भीलवाड़ा स्थित मेडिकल कॉलेज परिसर में नर्सिंग ग्रेड सेकंड के पद पर सेवा बहाली की मांग कर रहे निविदा कर्मचारियों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। अपने प्रदर्शन के तीसरे दिन आंदोलनकारी स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए एक अनोखा और दर्दनाक तरीका अपनाया। कर्मचारियों ने अपने ही खून से एक पत्र लिखकर अपनी समस्याएं और सेवा में वापस लेने की मांग जिम्मेदार अधिकारियों के सामने प्रस्तुत की। लंबे समय से अस्पताल में सेवाएं दे रहे इन कर्मचारियों का कहना है कि मरीजों के इलाज और नर्सिंग देखभाल में लगातार योगदान देने के बाद भी उनकी सेवा बहाली पर अब तक कोई विचार नहीं किया गया है।
प्रशासनिक उपेक्षा से बढ़ा कर्मचारियों का आक्रोश
प्रदर्शनकारी निविदा कर्मियों के अनुसार, उन्होंने अपनी सेवा बहाली और अन्य समस्याओं को लेकर कई मौकों पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और जिम्मेदार प्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे। हालांकि, लंबे समय तक बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जब प्रशासनिक स्तर पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो कर्मचारियों के बीच असंतोष गहराता गया। यही वजह है कि मजबूरी में उन्हें मेडिकल कॉलेज परिसर के भीतर अनिश्चितकालीन धरने का रास्ता चुनना पड़ा।
आंदोलन के तीसरे दिन खून से पत्र लिखकर विरोध प्रकट करने वाले कर्मियों ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद केवल सरकार और अस्पताल प्रशासन को मामले की गंभीरता से अवगत कराना है। वे चाहते हैं कि उनके अनुभव और पूर्व में दी गई सेवाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें पुनः नर्सिंग ग्रेड सेकंड के पद पर नियुक्त किया जाए। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनकी निष्ठापूर्वक दी गई सेवाओं के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन या उपेक्षा ही मिली है।
अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों की देखभाल पर पड़ा असर
धरने पर बैठे निविदा कर्मियों का कहना है कि उन्होंने अस्पताल में लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों के बीच अपनी सेवाएं प्रदान की हैं। नियमित रूप से मरीजों की देखभाल करने, वार्डों का प्रबंधन संभालने और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े अन्य सभी आवश्यक कार्यों में उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उठाई है। ऐसे में अचानक अपनी सेवाएं समाप्त किए जाने या बहाली न होने से उनके सामने जीविका का संकट खड़ा हो गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने हमेशा स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी है, लेकिन जब उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया गया, तो उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा। तीसरे दिन आयोजित इस अनोखे प्रदर्शन के जरिए कर्मचारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों से जल्द से जल्द मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है ताकि उनकी सेवाओं को सुचारू रूप से बहाल किया जा सके।
सकारात्मक फैसले तक जारी रहेगा अनिश्चितकालीन धरना
मेडिकल कॉलेज परिसर में आंदोलन कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों ने चेतावनी दी है कि वे अपनी जायज मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। जब तक सक्षम अधिकारी उनकी सेवा बहाली को लेकर कोई ठोस और लिखित फैसला नहीं लेते, तब तक यह धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। कर्मचारियों ने साफ कहा कि वे दोबारा अस्पताल में मरीजों की सेवा शुरू करना चाहते हैं और इसके लिए हर स्तर पर अपनी बात रखेंगे।
खून से पत्र लिखकर अपनी पीड़ा व्यक्त करने के इस अनोखे कदम के बाद अब सबकी नजरें मेडिकल कॉलेज प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों के रुख पर टिकी हैं। देखना होगा कि क्या प्रशासन इन निविदा कर्मियों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए उनकी सेवा बहाली की प्रक्रिया शुरू करता है या कर्मचारियों को अपना आंदोलन और तेज करना पड़ेगा।



















