनेस, पोषण, स्वास्थ्य नीति, रोग जागरूकता, चिकित्सा अनुसंधान, मानसिक स्वास्थ्य

पूजा भट्ट एक हेल्थ संवाददाता हैं जो चिकित्सा ख़बरों, वेलनेस, स्वास्थ्य नीति, फ़िटनेस और सार्वजनिक स्वास्थ्य अपडेट को कवर करती हैं। वे अहम स्वास्थ्य घटनाक्रमों और उभरते चिकित्सा रुझानों पर रिपोर्ट करती हैं।

पूजा भट्ट एक हेल्थ संवाददाता हैं जो हेल्थकेयर पत्रकारिता — चिकित्सा ख़बरों, सार्वजनिक स्वास्थ्य अपडेट, वेलनेस रुझानों, अस्पताल व स्वास्थ्य तंत्र की रिपोर्टिंग और स्वास्थ्य नीति — में विशेषज्ञता रखती हैं। वे ब्रेकिंग हेल्थ स्टोरी, रोग जागरूकता, चिकित्सा अनुसंधान, फ़िटनेस, पोषण और हेल्थकेयर तकनीक की प्रगति कवर करती हैं। सटीकता और स्पष्टता पर मज़बूत ज़ोर के साथ पूजा ऐसी जानकारीपूर्ण रिपोर्टिंग देती हैं जो पाठकों को जटिल चिकित्सा विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करती है। उनकी कवरेज में सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल, हेल्थकेयर तक पहुँच, निवारक देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और चिकित्सा में उभरते नवाचार शामिल हैं।

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