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सावन में बालकनी बन सकती है मिनी दवाखाना, जानें कौन से 5 पौधे देंगे सेहत का साथस्वास्थ्य
2 घंटे पहले· 2

सावन में बालकनी बन सकती है मिनी दवाखाना, जानें कौन से 5 पौधे देंगे सेहत का साथ

सावन की बारिश में घर की बालकनी या छत पर तुलसी, पुदीना, अजवाइन, अश्वगंधा और पत्थरचट्टा जैसे पांच औषधीय पौधे लगाकर छोटी-मोटी सेहत से जुड़ी परेशानियों का प्राकृतिक इलाज घर पर ही तैयार किया जा सकता है।

पूजा भट्टपूजा भट्टहेल्थ संवाददाता 4 मिनट पढ़ें AI के लिए
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बारिश का मौसम शुरू होते ही बालकनी और छत को हरा-भरा बनाने का सबसे अच्छा समय आ जाता है, लेकिन अगर उसी जगह पर कुछ खास औषधीय पौधे लगा दिए जाएं तो घर सिर्फ खूबसूरत ही नहीं, सेहत का छोटा सा दवाखाना भी बन जाता है। जुलाई की फुहारों में मिट्टी नमी सोखकर पौधों की जड़ें तेजी से पकड़ने लगती हैं, यही वजह है कि बागवानी के जानकार इसी मौसम को औषधीय पौधे लगाने के लिए सबसे मुफीद बताते हैं। आजकल हर छोटी परेशानी में डॉक्टर के पास जाने या महंगी दवाइयों पर पैसा खर्च करने के बजाय, अगर गमले में ही प्राकृतिक इलाज मौजूद हो तो यह किसी वरदान से कम नहीं। ऐसे में पांच ऐसे पौधे हैं, जिन्हें जुलाई की बारिश में बेहद आसानी से घर के गमलों में उगाया जा सकता है और ये इम्युनिटी बढ़ाने के साथ-साथ घर की हवा को भी शुद्ध रखते हैं।

कौन-कौन से पांच पौधे सेहत के लिए फायदेमंद हैं

सतना के किसान अंशुमान सिंह के मुताबिक, जड़ी-बूटियों की रानी मानी जाने वाली तुलसी को 10 से 12 इंच के गमले में बड़ी आसानी से लगाया जा सकता है। इसकी पत्तियां चाय और काढ़े में इस्तेमाल होती हैं और शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करती हैं। खास बात यह है कि तुलसी सिर्फ 40 से 50 दिनों में ही इस्तेमाल के लायक हो जाती है। इसके अलावा पेट दर्द और अपच से राहत दिलाने वाला पुदीना जुलाई के महीने में एक छोटी सी टहनी से ही बहुत तेजी से फैलने लगता है और महज 30 से 35 दिनों में इसकी पहली कटाई की जा सकती है। पेट फूलने और गैस जैसी दिक्कतों में रामबाण मानी जाने वाली अजवाइन का पौधा भी अपनी खुशबूदार पत्तियों के लिए जाना जाता है। मानसून के दौरान इसकी कटिंग लगाने पर यह 20 से 25 दिनों के भीतर पूरी तरह फैल जाता है। तनाव और एंग्जायटी को कम करने वाला अश्वगंधा बाकी पौधों की तुलना में थोड़ी लंबी अवधि की फसल है, इसके बीज जुलाई की शुरुआत में बोए जाते हैं और इसकी जड़ें तैयार होने में 150 से 180 दिन का समय लगता है। पांचवां पौधा है पत्थरचट्टा, जो किडनी स्टोन जैसी समस्या के इलाज में कारगर माना जाता है। इसकी खासियत यह है कि सिर्फ एक पत्ता मिट्टी पर रख देने भर से 60 से 70 दिनों के भीतर एक बिल्कुल नया पौधा तैयार हो जाता है।

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गमला तैयार करने का सही तरीका क्या है

अंशुमान सिंह बताते हैं कि ये सभी पांचों पौधे 12 से 14 इंच के गमलों में आराम से उगाए जा सकते हैं, लेकिन गमला तैयार करने के पीछे एक खास सीक्रेट फॉर्मूला जरूर अपनाना चाहिए। सबसे पहले गमले के नीचे एक अच्छा ड्रेनेज होल बनाना जरूरी है और उसे कंकड़ या टूटे दीये के टुकड़ों से ढक देना चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। इसके बाद मिट्टी तैयार करते समय 50 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत पुरानी गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट और 20 प्रतिशत रेत को आपस में अच्छी तरह मिलाना चाहिए। इसमें रेत मिलाने के पीछे वजह यह है कि इससे गमले में पानी ठहरता नहीं है, जिससे बरसात के मौसम में पौधों की जड़ें सड़ने से बच जाती हैं। यह छोटा सा फॉर्मूला ही तय करता है कि पौधा कितनी तेजी से और कितना स्वस्थ बढ़ेगा।

