हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में कानून और व्यवस्था को लेकर एक बहुत बड़ा और गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। मैहतपुर इलाके में स्थित एक शराब के ठेके पर बुधवार देर रात भारी हंगामा, तोड़फोड़ और मारपीट की घटना हुई है, जिसने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरी हिंसक घटना के कई वीडियो वीरवार सुबह से ही विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फैल रहे हैं। इन वायरल फुटेज में पुलिस की वर्दी पहने हुए जवान और कुछ सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मी शराब की दुकान के सेल्समैन के साथ अत्यधिक आक्रामक तरीके से हाथापाई करते हुए और उसे जमीन पर घसीटते हुए साफ नजर आ रहे हैं। इस दौरान वीडियो के बैकग्राउंड में लगातार कांच के टूटने और शराब की बोतलों के फर्श पर गिरकर चकनाचूर होने की आवाजें आ रही हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मौके पर कितनी भारी तबाही मचाई गई है। इस पूरी घटना ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक गहरी चिंता पैदा कर दी है।
मैहतपुर ठेके पर रात के समय भड़की हिंसा
ऊना जिले के व्यापारिक कस्बों में शुमार मैहतपुर में पुलिस और स्थानीय व्यापारियों के बीच यह टकराव तब सामने आया, जब आधी रात के समय ठेके पर पुलिस दल पहुंच गया। सोशल मीडिया पर एक वायरल पोस्ट, जिसे विनोद कटवाल नाम के अकाउंट से साझा किया गया है, उसमें यहां तक दावा किया गया है कि "एसएचओ ने पी रखी है" और पुलिस के जवानों ने ठेके पर धावा बोलकर लोगों के सिर फोड़े हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद से ही पुलिस की छवि को लेकर आम जनता में भारी रोष देखा जा रहा है। वीडियो क्लिप्स में यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि कानून के रखवाले ही खुद कानून को ताक पर रखकर एक कर्मचारी को घसीट रहे हैं। इस घटना ने एक तरफ जहां स्थानीय लोगों को चौंका दिया है, वहीं दूसरी ओर पुलिस और ठेका कर्मचारियों के बीच आरोपों और प्रत्यारोपों का एक लंबा दौर शुरू कर दिया है।
सरकारी काम में बाधा का केस और पुलिस का पक्ष
इस पूरे मामले में पुलिस विभाग ने अपने कर्मियों का बचाव करते हुए सख्त कानूनी कदम उठाए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह घटना तब हिंसक हुई जब ठेके के कर्मचारियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता और मारपीट शुरू कर दी। पुलिस ने शराब की दुकान के कर्मचारियों के खिलाफ एक औपचारिक एफआईआर दर्ज कर ली है। इस एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि ठेके के कर्मचारियों ने पुलिस के सरकारी कार्य में जानबूझकर बाधा डाली, उनके साथ मारपीट की और खुद ही शराब की बोतलें तोड़कर सरकारी संपत्ति और शांति व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया। पुलिस का दावा है कि उनके जवान केवल अपना कानूनी कर्तव्य निभा रहे थे, जबकि ठेका कर्मियों ने माहौल को हिंसक बना दिया।
कारोबारी टीएन द्विवेदी ने लगाए गंभीर आरोप
पुलिस के इन दावों के बिल्कुल विपरीत, शराब ठेके के मालिक और कारोबारी टीएन द्विवेदी ने पुलिस कर्मियों पर अपनी शक्ति और पद के दुरुपयोग का बहुत ही संगीन आरोप लगाया है। घटना के तुरंत बाद टीएन द्विवेदी न्याय की गुहार लगाते हुए पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचे और इस पूरे प्रकरण की विस्तृत शिकायत दर्ज कराई। द्विवेदी ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि बुधवार रात को जब यह घटना हुई, तब उनके सेल्समैन ने उन्हें बेहद घबराई हुई हालत में फोन किया था। सेल्समैन ने फोन पर बताया कि कुछ अज्ञात लोग ठेके के अंदर घुस आए हैं और उसके साथ बुरी तरह मारपीट कर रहे हैं। इस पर जब द्विवेदी ने उसे तुरंत पुलिस को कॉल करने की सलाह दी, तो सेल्समैन का जवाब हैरान करने वाला था। उसने बताया कि जो लोग उसे पीट रहे हैं और ठेके में तोड़फोड़ कर रहे हैं, वे खुद पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी ही हैं।
