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बारिश के मौसम में जीभ के चक्कर में सेहत से समझौता, ये चीजें बढ़ा सकती हैं इंफेक्शन का खतरास्वास्थ्य
6 जुल॰ 2026, 8:36 am (46 दिन पहले)· 2

बारिश के मौसम में जीभ के चक्कर में सेहत से समझौता, ये चीजें बढ़ा सकती हैं इंफेक्शन का खतरा

मानसून में तला भुना और स्ट्रीट फूड खाने का मन तो बहुत करता है, लेकिन डॉक्टर चंचल शर्मा के मुताबिक यही आदत पेट खराब होने, एसिडिटी और गंभीर इंफेक्शन की सबसे बड़ी वजह बन सकती है।

बारिश शुरू होते ही मन गरमागरम पकौड़े, समोसे और कचौड़ी की तरफ खिंच जाता है। मिट्टी की सोंधी खुशबू, ठंडी हवाएं और बारिश की बूंदों की आवाज़ के बीच चाय की चुस्की का मज़ा ही कुछ और होता है। यह मौसम भीषण गर्मी से राहत तो दिलाता है, लेकिन यही राहत अपने साथ बीमारियों और इंफेक्शन का खतरा भी लेकर आती है। बारिश के दिनों में सड़क किनारे बिकने वाला खाना सबसे जल्दी खराब होता है, जिसकी वजह से बीमार पड़ने में देर नहीं लगती। यही वजह है कि डॉक्टर इस मौसम में खानपान को लेकर खास सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

नमी और ठंडक शरीर के संतुलन को कैसे बिगाड़ती है

आशा आयुर्वेद क्लीनिक की डॉक्टर चंचल शर्मा के मुताबिक, मानसून का मौसम वातावरण में नमी और ठंडक लेकर आता है और यही बदलाव शरीर के अंदर वात और पित्त के संतुलन को बिगाड़ देता है। आयुर्वेद की भाषा में समझें तो बारिश के दिनों में शरीर तीन तरह से गड़बड़ाता है और हर गड़बड़ी के लक्षण अलग-अलग होते हैं।

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वात असंतुलन: नमी और ठंडी हवा के चलते शरीर में वात दोष बढ़ जाता है। इसका असर जोड़ों के दर्द, शरीर में अकड़न, बदन दर्द और लगातार बनी रहने वाली थकान के रूप में दिखाई देता है।

पित्त असंतुलन: तेज गर्मी के बाद जब बारिश होती है, तो जमीन से जो भाप उठती है, वह प्रकृति में एसिडिक होती है। इससे शरीर में पित्त बढ़ जाता है, पेट में जलन और एसिडिटी की शिकायत होने लगती है और इसका सीधा असर पाचन क्रिया पर पड़ता है। नतीजा यह होता है कि खाना पचने में भी सामान्य से ज्यादा वक्त लगने लगता है।

कफ असंतुलन: अगर हल्की सी सर्दी लगते ही जुकाम, खांसी और कफ जमा होने लगे, तो समझ लीजिए कि यह बढ़े हुए कफ दोष का ही असर है। यह मानसून में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने का भी संकेत माना जाता है।

मानसून में क्या नहीं खाना चाहिए

इस मौसम में बीमार पड़ने से बचना है और बारिश का मज़ा भी लेना है, तो सिर्फ अपने खानपान में थोड़ा बदलाव करना काफी है। डॉक्टर चंचल शर्मा के मुताबिक कुछ खास चीज़ों से दूरी बनाकर इस मौसम में सेहत आसानी से बनाई रखी जा सकती है।

तला भुना और बाहर का खाना छोड़ें: आयुर्वेद में तले भुने खाने को अभक्ष्य यानी न खाने लायक भोजन की श्रेणी में रखा गया है। सड़क किनारे खुले में बिकने वाले खाने में इस मौसम में संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है और इससे एसिडिटी, गैस और सीने में जलन जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। इसलिए बारिश के दिनों में बाहर मिलने वाली चाट, पकौड़े, गोल गप्पे, भुने हुए भुट्टे और शकरकंद खरीदकर खाने से परहेज करना चाहिए।

नॉन वेज खाने से परहेज करें: बरसात के मौसम में मांसाहारी भोजन से दूरी बनानी चाहिए, क्योंकि हवा में बढ़ी हुई नमी बैक्टीरिया को तेजी से पनपने में मदद करती है। इस मौसम में शरीर की पाचन क्रिया वैसे भी धीमी पड़ जाती है, ऐसे में ज्यादा मांस या खराब सी फूड खाने से पेट में गंभीर संक्रमण और फूड इंफेक्शन का खतरा और बढ़ जाता है।

