मां बनने के बाद महिलाओं के शरीर और दिनचर्या में व्यापक बदलाव आते हैं, जिसके चलते वजन संतुलित करना और पुरानी फिटनेस हासिल करना एक बड़ा काम बन जाता है। हाल ही में दो महीने पहले बेटे वेद को जन्म देने वाली अभिनेत्री करिश्मा तन्ना ने अब धीरे-धीरे अपने नियमित फिटनेस रूटीन में लौटना शुरू कर दिया है। उन्होंने अपने नए अनुभवों को सामने रखते हुए यह स्पष्ट किया कि किस तरह अपनी रोजमर्रा की व्यस्तताओं के बीच खुद के लिए थोड़ा वक्त निकालना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
मातृत्व के साथ दिनचर्या में संतुलन बनाने की कोशिश
करिश्मा तन्ना ने मातृत्व के शुरुआती दिनों की चुनौतियों पर बात करते हुए बताया कि एक बच्चे के आने से पूरी दिनचर्या बदल जाती है। सोने के समय से लेकर खाने-पीने के घंटों तक, हर गतिविधि में बदलाव आ जाता है। ऐसे हालात में सबसे बड़ी चुनौती खुद के लिए वक्त तलाशने और जीवन के नए नियमों के साथ तालमेल बिठाने की होती है। उन्होंने दिखाया कि तमाम बदलावों के बावजूद उन्होंने जिम जाकर खुद पर ध्यान देना शुरू किया है ताकि वे अंदरूनी ताकत और ताजगी महसूस कर सकें।
जिम सेशन में शामिल रहीं ये खास एक्सरसाइज
अपने कसरत सत्र के दौरान करिश्मा तन्ना ने फिटनेस की शुरुआत स्पिन बाइक पर वार्मअप और कार्डियो से की। शरीर की सहनशक्ति और ताकत बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने अपने वर्कआउट में रिंग रो और डंबल एक्सरसाइज को जगह दी। इसके साथ ही उन्होंने वेटेड वॉल सिट किया, जिसमें दीवार के सहारे बैठकर हाथों में वजन संभालना होता है। उन्होंने अपने सत्र में पावर वर्कआउट को भी शामिल किया ताकि मांसपेशियों की सक्रियता और मजबूती वापस आ सके। पसीना बहाने के बाद उन्होंने एक गिलास आइस्ड कॉफी का आनंद लेकर खुद को तरोताजा और रिलैक्स किया।
पोस्टपार्टम डिप्रेशन और अपराधबोध से बचने की सलाह
कसरत के अलावा करिश्मा तन्ना ने मातृत्व के बाद होने वाले पोस्टपार्टम दौर और उससे जुड़ी मानसिक परेशानियों पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि प्रसव के बाद महिलाओं को गंभीर भावनात्मक उतार-चढ़ाव और पोस्टपार्टम डिप्रेशन का सामना करना पड़ता है। नई माताओं को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे समय में खुद को किसी बात के लिए दोषी नहीं ठहराना चाहिए और न ही मन में कोई अपराधबोध पालना चाहिए। उनका मानना है कि एक मां अपने और अपने बच्चे के भले के लिए जो भी कदम उठाती है, वह सही होता है, क्योंकि जब मां खुश और तनावमुक्त रहेगी, तभी बच्चा भी खुशहाल और स्वस्थ रह सकेगा।



















