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मानसून में आंखों की सूजन और जलन को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, डॉक्टर ने बताई बड़ी वजहस्वास्थ्य
17 अग॰ 2026, 8:04 pm (2 घंटे पहले)· 0

मानसून में आंखों की सूजन और जलन को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, डॉक्टर ने बताई बड़ी वजह

मानसून के दौरान आंखों में होने वाली जलन, लालपन या सूजन को मामूली समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह किसी गंभीर संक्रमण का शुरुआती संकेत हो सकता है, इसलिए समय पर डॉक्टर की सलाह बेहद जरूरी है।

बारिश के मौसम में आंखों के संक्रमण और एलर्जी का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस दौरान आंखों का लाल होना, जलन होना, सूजन आना, पानी बहना या चिपचिपापन महसूस होना बहुत आम बात है। बहुत से लोग इन तकलीफों को छोटा समझकर सीधे मेडिकल स्टोर से कोई भी आई ड्रॉप खरीद लेते हैं या खुद ठीक होने का इंतजार करने लगते हैं। डॉक्टर भवाथारिणी एम, जो अग्रवाल आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद एवं रिफ्रैक्टिव सर्जन हैं, का कहना है कि हर बार ऐसा करना बिल्कुल सुरक्षित नहीं होता है। कई स्थितियों में ये शुरुआती लक्षण किसी खतरनाक और गंभीर संक्रमण का बड़ा इशारा हो सकते हैं।

मानसून के मौसम में क्यों बढ़ जाती है आंखों की परेशानियां?

बरसात के दिनों में हवा और पर्यावरण में नमी बहुत अधिक मात्रा में फैल जाती है। इस नमी भरे वातावरण के कारण बैक्टीरिया, वायरस और फंगस बहुत तेजी से पनपने लगते हैं। इसके अलावा चारों तरफ उड़ने वाली धूल, प्रदूषण और हवा में मौजूद कई तरह के एलर्जी पैदा करने वाले कण भी सीधा आंखों पर बुरा असर डालते हैं। यही वजह है कि इस पूरे सीजन के दौरान वायरल कंजंक्टिवाइटिस, तरह-तरह की एलर्जी और कॉर्निया के इंफेक्शन के मामले बहुत ज्यादा देखने को मिलते हैं।

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कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करने वालों को क्यों बरतनी चाहिए विशेष सावधानी?

जो लोग अपनी नजर सुधारने या शौक के लिए कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, उनके लिए यह मौसम और भी ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है। लेंस का जरा सा भी गलत इस्तेमाल इंफेक्शन के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। गंदे हाथों से लेंस को आंख में लगाना, तय समय से ज्यादा देर तक उसे पहने रखना, पुराने सॉल्यूशन को ही दोबारा इस्तेमाल में लाना या फिर लेंस पहनकर ही सो जाना कॉर्निया में बहुत गंभीर संक्रमण पैदा कर सकता है। यदि लेंस लगाने के तुरंत बाद आंखों में तेज दर्द, लाचारी या धुंधलापन महसूस होने लगे, तो बिना किसी देरी के लेंस को बाहर निकाल देना चाहिए और तुरंत किसी नेत्र विशेषज्ञ से अपनी आंखों की जांच करानी चाहिए।

किन लक्षणों के दिखने पर भूलकर भी नहीं करनी चाहिए देरी?

  • आंखों में तेज दर्द होना
  • अचानक से सब कुछ धुंधला दिखाई देना
  • तेज रोशनी में आंखें चुभना
  • पलकों पर या फिर पूरी आंख के हिस्से में अत्यधिक सूजन आ जाना
  • आंखों से पीले या हरे रंग का स्राव निकलना
  • आंखों से लगातार पानी का बहते रहना
  • कॉन्टैक्ट लेंस का उपयोग करने के बाद परेशानी का लगातार बढ़ना

आंखों को संक्रमण से सुरक्षित रखने के आसान उपाय

अपनी आंखों को सुरक्षित रखने के लिए सबसे जरूरी है कि आप बार-बार गंदे हाथों से अपनी आंखों को न छुएं और हाथों की साफ-सफाई का खास ख्याल रखें। इस्तेमाल करने वाले तौलिए, रुमाल, आंखों का मेकअप या फिर आई ड्रॉप्स को कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शेयर न करें। कॉन्टैक्ट लेंस की सफाई का नियमित तौर पर ध्यान रखें और उन्हें समय-सीमा पूरी होने पर ही बदल दें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कभी भी बिना किसी डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड युक्त आई ड्रॉप का इस्तेमाल न करें, क्योंकि ऐसा करने से संक्रमण ऊपर से तो छिप जाता है लेकिन अंदर ही अंदर बीमारी और भी ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है। मानसून के मौसम में आंखों से जुड़ी हर दिक्कत छोटी नहीं होती है। सही समय पर डॉक्टर से जांच कराने और उचित उपचार लेने से अधिकांश संक्रमण पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही से ऐसी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं जिनसे आसानी से बचा जा सकता था।

सवाल-जवाब

मानसून में आंखों की समस्याएं क्यों बढ़ जाती हैं?
बरसात के मौसम में हवा में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं, जिससे आंखों के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
कौन से लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
तेज दर्द, अचानक धुंधला दिखना, प्रकाश से चुभन, अत्यधिक सूजन और पीला या हरा स्राव दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
गंदे हाथों से लेंस न लगाएं, तय समय से ज्यादा देर न पहनें, पुराना सॉल्यूशन उपयोग न करें और लेंस पहनकर न सोएं।
बिना डॉक्टर की सलाह के कौन सी आई ड्रॉप नहीं डालनी चाहिए?
डॉक्टर की सलाह के बिना स्टेरॉयड युक्त आई ड्रॉप का इस्तेमाल कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे संक्रमण छिपकर और गंभीर हो सकता है।
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