खराब खानपान, अनियंत्रित दिनचर्या और शारीरिक निष्क्रियता के चलते मौजूदा दौर में हृदय संबंधी जटिलताएं तेजी से पैर पसार रही हैं। बुजुर्गों के साथ ही युवा और बच्चे भी दिल के दौरे और अन्य गंभीर समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं। इस चिंताजनक परिदृश्य में दिल को तंदुरुस्त बनाए रखने के लिए रोजाना के वर्कआउट और शारीरिक श्रम का एक व्यवस्थित पैमाना समझना बेहद आवश्यक हो गया है।
साप्ताहिक कसरत का मानक पैमाना और समय सीमा
फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग में इंटरवेंशन कार्डियोलॉजी और हार्ट फेलियर प्रोग्राम की अतिरिक्त निदेशक डॉ. राशि खरे के अनुसार दिल की मजबूती के लिए नियमित शारीरिक सक्रियता अनिवार्य शर्त है। एक स्वस्थ वयस्क को प्रत्येक हफ्ते न्यूनतम 150 मिनट का शारीरिक व्यायाम अवश्य करना चाहिए। इस समय को 5 दिनों में विभाजित करके रोजाना लगभग 30 मिनट का समय निकाला जा सकता है। जिन लोगों के पास अतिरिक्त समय उपलब्ध हो, वे अपने वर्कआउट की अवधि को बढ़ाकर 300 मिनट प्रति सप्ताह तक भी ले जा सकते हैं।
शारीरिक गतिविधियों के आसान और प्रभावी विकल्प
दिल को एक्टिव रखने के लिए बहुत जटिल या अत्यधिक भारी एक्सरसाइज करना ही एकमात्र रास्ता नहीं है। कई सामान्य और मनोरंजक गतिविधियों को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाया जा सकता है
- तेज चलना और हल्की जॉगिंग: शुरुआत करने वाले लोगों के लिए रोजाना 20 से 30 मिनट की ब्रिस्क वॉक दिल की धड़कन और रक्त संचार को सुधारने का सबसे सुरक्षित साधन है।
- साइकिलिंग और तैराकी: साइकिल चलाना और स्विमिंग शरीर की प्रमुख मांसपेशियों के साथ दिल की कार्यक्षमता को भी मजबूती देते हैं।
- डांस और एरोबिक्स: संगीत के साथ नाचना भी एरोबिक व्यायाम का एक शानदार रूप है, जो हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखता है।
- बैठने के समय में कटौती: घंटों एक ही जगह बैठे रहने की आदत दिल के लिए नुकसानदेह साबित होती है, इसलिए काम के बीच-बीच में कुछ मिनट उठकर टहलना बेहद लाभकारी है।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और पहले से बीमार व्यक्तियों के लिए जरूरी सावधानियां
व्यायाम की कुल अवधि के अलावा सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसकी निरंतरता बनाए रखना है। एरोबिक एक्टिविटी के साथ-साथ हफ्ते में 2 दिन हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी शामिल की जा सकती है। इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं और शरीर की समग्र फिटनेस में उल्लेखनीय सुधार दर्ज होता है।
हालांकि, जिन व्यक्तियों को पहले से हृदय रोग, सांस फूलने की शिकायत, सीने में दर्द, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उन्हें कोई भी नया वर्कआउट शेड्यूल अपनाने से पहले चिकित्सीय परामर्श अनिवार्य रूप से लेना चाहिए। इसके अलावा, एक्सरसाइज करते समय यदि सीने में दर्द उठे, असामान्य रूप से सांस फूले, चक्कर आए या अचानक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत गतिविधि रोककर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अंततः बहुत ज्यादा कठिन वर्कआउट करने की तुलना में निरंतर सक्रिय रहना दिल के लिए कहीं अधिक असरदार और दीर्घकालिक सुरक्षा कवच साबित होता है।



















