कम उम्र में बच्चों का तेजी से बढ़ता वजन आजकल परिवारों के लिए एक गंभीर चिंता बनता जा रहा है। बच्चों की दिनचर्या में शारीरिक श्रम की भारी कमी, बाहर मिलने वाले जंक फूड का अधिक सेवन, देर रात तक जागना और मोबाइल या टेलीविजन के सामने घंटों समय बिताना इस परेशानी को बढ़ावा दे रहे हैं। कई बार माता-पिता घबराकर बच्चों को सख्त डाइटिंग पर डाल देते हैं या तुरंत दवाओं का सहारा लेने लगते हैं, लेकिन ऐसा कदम उनकी सेहत पर उल्टा असर डाल सकता है। वजन को सुरक्षित तरीके से संतुलित करने के लिए जीवनशैली के मूल कारणों को समझना और उन्हें धीरे-धीरे सुधारना कहीं अधिक जरूरी होता है।
शारीरिक सक्रियता की कमी और स्क्रीन देखते हुए खाना खाने की आदत
बच्चों में लगातार बढ़ रहे वजन की सबसे प्रमुख वजह उनकी घटती शारीरिक गतिविधि है। मैदान में दौड़ने-भागने और खेलने के बजाय बच्चे अब अपना अधिकांश समय एक ही जगह बैठकर स्क्रीन देखने में बिताते हैं। इसी के साथ बाहर मिलने वाले तले-भुने और प्रोसेस्ड भोजन का चलन भी तेजी से बढ़ा है, जिससे शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा होने लगती है।
इसके अलावा, भोजन करते समय मोबाइल फोन या टीवी स्क्रीन देखना भी बच्चों के स्वास्थ्य को गहरा नुकसान पहुंचाता है। जब बच्चा स्क्रीन पर नजरें गड़ाकर खाना खाता है, तो उसका ध्यान भोजन की मात्रा और भूख के अहसास पर नहीं रहता। इस वजह से वह जरूरत से ज्यादा खा लेता है और शरीर के स्वाभाविक तृप्ति संकेतों को समझ नहीं पाता, जो आगे चलकर मोटापे का मुख्य कारण बनता है। फरीदाबाद स्थित एकॉर्ड हॉस्पिटल की आयुर्वेदिक डॉक्टर अनु शर्मा ने बताया कि आजकल बच्चों की शारीरिक गतिविधियां बहुत कम हो चुकी हैं और बाहर का खाना काफी बढ़ गया है, जिससे मोटापे की समस्या तेजी से सामने आ रही है।
जंक फूड पर पूर्ण पाबंदी के बजाय तय करें निश्चित सीमा
अत्यधिक जंक फूड बच्चों के पाचन और समग्र स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहद हानिकारक साबित होता है। हालांकि, बच्चों को किसी चीज से पूरी तरह जबरन रोक देना अक्सर उनमें उसी चीज की तलब को और बढ़ा देता है। इसलिए बेहतर तरीका यह है कि उनके लिए एक संतुलित दायरा निर्धारित किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को लगभग 15 दिनों में एक बार सीमित मात्रा में जंक फूड खाने की छूट दी जा सकती है। इस तरह खानपान की आदतों को अनुशासित और संतुलित रखते हुए बच्चे को अस्वास्थ्यकर आदतों से धीरे-धीरे दूर रखा जा सकता है। घर पर बना पौष्टिक और ताजा भोजन नियमित प्राथमिकता में रहना चाहिए।
सूर्य नमस्कार और वज्रासन जैसे योगाभ्यास की उपयोगिता
शरीर को सक्रिय रखने और अतिरिक्त चर्बी घटाने के लिए आयुर्वेद में नियमित योग और ध्यान को विशेष महत्व दिया जाता है। बच्चों के लिए सूर्य नमस्कार का अभ्यास बेहद गुणकारी माना गया है। बच्चे प्रतिदिन लगभग 10 से 12 बार सूर्य नमस्कार का अभ्यास कर सकते हैं, जिससे पूरे शरीर की मांसपेशियों का खिंचाव होता है और ऊर्जा का स्तर बढ़ता है।
इसके साथ ही वज्रासन का अभ्यास भी बच्चों के पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है। वज्रासन की विशेषता यह है कि इसे भोजन करने के तुरंत बाद भी आराम से किया जा सकता है। यह मुद्रा पाचन क्रिया को सुगम बनाती है और शरीर में वसा संचय की गति को धीमा करने में सहायता करती है।
सख्त डाइटिंग से परहेज और संतुलित भोजन पर जोर
हर मोटे बच्चे को सीधे डाइटिंग पर डाल देना किसी भी तरह से उचित समाधान नहीं है। सबसे पहले बच्चे की भोजन संबंधी आदतों, उसके खाने के समय और मात्रा पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। थाली में क्या परोसा जा रहा है, बच्चा कितनी बार खा रहा है और कितनी मात्रा ले रहा है, इसका संतुलन बनाना ही सबसे पहला कदम होना चाहिए।
मैदा और उससे बनी चीजें बच्चों की आंतों और वजन पर बुरा असर डालती हैं, इसलिए भोजन में मैदे का इस्तेमाल न्यूनतम होना चाहिए। प्रतिदिन की थाली में हरी सब्जियां, सलाद, दालें और पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार शामिल किया जाना चाहिए। जब पौष्टिक खानपान के साथ नियमित खेलकूद और शारीरिक सक्रियता जुड़ती है, तो वजन अपने आप नियंत्रित होने लगता है।
मोटापे से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं और मानसिक तनाव
मोटापा सिर्फ बाहरी शारीरिक बनावट का मामला नहीं है, बल्कि यह बच्चों के शरीर में कई गंभीर रोगों का जोखिम पैदा करता है। वजन अधिक होने से छोटी बच्चियों में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी पीसीओएस का खतरा काफी बढ़ जाता है और हार्मोनल असंतुलन की शिकायतें सामने आने लगती हैं।
इसके अतिरिक्त, कम उम्र में ही टाइप-2 डायबिटीज जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। शारीरिक परेशानियों के साथ-साथ यह समस्या बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, उनके आत्मविश्वास और सामाजिक जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है।
वजन को संतुलित रखने में पर्याप्त नींद का महत्व
बच्चों के शारीरिक विकास और हार्मोनल संतुलन को दुरुस्त रखने में समय पर सोने की आदत सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बच्चों को रात करीब 10 बजे तक बिस्तर पर चले जाना चाहिए और सुबह लगभग 6 बजे जागने की दिनचर्या अपनानी चाहिए।
देर रात तक जागने और अधूरी नींद लेने से शरीर की जैविक घड़ी और भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन बाधित हो जाते हैं। नींद की कमी से मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ता है और वजन तेजी से बढ़ने लगता है। स्वस्थ वजन और तंदुरुस्ती बनाए रखने के लिए बच्चों को समय पर पर्याप्त और गहरी नींद मिलना अनिवार्य है।



















