पहाड़ी राज्य में बंदरों के बढ़ते आतंक और खेती को होने वाले नुकसान से निपटने के लिए एक विस्तृत जमीनी रूपरेखा तैयार की जा रही है। राजधानी शिमला में आयोजित राज्य वन्यजीव बोर्ड की बारहवीं औपचारिक बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वन महकमे के वन्यजीव प्रभाग को स्पष्ट निर्देश जारी किए कि समूचे प्रदेश में पंचायत स्तर पर बंदरों की सटीक तादाद का संकलन किया जाए। सरकार का मानना है कि जब तक हर ग्राम पंचायत में वन्यजीवों के फैलाव और उनकी स्थानीय आबादी की पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं होगी, तब तक फसलों की हिफाजत और मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए कोई ठोस नीति लागू नहीं की जा सकती। हालांकि इस उच्चस्तरीय मंथन में गणना को अमलीजामा पहनाने की अंतिम तारीख अथवा इसके बाद उठाए जाने वाले विधिक कदमों की रूपरेखा पर अभी अंतिम घोषणा बाकी है।
रणनीतिक सीमाओं पर सुरक्षा तंत्र का विस्तार
राज्य के सुदूर जनजातीय इलाकों में राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। चीन सीमा से सटे संवेदनशील क्षेत्रों में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल और सेना की अग्रिम चौकियों के विस्तार के लिए आवश्यक स्वीकृतियां प्रदान की गईं। इस फैसले के तहत लाहौल-स्पीति जिले की स्पीति तहसील के अंतर्गत लालुंग तथा धार चोकुला, काजा क्षेत्र में बॉर्डर आउट पोस्ट स्थापित करने हेतु आईटीबीपी की सत्रहवीं बटालियन के लिए 1.7820 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण को हरी झंडी दिखाई गई। इस रणनीतिक भूभाग पर चौकी बनने से उच्च पर्वतीय सीमा पर गश्त और निगरानी तंत्र को नई मजबूती मिलेगी।
इसी क्रम में किन्नौर जिले के सीमावर्ती इलाकों में भी अग्रिम सुरक्षा ढांचे के लिए भूमि आवंटन को स्वीकृति दी गई। जिले में आईटीबीपी की दूसरी बटालियन को फॉरवर्ड पोस्ट निथल थाच का निर्माण करने के लिए 1.60 हेक्टेयर वन भूमि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त किन्नौर की सांगला तहसील में सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण नागस्ती इलाके में उत्तरी सरहद पर सैन्य बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण की योजना बनाई गई है। इस परियोजना के अंतर्गत रकछम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य के भीतर 0.2750 हेक्टेयर संरक्षित वन क्षेत्र को 11 महार रेजिमेंट तथा मुख्यालय 136 स्वतंत्र इन्फैंट्री ब्रिगेड समूह के पक्ष में हस्तांतरित करने की मंजूरी दी गई। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि सभी रक्षा निर्माण कार्य लागू पर्यावरणीय कानूनों और वन्यजीव नियमों के पूर्ण अनुपालन के साथ संचालित किए जाएंगे।
औद्योगिक विकास और दवा निर्माण को गति
पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ राज्य में रोजगार सृजन और निवेश को आकर्षित करने के प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली। कांगड़ा जिले के संसारपुर टैरेस स्थित औद्योगिक क्षेत्र के पहले चरण में प्लॉट संख्या 53 और 54 पर नई दवा निर्माण इकाई स्थापित की जाएगी। मैसर्स सीएमजी बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इस संयंत्र में सक्रिय औषधि सामग्री यानी एपीआई और रासायनिक इंटरमीडिएट्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाएगा। वन्यजीव बोर्ड ने इस बात पर जोर दिया कि औषधि विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका के नए रास्ते खुलेंगे और औद्योगिक आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
इसके साथ ही धातु उद्योग के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए मैसर्स गोयल फर्नेस प्राइवेट लिमिटेड की सेकेंडरी मेटलर्जिकल इकाई के बड़े विस्तार प्रस्ताव को पारित किया गया। वर्तमान समय में इस संयंत्र की एमएस इंगोट्स बनाने की क्षमता 19,200 टन प्रतिवर्ष है, जिसे अब बढ़ाकर 96,600 टन प्रतिवर्ष किया जाएगा। उत्पादन को गति देने के लिए संयंत्र परिसर में नई इंडक्शन फर्नेस, कंटीन्यूअस कास्टिंग मशीन और आधुनिक रोलिंग मिल लगाई जाएगी। इस तकनीकी उन्नयन के जरिए प्रतिवर्ष कुल 77,280 टन राउंड, एंगल, चैनल, फ्लैट्स और टीएमटी बार का निर्माण किया जाएगा।
अभयारण्य में सड़क चौड़ीकरण और राजमार्ग पर सुरक्षा
मंडी जिले के सराज वन मंडल क्षेत्र में स्थित विख्यात शिकारी देवी वन्यजीव अभयारण्य के भीतर संपर्क मार्ग को सुगम बनाने की पुरानी मांग पूरी कर दी गई है। बोर्ड ने भुलाह से शिकारी देवी तक जाने वाले मार्ग के चौड़ीकरण और कायाकल्प के लिए हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के सराज मंडल को 4.72 हेक्टेयर वन भूमि सौंपने की अनुमति दे दी। इस सड़क के सुधरने से श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी।
बैठक में विकास परियोजनाओं के कारण वन्यजीवों पर पड़ रहे विपरीत असर पर भी गंभीर चिंता जताई गई। मंडी जिले के ही सुकेत वन मंडल में कीरतपुर-मनाली फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग-154 के पुंग-भुवाणा टनल वाले हिस्से पर तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर जंगली जानवरों के मारे जाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क दुर्घटनाओं को थामने और वन्यजीवों को सुरक्षित गलियारा उपलब्ध कराने के लिए वैज्ञानिक उपाय तुरंत अमल में लाए जाएं।
चिड़ियाघर परियोजना और जन-जागरूकता पहल
मुख्यमंत्री ने कांगड़ा जिले के देहरा स्थित बनखंडी में आकार ले रहे महत्वाकांक्षी दुर्गेश अरण्य प्राणी उद्यान के निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मौके पर मौजूद आला अधिकारियों को इस परियोजना के सभी चरणों को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया ताकि इसे इको-पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।
समारोह के समापन पर जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए डाक विभाग और वन्यजीव विंग के संयुक्त प्रयास से तैयार दो सचित्र पोस्टकार्ड श्रृंखलाओं, हिमाचल्स वाइल्ड आइकॉन्स और हिमाचल्स वाइल्ड हेरिटेज का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही वन विभाग के प्रधान मुख्य अरण्यपाल डॉ. संजय सूद द्वारा जल नमूनों के रासायनिक परीक्षणों की सरलीकृत विधियों पर लिखी गई शोध पुस्तक का भी विमोचन हुआ। इस अवसर पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।





















