सर्दियों के दिनों में गरमा-गरम खाना खाने के बाद आमतौर पर लोग राहत और गर्माहट की उम्मीद करते हैं, लेकिन कई बार ठीक इसके उलट अनुभव होता है. थाली खत्म होते ही अचानक शरीर में ठिठुरन बढ़ने लगती है और कंपकंपी छूटने लगती है. सामान्य समझ के मुताबिक भोजन से शरीर को ऊर्जा और आंतरिक ताप मिलना चाहिए, मगर कुछ खास शारीरिक परिस्थितियों और खानपान की आदतों के चलते शरीर का तापमान गिरता हुआ महसूस होता है. इसके मूल में हमारे शरीर की पाचन प्रक्रिया, नसों में दौड़ते खून का बहाव और भोजन का चयन शामिल है.
पाचन तंत्र की ओर रक्त संचार का रुख
जैसे ही हम भोजन ग्रहण करते हैं, हमारा पूरा पाचन तंत्र उसे पचाने और उसमें मौजूद जरूरी पोषक तत्वों को सोखने के काम में पूरी ताकत से जुट जाता है. इस जटिल काम को पूरा करने के लिए शरीर का ज्यादातर रक्त प्रवाह पेट, आंतों और अंदरूनी अंगों की ओर केंद्रित हो जाता है. जब खून का एक बड़ा हिस्सा पाचन क्रिया को संभालने में लग जाता है, तो हाथ, पैर और बाहरी त्वचा जैसे छोरों में रक्त संचार कुछ देर के लिए धीमा पड़ जाता है. चूंकि त्वचा और हाथ-पैरों तक गर्म खून की आपूर्ति कम हो जाती है, इसलिए बाहरी ठंड का असर तुरंत महसूस होने लगता है और हाथ-पैर बर्फ जैसे ठंडे पड़ जाते हैं.
भोजन पचाने में ऊर्जा की खपत और कैलोरी का गणित
खाना पचाने की जैविक प्रक्रिया में शरीर को अपनी पहले से संचित ऊर्जा भी खर्च करनी पड़ती है. हालांकि पाचन के दौरान शरीर में कुछ ताप भी बनता है, लेकिन अगर आपने बहुत हल्का, रूखा या कम कैलोरी वाला खाना खाया है, तो उससे बनने वाली आंतरिक ऊष्मा बहुत कम रह जाती है. जब ऊर्जा की खपत अधिक हो और मिलने वाली कैलोरी कम, तब शरीर अपने तापमान को संतुलित नहीं रख पाता और आसपास मौजूद शीतल मौसम का प्रभाव अचानक हावी हो जाता है.
खानपान का तापमान और भोजन के प्रकार का असर
सर्दियों के मौसम में भोजन की प्रकृति बहुत मायने रखती है. यदि आप कड़ाके की ठंड में फ्रिज से निकला ठंडा खाना, कच्चा सलाद, दही या ठंडे पेय पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं, तो आंतरिक तापमान कुछ समय के लिए तेजी से नीचे आ जाता है. इसके बिल्कुल विपरीत, अगर थाली में ताजा गर्म सूप, दलिया, अदरक वाली चाय और भरपूर प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल किए जाएं, तो वे शरीर को भीतर से निरंतर गर्म रखने में प्रभावी भूमिका निभाते हैं.
ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव और कमजोरी
कुछ लोगों के शरीर में भोजन करने के पश्चात ब्लड शुगर का स्तर बहुत तेजी से ऊपर जाता है और फिर उतनी ही रफ्तार से नीचे गिर जाता है. शर्करा के स्तर में इस आकस्मिक गिरावट के कारण व्यक्ति को सुस्ती, मांसपेशियों में कमजोरी और तेज ठंड लगने का अहसास होने लगता है. जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या है या जिनका ब्लड शुगर बार-बार लो होता है, उनके साथ खाना खाने के बाद यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है.
ठिठुरन से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
शीत ऋतु में इस असहज ठिठुरन से बचने के लिए कुछ बुनियादी आदतों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना बेहद मददगार साबित होता है
- हमेशा ताजा तैयार किया हुआ और अच्छी तरह गर्म भोजन ही ग्रहण करें.
- अपनी रोजमर्रा की थाली में प्रोटीन, साबुत अनाज और स्वस्थ वसा को अनिवार्य रूप से शामिल करें.
- बहुत अधिक ठंडी तासीर वाली चीजों, ठंडे पेय और बासी भोजन के सेवन से पूरी तरह परहेज करें.
- भोजन समाप्त करते ही तुरंत खुली ठंडी हवा या बाहर के ठंडे वातावरण में निकलने से बचें.
- दिनभर पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पीते रहें और शरीर को सक्रिय बनाए रखें ताकि रक्त संचार दुरुस्त रहे.



















