मॉनसून के आगमन के साथ ही भारत के उत्तरी राज्यों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 11 जुलाई को हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक वर्षा की संभावना जताई है। कई इलाकों में बिजली की चमक और तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान के कारण जनजीवन पर असर पड़ने की आशंका है। प्रदेश के तीन जिलों में तेज वर्षा को लेकर पहले ही अलर्ट जारी किया गया था, और अब पंचकूला, अंबाला व यमुनानगर में तेज बारिश के लिए यलो अलर्ट बरकरार है। अब तक राज्य में मानसून की सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, हालांकि 11 जुलाई के बाद मानसून की तीव्रता में कुछ कमी आने की उम्मीद है। 15 जुलाई तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा और आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे, जिसमें उत्तरी हरियाणा के जिलों में गरज-चमक के साथ कहीं-कहीं हल्की बारिश की स्थिति बनी रहेगी।
हरियाणा में बारिश का डेटा और यमुना का बढ़ता जलस्तर
कृषि विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, करनाल जिले में बीते 24 घंटों में 40 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है, जो इस सीजन की सर्वाधिक है। करनाल जिले के भीतर ब्लॉक स्तर पर बने छह केंद्रों में से निलोखेड़ी ब्लॉक में सबसे अधिक 84.4 मिलीमीटर वर्षा हुई। इसके बाद इंद्री में 60 मिलीमीटर, करनाल ब्लॉक में 44 मिलीमीटर, मुनक में 5 मिलीमीटर और घरौंडा में 4 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। मानसून की इन शुरुआती बौछारों का सीधा असर हथनीकुण्ड बैराज पर दिख रहा है, जहाँ 50,649 क्यूसेक पानी रिकॉर्ड किया गया है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही वर्षा के कारण जलस्तर के और बढ़ने की पूरी संभावना है, जिसके चलते यमुना नदी के तट पर स्थित गांवों को बेहद सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
हथनीकुण्ड बैराज की स्थिति और सावधानी
बीते तीन दिनों से पहाड़ी राज्यों में हुई मूसलाधार बारिश ने हथनीकुण्ड बैराज में पानी की आवक को काफी बढ़ा दिया है। सिंचाई विभाग के अनुसार, जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए बैराज के 18 में से 10 गेट यमुना नदी की ओर खोल दिए गए हैं ताकि अतिरिक्त जल को सुरक्षित रूप से आगे बढ़ाया जा सके। नदी किनारे रहने वाले निवासियों को प्रशासनिक स्तर पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है। सिंचाई विभाग ने ग्रामीणों से विशेष आग्रह किया है कि वे नदी के किनारों पर अनावश्यक रूप से न जाएं, और अपने बच्चों व मवेशियों को जल स्रोतों से सुरक्षित दूरी पर रखें।
हिमाचल प्रदेश में भारी तबाही का मंजर
हिमाचल प्रदेश का मौसम वर्तमान में अत्यंत तूफानी बना हुआ है। IMD ने 11 जुलाई के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट घोषित किया है। शिमला, मनाली, धर्मशाला और सोलन जैसे पर्यटन स्थलों पर मौसम की मार देखी जा सकती है, जहाँ गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का पूर्वानुमान है। इन परिस्थितियों के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ सकता है, जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है। शिमला में निरंतर बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त करना शुरू कर दिया है। शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास ओक ओवर के करीब बैनमोर रोड पर एक विशाल पेड़ सड़क पर गिर गया, जिससे बिजली का खंभा टूट गया और रेलिंग क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत यह रही कि उस समय वहां कोई वाहन या व्यक्ति नहीं था, अन्यथा एक बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।
सुरक्षा के लिए प्रशासन के सख्त कदम
शिमला के विकासनगर उपनगर में भी बारिश के दौरान भूस्खलन और पत्थरों के गिरने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें सड़क किनारे खड़ी कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं। बैनमोर वार्ड की पार्षद शीनम कटारिया ने वन विभाग से मांग की है कि शहर में स्थित सभी पुराने और कमजोर पेड़ों का तत्काल सर्वे किया जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, अगले छह दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। पिछले 24 घंटों में सिरमौर जिले के पच्छाद में सर्वाधिक 21 सेंटीमीटर, नाहन में 16 सेंटीमीटर, कसौली में 15 सेंटीमीटर, धर्मपुर में 14 सेंटीमीटर, और सोलन व पालमपुर में 11-11 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। प्रशासन ने भूस्खलन, जलभराव और सड़कों पर फिसलन जैसी समस्याओं को लेकर चेतावनी जारी की है, साथ ही किन्नौर और लाहौल-स्पीति में फ्लैश फ्लड का खतरा भी बना हुआ है।
कांगड़ा प्रशासन ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत नदियों, खड्डों, नालों, बांधों और अन्य जल स्रोतों के पास जाने और जोखिमपूर्ण गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। स्कूलों की सुरक्षा के मद्देनजर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने स्पष्ट किया है कि खराब मौसम में स्कूल बंद करने का निर्णय संबंधित जिले के उपायुक्त लेंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी उन्हीं की होगी। साथ ही, जब भी किसी जिले में स्कूल बंद रहेंगे, तो छात्रों के साथ-साथ शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भी छुट्टी रहेगी, ताकि आदेशों के क्रियान्वयन में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।











