उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाकों में मानसूनी बारिश और बाढ़ की स्थिति बनते ही सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी हैं। लगातार मूसलाधार बारिश और चारों तरफ जलभराव होने के कारण जमीन के अंदर बने सांपों के प्राकृतिक बिल पूरी तरह पानी से लबालब भर जाते हैं। ऐसी विषम परिस्थिति में अपनी जान बचाने और सूखे, सुरक्षित ठिकाने की तलाश में सांप बाहर निकलने के लिए मजबूर हो जाते हैं। बाहर निकलते ही वे खेतों की मेड़ों, इंसानी घरों के आसपास, मवेशियों को बांधने वाले बाड़ों, घरों में रखी लकड़ियों के चट्टे, कबाड़ या कूड़े के ढेरों और जलमग्न रास्तों की ओर रुख करते हैं। इसी आवाजाही के दौरान अचानक इंसानों और मवेशियों का आमना-सामना इन सांपों से हो जाता है, जिससे डसने के मामले सामने आ रहे हैं।
बिजुआ स्वास्थ्य केंद्र में 15 दिनों के भीतर पहुंचे 9 पीड़ित
जिले के बिजुआ क्षेत्र में बरसात के इस दौर में लगातार लोग सर्पदंश का शिकार हो रहे हैं। स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिजुआ में बीते करीब 15 दिनों के भीतर ही सांप के डसने से प्रभावित 9 लोग उपचार कराने के लिए पहुंच चुके हैं। मरीजों की इस बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग जमीनी स्तर पर सक्रिय है और ग्रामीणों को लगातार सचेत कर रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा लोगों को समझाया जा रहा है कि ऐसी स्थिति में किसी भी तरह का डर या घबराहट पैदा करने के बजाय केवल मरीज को तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
हर सांप विषैला नहीं होता, लेकिन चिकित्सकीय जांच जरूरी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिजुआ में पदस्थ चिकित्सक डॉ. नसीमुद्दीन के अनुसार प्रकृति में पाई जाने वाली सांपों की हर प्रजाति जहरीली नहीं होती है। कई प्रजातियों के सांप पूरी तरह विषहीन होते हैं, लेकिन किसी आम व्यक्ति के लिए केवल देखकर यह तय करना संभव नहीं होता कि डसने वाला जीव विषैला था या नहीं। चिकित्सीय जांच और डॉक्टर की निगरानी के बिना यह मान बैठना कि सांप जहरीला नहीं था, मरीज के लिए जानलेवा जोखिम साबित हो सकता है। चिकित्सक के अनुसार यदि जहरीला सांप भी काट ले, तो भी आधुनिक चिकित्सा पद्धति और सही समय पर उपलब्ध एंटी-वेनम उपचार से व्यक्ति की जिंदगी पूरी तरह बचाई जा सकती है।
झाड़-फूंक के अंधविश्वास में न गंवाएं शुरुआती कीमती समय
चिकित्सक ने इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी जन-जागरूकता की कमी के चलते लोग वैज्ञानिक उपचार अपनाने से बचते हैं। डसने की घटना होते ही कई परिजन मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक करने वाले तांत्रिकों या पारंपरिक ओझाओं के पास ले जाकर बहुमूल्य शुरुआती समय बर्बाद कर देते हैं। उपचार मिलने में होने वाली यही अनावश्यक देरी विष को शरीर में पूरी तरह फैलने का मौका देती है, जिससे मरीज की हालत तेजी से बिगड़ जाती है और मामला गंभीर हो जाता है।
सांप डसने पर तुरंत क्या कदम उठाएं और क्या सावधानियां बरतें
सर्पदंश की घटना घटते ही सबसे महत्वपूर्ण काम यह है कि पीड़ित व्यक्ति को बिल्कुल शांत रखा जाए और किसी भी स्थिति में घबराने न दिया जाए। अत्यधिक घबराहट, चीख-पुकार या भागदौड़ करने से दिल की धड़कन और रक्त का संचार काफी तेज हो जाता है, जिससे शरीर में जहर के फैलने की रफ्तार भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाती है। मरीज को स्थिर अवस्था में रखते हुए बिना वक्त गंवाए सीधे निकटतम चिकित्सा केंद्र ले जाएं। इसके अलावा ग्रामीण रात के समय घरों से निकलते वक्त मोबाइल की टॉर्च या सामान्य रोशनी का सहारा अवश्य लें। अंधेरे रास्तों पर नंगे पैर चलने की भूल बिल्कुल न करें और खेतों, घनी झाड़ियों तथा जलभराव वाली जगहों पर कदम रखते हुए विशेष सतर्कता बरतें। साथ ही घरों के पास लकड़ी, घास-फूस, ईंट या कबाड़ लंबे समय तक जमा न रहने दें, क्योंकि यही जगहें सांपों की सबसे मुफीद छिपने की जगह बन जाती हैं।



