सही गमले का चुनाव और देखभाल के तरीके

एक्सपर्ट के मुताबिक, पुदीना और अजवाइन के पौधे बहुत तेजी से फैलते हैं, इसलिए इन्हें थोड़े चौड़े मुंह वाले गमलों में लगाना बेहतर रहता है। दूसरी तरफ अश्वगंधा की जड़ें जमीन में काफी गहराई तक जाती हैं, इसलिए इसके लिए गहरे गमले की जरूरत पड़ती है। इन सभी गमलों को घर की उस जगह पर रखना चाहिए, जहां सुबह के समय कम से कम 4 से 5 घंटे अच्छी धूप आती हो, क्योंकि धूप के बिना ये पौधे ठीक से पनप नहीं पाते। पानी देने का नियम भी बेहद आसान रखा जा सकता है, ऊपर की मिट्टी को छूकर देखें और जब वह सूखी महसूस हो, तभी पानी डालें। बरसात के मौसम में जरूरत से ज्यादा पानी देने या गमले में जलभराव होने से ये कीमती औषधीय पौधे खराब हो सकते हैं, इसलिए इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए। सही मिट्टी, सही गमला, पर्याप्त धूप और सही मात्रा में पानी, इन चार बातों का ध्यान रखकर कोई भी घर पर ही अपना छोटा औषधीय बगीचा तैयार कर सकता है।

इसका आप पर असर

  • घर वालों के लिए: तुलसी, पुदीना, अजवाइन, अश्वगंधा और पत्थरचट्टा जैसे पौधे घर में उगाकर पेट दर्द, अपच, गैस, तनाव और किडनी स्टोन जैसी छोटी-मोटी परेशानियों में बार-बार डॉक्टर या महंगी दवाइयों पर होने वाले खर्च से कुछ राहत मिल सकती है।
  • बागवानी के शौकीनों के लिए: जुलाई की बारिश जड़ पकड़ने के लिए सबसे अच्छा समय है, इसलिए सही मिट्टी का अनुपात (50% मिट्टी, 30% खाद, 20% रेत) और सही गमला अपनाकर ये पौधे कुछ ही हफ्तों में तैयार हो सकते हैं।

सवाल-जवाब

गमले में तुलसी कितने दिनों में इस्तेमाल के लायक हो जाती है?
10 से 12 इंच के गमले में लगाई गई तुलसी 40 से 50 दिनों में इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाती है।
पुदीने की पहली कटाई कब तक की जा सकती है?
जुलाई में लगाई गई एक छोटी टहनी से पुदीना तेजी से फैलता है और 30 से 35 दिनों में इसकी पहली कटाई हो सकती है।
अजवाइन का पौधा कितने दिनों में पूरी तरह फैल जाता है?
मानसून में कटिंग लगाने पर अजवाइन का पौधा 20 से 25 दिनों के भीतर पूरी तरह फैल जाता है।
अश्वगंधा की जड़ें तैयार होने में कितना समय लगता है?
जुलाई की शुरुआत में बोए गए अश्वगंधा के बीजों से जड़ें तैयार होने में 150 से 180 दिन लगते हैं।
पत्थरचट्टा का नया पौधा कैसे तैयार होता है और कितने दिनों में?
सिर्फ एक पत्ता मिट्टी पर रख देने से 60 से 70 दिनों में पत्थरचट्टा का बिल्कुल नया पौधा तैयार हो जाता है।
गमले की मिट्टी तैयार करने का सही अनुपात क्या है?
50 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत पुरानी गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट और 20 प्रतिशत रेत मिलाकर मिट्टी तैयार करनी चाहिए।
पौधों को धूप कितनी और कहां रखनी चाहिए?
गमलों को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां सुबह के समय कम से कम 4 से 5 घंटे अच्छी धूप मिले।
बरसात में पौधों को पानी कब देना चाहिए?
ऊपर की मिट्टी छूने पर जब वह सूखी महसूस हो, तभी पानी देना चाहिए, वरना जलभराव से जड़ें सड़ सकती हैं।
पूजा भट्ट
लेखक के बारे मेंपूजा भट्टहेल्थ संवाददाता लखनऊ
विशेषज्ञताहेल्थ समाचार, सार्वजनिक स्वास्थ्य, चिकित्सा रिपोर्टिंग, वेलनेस, फ़िटनेस, पोषण, स्वास्थ्य नीति, रोग जागरूकता, चिकित्सा अनुसंधान, मानसिक स्वास्थ्य

पूजा भट्ट एक हेल्थ संवाददाता हैं जो चिकित्सा ख़बरों, वेलनेस, स्वास्थ्य नीति, फ़िटनेस और सार्वजनिक स्वास्थ्य अपडेट को कवर करती हैं। वे अहम स्वास्थ्य घटनाक्रमों और उभरते चिकित्सा रुझानों पर रिपोर्ट करती हैं।

पूजा भट्ट एक हेल्थ संवाददाता हैं जो हेल्थकेयर पत्रकारिता — चिकित्सा ख़बरों, सार्वजनिक स्वास्थ्य अपडेट, वेलनेस रुझानों, अस्पताल व स्वास्थ्य तंत्र की रिपोर्टिंग और स्वास्थ्य नीति — में विशेषज्ञता रखती हैं। वे ब्रेकिंग हेल्थ स्टोरी, रोग जागरूकता, चिकित्सा अनुसंधान, फ़िटनेस, पोषण और हेल्थकेयर तकनीक की प्रगति कवर करती हैं। सटीकता और स्पष्टता पर मज़बूत ज़ोर के साथ पूजा ऐसी जानकारीपूर्ण रिपोर्टिंग देती हैं जो पाठकों को जटिल चिकित्सा विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करती है। उनकी कवरेज में सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल, हेल्थकेयर तक पहुँच, निवारक देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और चिकित्सा में उभरते नवाचार शामिल हैं।

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