अमेरिकी डॉलर की मजबूती के आगे ब्रिटिश पाउंड दबाव में, 1.3200 के स्तर पर टिकारोजमर्रा के खाने में लाएं हरियाणवी स्वाद, मिनटों में बनाएं देसी आलू बैंगन की मसालेदार सब्जीहेयरफॉल पर ब्रेक लगाने और मजबूत जड़ों के लिए अपनी दिनचर्या में जोड़ें ये बुनियादी उपायपीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालमाता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा के लिए घर में रखें ये चार पवित्र वस्तुएं, वास्तु में माना जाता है कल्याणकारीमुंबई में माधुरी दीक्षित का आशियाना: डांस स्टूडियो, हरियाली और संगीत से सजा खूबसूरत घरवजन बढ़ने पर बच्चों को डाइटिंग कराने के बजाय बदलें दिनचर्या, डॉक्टर ने बताए बचाव के प्रभावी तरीकेजापान की वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा ने बैंक ऑफ जापान की ब्याज दर वृद्धि का किया बचाव, मुद्रास्फीति लक्ष्य को बताया मुख्य वजहएम्स जोधपुर में जूनियर डॉक्टर की मौत के बाद हड़ताल, बंद रही ओपीडी और टलीं 80 सर्जरीसरगुजा में स्ट्रॉबेरी की बागवानी से तगड़े मुनाफे की उम्मीद, समझिए रोपाई से लेकर आमदनी का पूरा गणित
सरगुजा के गांव में मिट्टी के चूल्हे पर पकती है लेमनग्रास की लाल चाय, रामअवतार यादव ने सहेजी पुरखों की परंपराछत्तीसगढ़
25 सित॰ 2026, 7:53 am (15 मिनट पहले)· 0

सरगुजा के गांव में मिट्टी के चूल्हे पर पकती है लेमनग्रास की लाल चाय, रामअवतार यादव ने सहेजी पुरखों की परंपरा

सरगुजा के 55 वर्षीय रामअवतार यादव बिना दूध और बिना रसोई गैस के मिट्टी के चूल्हे पर ताजी लेमनग्रास से खास लाल चाय तैयार कर रहे हैं, जिसका पारंपरिक तरीका उन्होंने अपने पूर्वजों से सीखा है।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के एक ग्रामीण इलाके में 55 वर्षीय रामअवतार यादव अपनी अनूठी पारंपरिक चाय के जरिए खानपान की पुरानी संस्कृति को जीवित रखे हुए हैं। आधुनिक शहरों में मिलने वाली दूध वाली चाय के मुकाबले यह पेय पूरी तरह प्राकृतिक और सादगी से भरपूर है। इसे बनाने के लिए न तो एलपीजी गैस का इस्तेमाल किया जाता है और न ही दूध का, बल्कि यह मिट्टी के पारंपरिक चूल्हे पर धीमी आंच में तैयार होने वाली लाल चाय है। इसे स्वाद, सेहत और मानसिक सुकून का बेहतरीन तालमेल माना जा रहा है, जिसकी सोंधी महक आसपास के लोगों को काफी आकर्षित करती है।

ताजी पत्तियों को हाथों से मसलकर पकाने की विधि

इस देहाती पेय को तैयार करने की प्रक्रिया बेहद सरल और प्राकृतिक है। रामअवतार यादव के मुताबिक, सबसे पहले बगीचे या खेत से ताजी लेमनग्रास की हरी पत्तियां तोड़ी जाती हैं। आवश्यकता अनुसार बर्तन में पानी लेकर इन पत्तियों को हाथों से हल्का रगड़ा जाता है, जिससे उनका प्राकृतिक रस और सुगंध पानी में आसानी से घुल सके। इसके बाद मिश्रण को लकड़ी के चूल्हे पर चढ़ाकर लगभग 10 मिनट तक अच्छी तरह खौलाया जाता है। कड़क स्वाद चाहने वाले लोग इसमें चुटकी भर चायपत्ती और थोड़ा अदरक भी मिला सकते हैं, हालांकि अदरक न होने पर भी लेमनग्रास का अपना तीखा और ताजा स्वाद चाय को खास बना देता है।

ये भी पढ़ें

मिट्टी के चूल्हे की आंच और सोंधापन

आधुनिक रसोइयों में गैस स्टोव पर बनने वाले काढ़ों की तुलना में चूल्हे पर पकी इस चाय का अनुभव काफी अलग होता है। रामअवतार यादव का स्पष्ट कहना है कि लकड़ी की आग और मिट्टी के चूल्हे की धीमी तपिश पत्तियों के अर्क को गहराई से बाहर निकालती है। चूल्हे से उठने वाला हल्का धुआं और मिट्टी की सोंधी खुशबू इस चाय में एक खास देसी स्वाद जोड़ देती है, जो गैस पर पकाने से कभी हासिल नहीं हो सकता।

पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही पारिवारिक सीख

यह अनोखा नुस्खा किसी आधुनिक कुकिंग किताब या इंटरनेट से नहीं लिया गया है। 55 साल के रामअवतार यादव ने यह हुनर अपने घर के बड़े-बुजुर्गों को देखकर सीखा था। उनके परिवार के पूर्वज रोजमर्रा के जीवन में इसी तरह लेमनग्रास की ताजी पत्तियों को उबालकर खुद पीते थे और परिजनों को भी पिलाते थे। परिवार की यही अनमोल परंपरा अब पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही है। उनका मानना है कि दूध रहित यह साधारण लाल चाय पेट के लिए बहुत हल्की होती है और दिनभर की थकान मिटाने में बेहद असरदार साबित होती है।

सवाल-जवाब

सरगुजा में लेमनग्रास की देसी चाय कौन बना रहा है?
सरगुजा के एक गांव में 55 वर्षीय रामअवतार यादव यह खास देसी चाय तैयार कर रहे हैं।
इस चाय को पकाने के लिए किस प्रकार के चूल्हे का उपयोग किया जाता है?
यह चाय गैस स्टोव के बजाय मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी की आंच पर पकाई जाती है।
लेमनग्रास चाय को कितनी देर तक उबाला जाता है?
पत्तियों को हाथ से मसलकर पानी में डालने के बाद इसे लगभग 10 मिनट तक अच्छी तरह खौलाया जाता है।
क्या इस चाय को बनाने में दूध का इस्तेमाल किया जाता है?
नहीं, इसमें दूध का बिल्कुल भी उपयोग नहीं होता और इसे हल्की लाल चाय के रूप में बनाया जाता है।
रामअवतार यादव ने इस चाय को बनाने का तरीका कहां से सीखा?
उन्होंने यह पारंपरिक तरीका किसी आधुनिक माध्यम से नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों और परिवार के बुजुर्गों से सीखा है।
क्या इस चाय में अदरक मिलाना अनिवार्य है?
स्वाद के लिए अदरक और थोड़ी चायपत्ती डाली जा सकती है, लेकिन अदरक न होने पर भी लेमनग्रास की खुशबू इसे खास बना देती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp