अनाज और दालों को अंकुरित करके खाना सेहत के लिए एक बेहद गुणकारी आदत मानी जाती है। जब किसी साबुत अनाज या दाल में अंकुरण की प्रक्रिया होती है, तो उसके भीतर मौजूद विटामिन्स, मिनरल्स, प्रोटीन और फाइबर जैसे तत्वों की मात्रा प्राकृतिक रूप से काफी बढ़ जाती है। इस प्रक्रिया से अनाज न केवल अधिक पौष्टिक बन जाते हैं, बल्कि शरीर के लिए उन्हें पचाना भी तुलनात्मक रूप से ज्यादा सुगम हो जाता है। मूंग, चना, मेथी और लोबिया जैसे कई खाद्य पदार्थों को लोग नियमित तौर पर अंकुरित करके अपनी डाइट में शामिल करते हैं। हालांकि, इन अनाजों की पौष्टिकता का पूरा लाभ शरीर को तभी मिल पाता है जब इनके सेवन का समय और तरीका पूरी तरह सही हो।
सुबह के समय नाश्ते में सेवन सबसे अधिक गुणकारी
अंकुरित अनाज खाने के लिए दिन का शुरुआती पहर यानी सुबह का वक्त सबसे श्रेष्ठ माना गया है। दिन की शुरुआत में जब आप नाश्ते की थाली में अंकुरित अनाज शामिल करते हैं, तो शरीर को दिनभर के कामकाज के लिए जरूरी ऊर्जा प्राप्त होती है और सुस्ती की जगह ताजगी बनी रहती है। स्प्राउट्स में प्रचुर मात्रा में मौजूद पोषक तत्व शरीर की दैनिक आवश्यकताओं को सुचारू रूप से पूरा करने का काम करते हैं।
सुबह के समय खाली पेट अथवा बहुत ही हल्के नाश्ते के रूप में अंकुरित मूंग या काले चने का सेवन करना विशेष रूप से फायदेमंद होता है। इस आदत से सुस्त पड़ा पाचन तंत्र सक्रिय हो जाता है और भोजन में मौजूद जरूरी तत्व आंतों द्वारा तेजी से अवशोषित कर लिए जाते हैं।
व्यायाम के बाद मांसपेशियों की रिकवरी में मददगार
जो लोग रोजाना कसरत, जिम या योग करते हैं, उनके लिए वर्कआउट समाप्त करने के बाद स्प्राउट्स खाना एक बेहतरीन विकल्प साबित होता है। कसरत के दौरान मांसपेशियों के ऊतकों पर जो खिंचाव और दबाव पड़ता है, उसकी भरपाई के लिए प्रोटीन की सख्त जरूरत होती है। अंकुरित अनाजों में मौजूद प्राकृतिक प्रोटीन मांसपेशियों की मरम्मत और रिकवरी की गति को तेज करता है। यदि आप स्प्राउट्स में हल्का सलाद और थोड़ा सा नींबू का रस निचोड़ लें, तो इससे न सिर्फ इसका स्वाद लाजवाब हो जाता है बल्कि शरीर को अतिरिक्त एंटीऑक्सीडेंट्स भी मिल जाते हैं।
रात के भोजन में स्प्राउट्स खाने से क्यों करें परहेज
यद्यपि अंकुरित अनाज बेहद पौष्टिक होते हैं, परंतु देर शाम या रात के समय इन्हें खाने से बचने का सुझाव दिया जाता है। इसका मुख्य कारण इनमें अत्यधिक मात्रा में मौजूद रफेज यानी फाइबर है। रात के वक्त मानव शरीर की चयापचय और पाचन क्रिया स्वाभाविक रूप से धीमी पड़ जाती है। ऐसे समय में भारी मात्रा में फाइबर पेट में जाने से कई लोगों को गैस बनने, पेट फूलने, भारीपन और अपच जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से स्प्राउट्स का सेवन हमेशा दिन की रोशनी में करना बेहतर रहता है।
तैयार करने की सही विधि और सीमित मात्रा
अंकुरित अनाज को और अधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाने के लिए इसमें बारीक कटा हुआ प्याज, खीरा, टमाटर, हरी धनिया पत्ती और नींबू का रस मिलाया जा सकता है। जिन लोगों की पाचन शक्ति थोड़ी कमजोर है या जिन्हें कच्चा अनाज खाने से असुविधा होती है, वे इसे हल्का सा उबालकर या भाप में स्टीम करके खा सकते हैं। स्टीम करने से पोषक तत्व भी सुरक्षित रहते हैं और पेट पर अनावश्यक दबाव भी नहीं पड़ता है।
मात्रा के संदर्भ में यह ध्यान रखना जरूरी है कि एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए प्रतिदिन एक छोटी कटोरी अंकुरित अनाज खाना पूरी तरह पर्याप्त होता है। स्वाद या ज्यादा पोषण के चक्कर में बहुत अधिक मात्रा में स्प्राउट्स खाने से पाचन तंत्र बिगड़ सकता है। संतुलित और नियंत्रित खुराक ही शरीर को अधिकतम आरोग्य प्रदान करती है।



















