दैनिक जीवन में भोजन करते समय या सामान्य बातचीत के दौरान अचानक हिचकी शुरू होना एक बेहद आम अनुभव है। कई बार बिना किसी स्पष्ट कारण के कुछ मिनटों तक यह सिलसिला चलता रहता है और फिर अपने आप शांत भी हो जाता है। शरीर विज्ञान के दृष्टिकोण से देखें तो हिचकी कोई खराबी नहीं, बल्कि हमारे श्वसन तंत्र से जुड़ी एक अनियंत्रित और अनैच्छिक शारीरिक प्रतिक्रिया है, जिसमें तंत्रिकाएं और श्वसन मांसपेशियां एक साथ सक्रिय होती हैं।
डायफ्राम और वोकल कॉर्ड्स के तालमेल से निकलती है आवाज
हमारे सीने में फेफड़ों के ठीक नीचे गुंबद के आकार की एक प्रमुख मांसपेशी मौजूद होती है, जिसे शरीर रचना विज्ञान में डायफ्राम कहा जाता है। जब हम सामान्य रूप से सांस भीतर खींचते हैं, तो यह मांसपेशी नीचे की तरफ सिकुड़ती है, ताकि फेफड़ों को फैलने और ताजी हवा भरने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके। यह पूरी प्रक्रिया शांत और लयबद्ध तरीके से चलती रहती है।
हिचकी की स्थिति में डायफ्राम अचानक अपनी सामान्य लय खो देता है और तेजी से अनैच्छिक रूप से सिकुड़ जाता है। मांसपेशी के इस तीव्र झटके के तुरंत बाद हमारे गले में स्थित ग्लॉटिस, यानी वोकल कॉर्ड्स के बीच का वायु मार्ग, अचानक बहुत तेजी से बंद हो जाता है। अंदर आने वाली हवा के अचानक इस अवरोध से टकराने के कारण गले से विशिष्ट ‘हिक’ की ध्वनि उत्पन्न होती है।
किन वजहों से सक्रिय हो सकता है यह रिफ्लेक्स
शरीर में हिचकी शुरू करने के कई सामान्य और रोजमर्रा के ट्रिगर जिम्मेदार हो सकते हैं। बहुत तेजी से भोजन निगलना या सामान्य से अधिक मात्रा में खाना खाने से पेट पूरी तरह भर जाता है। अत्यधिक भरा हुआ पेट डायफ्राम के निचले हिस्से पर दबाव डालता है, जिससे उसमें उत्तेजना पैदा होती है।
इसके अतिरिक्त, तापमान में अचानक बदलाव, जैसे अत्यधिक गर्म या एकदम ठंडा पेय पदार्थ पीना, भी संवेदनशील तंत्रिकाओं को उत्तेजित कर सकता है। कार्बोनेटेड पेय पदार्थों में मौजूद गैस, शराब का अत्यधिक सेवन, बहुत जोर से हंसना या अत्यधिक उत्साह के दौरान श्वसन के तरीके में होने वाले त्वरित बदलाव भी इस अनैच्छिक खिंचाव को शुरू कर देते हैं। प्रत्येक व्यक्ति के शरीर की संवेदनशीलता अलग होती है, इसलिए कई मामलों में कोई स्पष्ट ट्रिगर पहचाने बिना भी यह प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
बिना किसी दवा के अपने आप कैसे रुक जाती है प्रक्रिया
अधिकांश मामलों में हिचकी कुछ ही मिनटों में अपने आप बंद हो जाती है। इस रिफ्लेक्स चक्र में केवल डायफ्राम ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी तंत्रिकाएं और मस्तिष्क के नियंत्रण केंद्र भी शामिल होते हैं। जैसे ही तंत्रिका तंत्र से मिलने वाले उत्तेजक संकेत शांत होते हैं, डायफ्राम की ऐंठन समाप्त हो जाती है। इसके शांत होते ही फेफड़ों और वोकल कॉर्ड्स की कार्यप्रणाली फिर से अपनी सामान्य गति में लौट आती है और आवाज बंद हो जाती है।
लगातार बनी रहने वाली हिचकी पर कब जरूरी है डॉक्टरी सलाह
आमतौर पर थोड़ी देर चलने वाली सामान्य हिचकी स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल भी नुकसानदेह नहीं होती है। हालांकि, यदि हिचकी लगातार कई घंटों या दिनों तक बनी रहे, बार-बार गंभीर रूप से लौटे, अथवा नियमित भोजन करने, चैन की नींद लेने और सामान्य सांस लेने में गंभीर बाधा डालने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
लंबे समय तक खिंचने वाली हिचकी किसी अंदरूनी बीमारी, तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ी या किसी खास दवा के प्रभाव से जुड़ी हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में घरेलू टोटकों अथवा नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय योग्य चिकित्सक से विधिवत परामर्श लेकर मूल कारण की जांच कराना आवश्यक होता है।



