ठंडा खाना और ठंडे पेय पदार्थ न लें: मानसून में पाचन शक्ति पहले से ही कमजोर पड़ जाती है, इसलिए ठंडा भोजन शरीर के लिए ठीक से पचा पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में ठंडा खाना या ठंडा पेय पीने से बचना चाहिए। इसकी जगह हर्बल टी, अदरक का पानी या गरम सूप जैसी चीज़ें लेने से पाचन क्रिया बेहतर बनी रहती है।

मसालेदार खाने से बचें: ज्यादा मसालेदार खाना पेट की अंदरूनी परत में जलन पैदा कर सकता है और पाचन से जुड़ी दिक्कतों को और बढ़ा सकता है, खासकर मानसून में जब पाचन क्रिया वैसे ही सुस्त पड़ी होती है। इसकी जगह हल्का और आसानी से पचने वाला खाना चुनना बेहतर रहता है, जिसमें तेल और मसाले कम इस्तेमाल हों।

पत्तेदार सब्जियां और कटे हुए सलाद न खाएं: हरी पत्तेदार सब्जियों की नमी में कीड़े और बैक्टीरिया आसानी से चिपक जाते हैं, जिन्हें खाने से पेट खराब हो सकता है। बाहर बिकने वाले कटे हुए सलाद और जूस पर मक्खियां बैठने का खतरा भी रहता है, इसलिए हमेशा घर में ताज़ा काटा हुआ सलाद ही खाना चाहिए।

सेहतमंद रहने के लिए क्या करें

मानसून के मौसम में वातावरण में कीटाणुओं की तादाद वैसे भी बढ़ जाती है, इसलिए बाहर के खाने से जितना बचा जाए उतना बेहतर है। घर का शुद्ध और सात्विक भोजन ही इस मौसम में सेहत के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है। कोशिश करें कि ताज़ा और हल्का गरम खाना ही खाया जाए, क्योंकि यह पाचन तंत्र पर कम बोझ डालता है। इसके साथ ही सौंफ और जीरे का पानी पीने की आदत डालें, इससे पेट साफ रहता है और इंफेक्शन का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है। कुल मिलाकर, मानसून का असली मज़ा तभी लिया जा सकता है जब खानपान को लेकर थोड़ी सी सावधानी बरती जाए।

सवाल-जवाब

मानसून में डॉक्टर किन चीजों से परहेज करने की सलाह देते हैं?
डॉक्टर चंचल शर्मा के मुताबिक तला भुना बाहर का खाना, नॉन वेज, ठंडा खाना-पेय, मसालेदार खाना और पत्तेदार सब्जियां व कटे हुए सलाद से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
बारिश के मौसम में शरीर में वात-पित्त-कफ का असंतुलन क्यों होता है?
मानसून की नमी और ठंडक शरीर में वात बढ़ाती है, गर्मी के बाद की एसिडिक भाप पित्त बढ़ाती है और हल्की सर्दी में कफ जमा होने लगता है, जिससे जोड़ों का दर्द, एसिडिटी और खांसी-जुकाम जैसी दिक्कतें होती हैं।
क्या मानसून में नॉन वेज खाना सुरक्षित है?
नहीं, क्योंकि इस मौसम की ज्यादा नमी बैक्टीरिया को तेजी से पनपने में मदद करती है और पाचन क्रिया भी धीमी पड़ जाती है, जिससे मांसाहारी भोजन से गंभीर फूड इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
बारिश में सलाद और पत्तेदार सब्जियां क्यों नुकसानदायक हो सकती हैं?
हरी पत्तेदार सब्जियों की नमी में कीड़े और बैक्टीरिया चिपके होते हैं और बाहर बिकने वाले कटे सलाद-जूस पर मक्खियां बैठ सकती हैं, इसलिए हमेशा घर पर ताज़ा कटा सलाद खाना बेहतर है।
मानसून में पेट को स्वस्थ रखने के लिए क्या पीना चाहिए?
हर्बल टी, अदरक का पानी, गरम सूप और सौंफ-जीरे का पानी पीने से पाचन बेहतर रहता है और पेट साफ रहने से इंफेक्शन का खतरा कम होता है।
क्या ठंडा खाना खाने से पाचन पर असर पड़ता है?
हां, मानसून में पाचन शक्ति पहले से ही कमजोर हो जाती है, इसलिए ठंडा खाना ठीक से पच नहीं पाता और पेट से जुड़ी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
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