व्यापारी टीएन द्विवेदी ने इस पूरी घटना की जड़ के बारे में खुलासा करते हुए बताया कि बुधवार दिन के समय उनका एक स्थानीय व्यक्ति के साथ पैसों के लेनदेन को लेकर कुछ मामूली विवाद हुआ था। उनका स्पष्ट आरोप है कि उसी व्यक्ति ने अपनी निजी दुश्मनी निकालने के लिए रात के समय पुलिसकर्मियों का सहारा लिया। आरोप है कि वह व्यक्ति पुलिस कर्मचारियों को अपने साथ लेकर सीधे शराब ठेके पर पहुंचा और वहां पहुंचते ही उन्होंने बिना कोई पूछताछ किए सेल्समैन पर सीधा हमला कर दिया। द्विवेदी का दावा है कि इस दौरान ठेके के अंदर भारी पैमाने पर तोड़फोड़ की गई, जिससे बड़ी संख्या में शराब की महंगी बोतलें नष्ट हो गईं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इतना ही नहीं, शराब कारोबारी ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस कर्मियों ने बिना किसी कानूनी वारंट, बिना किसी वैधानिक आदेश या उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए उनके शराब ठेके पर जबरन ताला लगा दिया और मौके से चले गए।
आबकारी विभाग की निगरानी में दोबारा शुरू हुआ कामकाज
टीएन द्विवेदी के अनुसार, पुलिस द्वारा ठेके पर ताला जड़ने के बाद कई घंटों तक उनका कारोबार पूरी तरह से ठप रहा। इसके बाद, वीरवार दोपहर को इस मामले में आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। आबकारी विभाग के उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में ठेके का ताला विधिवत रूप से खुलवाया गया, जिसके बाद ही वहां दोबारा सुचारू रूप से कामकाज शुरू हो सका। इस दौरान ठेके के अंदर बिखरे हुए कांच और टूटी बोतलों का मंजर पुलिस की बर्बरता के दावों को बल दे रहा था। व्यापारी का कहना है कि पुलिस का काम सुरक्षा देना है, न कि निजी विवादों में किसी एक पक्ष का साथ देकर दूसरे पक्ष का व्यवसाय और संपत्ति नष्ट करना।
एसपी सचिन हीरेमठ ने दिया निष्पक्ष जांच का आश्वासन
इस पूरे मामले पर बढ़ती सार्वजनिक नाराजगी और विवाद को देखते हुए ऊना जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सचिन हीरेमठ ने आधिकारिक बयान जारी किया है। एसपी सचिन हीरेमठ ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस की तरफ से शराब ठेके के कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस कर्मियों से मारपीट करने और उन पर शराब की बोतलें तोड़ने के गंभीर आरोप में मामला दर्ज किया जा चुका है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि फिलहाल पुलिस विभाग के पास ठेके के मालिक या दूसरे पक्ष की ओर से कोई भी औपचारिक शिकायत या लिखित बयान प्राप्त नहीं हुआ है, जिससे मामले की दूसरी तस्वीर साफ हो सके।
एसपी सचिन हीरेमठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए यह स्पष्ट किया कि यदि शराब कारोबारी टीएन द्विवेदी या उनका कोई भी वैध प्रतिनिधि इस हिंसक मामले में पुलिस स्टेशन आकर अपनी शिकायत देता है, तो पुलिस विभाग इस पूरे प्रकरण की एक पूर्ण रूप से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करेगा। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि जांच में जो भी तथ्य और सबूत सामने आएंगे, उनके आधार पर कानून के अनुसार बिल्कुल उचित और सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, चाहे इसमें पुलिसकर्मी ही क्यों न दोषी पाए जाएं। फिलहाल, सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो और दोनों पक्षों के पूरी तरह से परस्पर विरोधी दावों के चलते यह मामला न सिर्फ ऊना, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश में चर्चा का एक बड़ा विषय बना हुआ है। अब जिले के सभी नागरिकों और व्यापारियों की नजर पुलिस की उस निष्पक्ष जांच पर टिकी है, जिससे इस विवाद की वास्तविक परिस्थितियां और पर्दे के पीछे का पूरा सच सामने आ सकेगा।




















