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शरीर में रातों-रात नहीं पनपता कैंसर, जानिए कोशिकाओं में होने वाले बदलाव और इसके मुख्य जोखिम कारकस्वास्थ्य
17 अग॰ 2026, 8:20 am (72 दिन पहले)· 1

शरीर में रातों-रात नहीं पनपता कैंसर, जानिए कोशिकाओं में होने वाले बदलाव और इसके मुख्य जोखिम कारक

कैंसर अचानक नहीं होता, बल्कि यह कोशिकाओं में धीरे-धीरे होने वाले असामान्य परिवर्तनों के कारण विकसित होता है। जानिए इसके कारण और समय पर जांच का महत्व।

कई बार जब बिल्कुल स्वस्थ और फिट दिखने वाले लोगों में अचानक तीसरे या चौथे चरण के कैंसर की पुष्टि होती है, तो लोगों के मन में यह आशंका उठने लगती है कि क्या यह बीमारी रातों-रात शरीर को अपनी चपेट में ले लेती है। हालांकि, चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो कैंसर एक दिन में पैदा होने वाली समस्या नहीं है। यह हमारे शरीर की कोशिकाओं में महीनों या वर्षों तक लगातार होने वाले असामान्य परिवर्तनों के परिणामस्वरूप धीरे-धीरे पनपता है। डॉक्टर अक्षत मलिक (सीनियर कंसल्टेंट-हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजी, अपोलो हॉस्पिटल्स, दिल्ली) के अनुसार, समय-समय पर कराई जाने वाली कैंसर स्क्रीनिंग किसी भी व्यक्ति को बड़े खतरे से सुरक्षित रख सकती है। यदि शरीर में कैंसर से जुड़ा कोई भी शुरुआती लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि सही समय पर सही चिकित्सा मिलने से मरीज के ठीक होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

कैंसर क्या है और यह शरीर में कैसे फैलता है?

कैंसर की बुनियादी प्रक्रिया को समझना हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है। सामान्य परिस्थितियों में हमारे शरीर की कोशिकाएं एक नियंत्रित तरीके से विभाजित होती हैं, बढ़ती हैं और पुरानी होने पर नष्ट हो जाती हैं। लेकिन जब यह नियंत्रण तंत्र बिगड़ जाता है, तो कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से विभाजित होने लगती हैं। यही असामान्य कोशिकाएं जमा होकर गांठ या ट्यूमर का रूप धारण कर लेती हैं। समय बीतने के साथ ये कोशिकाएं आसपास के स्वस्थ ऊतकों पर आक्रमण करती हैं और रक्त या लसिका तंत्र के माध्यम से शरीर के अन्य भागों तक फैल सकती हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि शरीर में बनने वाला हर ट्यूमर कैंसर का रूप नहीं होता। कई ट्यूमर गैर-कैंसरकारी यानी बेनाइन होते हैं, जो शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं फैलते।

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कैंसर विकसित होने के प्रमुख कारण और जोखिम कारक

कैंसर होने के पीछे कोई एक विशिष्ट कारण नहीं होता। यह व्यक्ति की दिनचर्या, आनुवंशिकी, जैविक संरचना और पर्यावरणीय कारकों के जटिल तालमेल से जुड़ा हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इसके मुख्य जोखिम कारकों को निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है

  • आनुवंशिक परिवर्तन (Genetic Mutations): जब कोशिकाओं के DNA संरचना में कोई खराबी या म्यूटेशन आ जाता है, तो कोशिकाएं सही ढंग से कार्य करना बंद कर देती हैं। इस प्रकार के आनुवंशिक बदलाव कुछ लोगों में जन्मजात हो सकते हैं, जबकि कई मामलों में ये जीवनभर के दौरान बाहरी प्रभावों के कारण उत्पन्न होते हैं।
  • तंबाकू और धूम्रपान का सेवन: सिगरेट, बीड़ी, गुटखा या चबाने वाले तंबाकू का उपयोग कैंसर के सबसे बड़े कारणों में से एक है। इससे फेफड़ों, मुंह, गले, भोजन नली और मूत्राशय के कैंसर का जोखिम अत्यधिक बढ़ जाता है।
  • अनहेल्दी लाइफस्टाइल और गलत खानपान: आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा, जंक फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन शरीर में पुरानी सूजन और मेटाबॉलिक असंतुलन पैदा करता है, जो कैंसर के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है।
  • अत्यधिक शराब का सेवन: जो लोग नियमित रूप से या अधिक मात्रा में शराब का सेवन करते हैं, उनमें सामान्य लोगों की तुलना में लिवर, स्तन और पाचन तंत्र से जुड़े कैंसर का खतरा काफी अधिक होता है।
  • संक्रमण और रोगजनक: शरीर में लंबे समय तक रहने वाले कुछ विशेष वायरस और बैक्टीरिया भी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कैंसर का कारण बन सकते हैं। इनमें HIV, हेपेटाइटिस B, हेपेटाइटिस C और हेलिकोबैक्टर पाइलोरी प्रमुख रूप से शामिल हैं।
  • पर्यावरण और हानिकारक रसायन: लगातार प्रदूषित हवा के संपर्क में रहना, एस्बेस्टस, औद्योगिक रसायनों, अत्यधिक UV किरणों और रेडिएशन का प्रभाव भी कोशिकाओं के DNA को नुकसान पहुंचाता है।
  • बढ़ती उम्र और पारिवारिक इतिहास: बढ़ती उम्र के साथ शरीर की कोशिकाओं में प्राकृतिक रूप से बदलाव आते हैं और उनकी मरम्मत की क्षमता कम होने लगती है, जिससे कैंसर का जोखिम बढ़ता है। इसके अलावा, यदि परिवार में कैंसर का इतिहास रहा हो, तो विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।

नियमित जांच और रोकथाम का महत्व

यदि आपका वजन अधिक है, आप धूम्रपान या शराब का सेवन करते हैं, आपकी दिनचर्या में व्यायाम शामिल नहीं है या आप अत्यधिक प्रदूषित वातावरण में रहते हैं, तो समय-समय पर अपनी स्वास्थ्य जांच करवाना अत्यंत आवश्यक है। नियमित कैंसर स्क्रीनिंग के माध्यम से कोशिकाओं में होने वाले शुरुआती परिवर्तनों को ट्यूमर बनने से पहले ही पहचाना जा सकता है, जिससे प्रभावी रोकथाम और पूर्ण इलाज संभव हो पाता है।

सवाल-जवाब

क्या कैंसर शरीर में अचानक विकसित हो जाता है?
नहीं, कैंसर रातों-रात या अचानक नहीं होता। यह कोशिकाओं के DNA में लंबे समय तक होने वाले असामान्य परिवर्तनों के बाद धीरे-धीरे विकसित होता है।
क्या शरीर में बनने वाला हर ट्यूमर कैंसर होता है?
नहीं, सभी ट्यूमर कैंसरकारी नहीं होते। कई ट्यूमर गैर-कैंसरकारी (बेनाइन) होते हैं जो शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं फैलते।
कैंसर के मुख्य कारण कौन-कौन से हैं?
इसके मुख्य कारणों में तंबाकू, धूम्रपान, अत्यधिक शराब, खराब जीवनशैली, आनुवंशिक म्यूटेशन, कुछ खास संक्रमण और पर्यावरणीय प्रदूषण शामिल हैं।
कैंसर से बचाव में स्क्रीनिंग का क्या महत्व है?
समय-समय पर स्क्रीनिंग कराने से कोशिकाओं के असामान्य बदलावों की पहचान शुरुआती चरण में हो जाती है, जिससे समय रहते सही इलाज संभव होता है।
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