हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में ग्रामीण क्षेत्रों के भीतर रोजगार के नए द्वार खुले हैं। यहां चार युवाओं ने मिलकर एक अनूठी पहल की शुरुआत की है, जिससे न केवल उनका खुद का व्यवसाय मजबूत हुआ है बल्कि आसपास के दर्जनों परिवारों को भी आर्थिक संबल मिला है। सरकारी योजनाओं और आपसी सूझबूझ के बल पर इन दोस्तों ने ग्रामीण परिवेश में ही एक सफल उद्यम खड़ा कर दिखाया है।
मंडी के बाढू गांव में हुई शुरुआत
यह उद्यम मंडी जिले की चच्योट तहसील के बाढू गांव में संचालित हो रहा है। पिछले तीन वर्षों से यहां हिल थ्रिल एग्रो प्रोसेसर प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक प्रसंस्करण इकाई सफलतापूर्वक काम कर रही है। इस यूनिट के जरिए स्थानीय तौर पर पैदा होने वाले फलों और सब्जियों का प्रसंस्करण किया जाता है, जिससे किसानों की उपज को एक सही बाजार मिल रहा है और क्षेत्र के लोगों को गांव में ही आजीविका मिल रही है।
निजी नौकरी छोड़कर शुरू किया कारोबार
कंपनी के प्रबंध निदेशक खीरामणी पहले निजी क्षेत्र में काम करते थे। नौकरी के दौरान ही उनके मन में अपने ही क्षेत्र में कुछ नया करने का विचार आया। उन्होंने अपने तीन साथियों भागीरथ चौहान, रविंद्र और इल्मदीन अली के साथ इस योजना पर चर्चा की और गांव में ही उद्योग लगाने का निर्णय लिया। उनका मुख्य उद्देश्य यह था कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए बड़े शहरों की तरफ न भटकना पड़े और उन्हें घर के नजदीक ही काम मिल सके। इसी सोच के साथ इस कंपनी की नींव रखी गई थी।
जनवरी 2023 से शुरू हुआ व्यावसायिक उत्पादन
इस उद्योग की स्थापना के बाद जनवरी 2023 से यहां नियमित रूप से व्यावसायिक उत्पादन का कार्य शुरू हो गया था। वर्तमान समय में इस इकाई के भीतर 50 से अधिक अलग-अलग प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों में विभिन्न प्रकार के अचार, चटनी, जैम, फ्रूट वाइन, फ्रूट साइडर और एप्पल साइडर विनेगर प्रमुख रूप से शामिल हैं। ग्रामीण स्तर पर उपलब्ध सामग्री से बनने वाली इन वस्तुओं को बाजार में ग्राहकों की तरफ से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।
लाखों रुपये का मिला सरकारी अनुदान
इस व्यवसाय को बढ़ाने और सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रबंधन की तरफ से एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई थी। एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत वर्ष 2024 में कंपनी को 84 लाख रुपये की भारी-भरकम अनुदान राशि प्राप्त हुई। इस आर्थिक सहायता ने इकाई के विकास और उत्पादन के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। कंपनी प्रबंधन ने इस प्रकार के प्रोत्साहन के लिए प्रदेश सरकार के प्रति आभार भी व्यक्त किया है।
चार अन्य राज्यों तक पहुंच रहे उत्पाद
इस कंपनी द्वारा तैयार किए जाने वाले सामान की मांग अब केवल हिमाचल प्रदेश तक ही सीमित नहीं है। स्थानीय बाजारों के अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के बाजारों में भी इनके उत्पादों की आपूर्ति की जा रही है। दूसरे राज्यों में कारोबार के विस्तार से कंपनी की स्थिति काफी मजबूत हुई है। इसका मूल उद्देश्य स्थानीय कृषि और बागवानी उत्पादों का मूल्य संवर्धन करना है ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित लाभ मिल सके।
24 से बढ़कर 70 तक पहुंची कर्मचारियों की संख्या
जब इस यूनिट की शुरुआत हुई थी तब यहां केवल 24 कर्मचारी काम करते थे। समय के साथ कारोबार बढ़ने पर कर्मचारियों की संख्या में भी इजाफा हुआ और अब यहां कुल 70 लोग अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से 40 कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि और कर्मचारी राज्य बीमा जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है। यहां काम करने वाले युवाओं को अपने कौशल को और अधिक निखारने के पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया
ग्राम पंचायत बाढू की प्रधान सीता ठाकुर ने इस बात पर प्रसन्नता जताई है कि उनके क्षेत्र में इस तरह की प्रसंस्करण इकाई स्थापित हुई है। उन्होंने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से ग्रामीण आजीविका को बहुत मजबूती मिल रही है। इसके अलावा कंपनी में काम करने वाले कुटाहची के जितेंद्र ठाकुर और किलिंग के कमल शर्मा जैसे स्थानीय युवाओं ने भी माना कि घर के पास रोजगार मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिली है और बाहर जाने की मजबूरी खत्म हुई है।



















