हिमाचल प्रदेश के नाहन शहर में तनाव और हिंसा के माहौल के बीच आपसी भाईचारे की अनूठी मिसाल देखने को मिली है, जहां कुछ दिन पहले लोग एक-दूसरे पर पत्थर बरसा रहे थे, वहीं अब उन्होंने फूलों की वर्षा की है। शुक्रवार को हुई हिंसक घटनाओं के बाद रविवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती के मौके पर पारंपरिक रूट पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें प्रशासन और स्थानीय विधायक की पहल के बाद दोनों पक्षों ने अपनी गलती स्वीकार की और सौहार्दपूर्ण माहौल में एक साथ नजर आए।
विवाद की जड़ और पुराने रूट पर रजामंदी
सिरमौर जिले के नाहन में बीते शुक्रवार को वाल्मीकि और सिख समुदाय के बीच तनाव पैदा हो गया था, जिसके चलते हुए पथराव में एक एसएचओ और पुलिस जवानों समेत लगभग 14 लोग घायल हो गए थे। शनिवार को प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ स्थानीय लोगों की कई दौर की लंबी बैठकें हुईं, जिसके बाद प्रशासन ने शोभायात्रा का रूट बदलने का निर्णय लिया था। हालांकि, नाहन के मोहल्ला गोबिंदगढ़ के निवासी अपनी सदियों पुरानी परंपरा को टूटने नहीं देना चाहते थे। इस बीच, सिख समुदाय के युवाओं ने आगे आकर एक सकारात्मक प्रस्ताव रखा, जिससे विवाद का समाधान निकल आया। तय हुआ कि वाल्मीकि चौक पर हुई तोड़फोड़ की भरपाई और मरम्मत सिख समाज द्वारा कराई जाएगी, जिसके बाद रविवार को शांतिपूर्ण ढंग से शोभायात्रा का आयोजन संभव हो सका।
झड़प के दौरान हुई थी व्यापक हिंसा
यह पूरा विवाद 22 अक्टूबर को नाहन में दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प के रूप में सामने आया था, जिसमें एसएचओ और पुलिसकर्मियों सहित कुल 14 लोग चोटिल हो गए थे। शहर में दिल्ली गेट की तरफ जाने वाली मुख्य सड़क पर वाल्मीकि चौक के पास एक स्वागत द्वार लगाने की बात को लेकर दो अलग-अलग मोहल्लों के लोगों में तीखी तकरार शुरू हो गई थी। गोबिंदगढ़ इलाके के कुछ लोग वहां स्वागत द्वार स्थापित करने का प्रयास कर रहे थे, जिसका विरोध वाल्मीकि बस्ती के स्थानीय लोगों ने किया। समाचार एजेंसी पीटीआई भाषा के हवाले से सिरमौर के पुलिस अधीक्षक निश्चित सिंह नेगी ने जानकारी दी थी कि दोनों पक्षों की तरफ से एक-दूसरे पर ईंटों, पत्थरों और कांच की बोतलों से जोरदार हमले किए गए थे।
तहसीलदार की गाड़ी और सरकारी संपत्ति को नुकसान
पुलिस अधीक्षक निश्चित सिंह नेगी के अनुसार, जब नाहन के तहसीलदार दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने के लिए घटनास्थल पर पहुंचे, तो उग्र भीड़ ने उनकी सरकारी गाड़ी को रास्ते में रोक लिया और उस पर लाठियों तथा पत्थरों से हमला बोल दिया, जिससे वाहन को काफी नुकसान पहुंचा। इस हिंसक झड़प और बवाल के दौरान नाहन सदर थाने के प्रभारी कुलबीर सिंह और दो अन्य पुलिसकर्मियों समेत कुल 14 लोग घायल हो गए थे। इस घटना के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-907ए पर यातायात पूरी तरह से ठप हो गया था और करीब तीन घंटे तक लंबा जाम लगा रहा, जिससे वाहनों की कतार बढ़कर लगभग पांच किलोमीटर तक लंबी हो गई थी।
कानूनी कार्रवाई और पुलिस का एक्शन
प्रशासन और पुलिस ने इस गंभीर घटना का तुरंत संज्ञान लेते हुए भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा तीन के तहत औपचारिक मामला दर्ज किया था। इसके अलावा, एक अन्य घटनाक्रम में सिरमौर के पुलिस अधीक्षक द्वारा दी गई जानकारी से इतर, एक अलग मामले में आईपीएस अफसर संजीव गांधी पर 24 घंटे के भीतर दूसरी एफआईआर दर्ज होने की खबर भी सामने आई, जिसमें उन पर ₹14.07 लाख के घोटाले का आरोप और तबादले के आठ महीने बाद भी एसपी आवास पर कब्जा जमाए रखने की बात कही गई थी। बहरहाल, नाहन में समुदायों के बीच बनी नई सहमति और फूल बरसाकर निकाली गई शोभायात्रा ने इलाके में शांति और भाईचारे की बहाली का एक मजबूत संदेश दिया है।


















