ओडिशा राज्य के मयूरभंज जिले में मानसून की भारी बारिश के बाद उफनती नदियों और नालों से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसी बीच जिले के रसगोविंदपुर ब्लॉक अंतर्गत सन्नई पुल पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। उफान पर बह रही नदी का पानी पुल के ऊपर से गुजरने के बावजूद एक पिकअप वाहन चालक ने उसे पार करने की कोशिश की। देखते ही देखते पानी का प्रचंड वेग पिकअप को बहा ले गया और गाड़ी पुल से नीचे गहरे पानी में जा गिरी। इस हादसे के बाद पिकअप में सवार चालक और हेल्पर पानी के बीच फंस गए, जिन्हें लगभग तीन घंटे चले जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।
प्रशासनिक प्रतिबंध और जलभराव के बीच चालक की लापरवाही
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार सन्नई पुल के ऊपर करीब तीन फीट से भी अधिक ऊंचाई तक बाढ़ का पानी बहुत तेज गति से बह रहा था। पानी के खतरनाक जलस्तर और बहाव की तीव्रता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सन्नई पुल पर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया था। इसके बावजूद आमन्या क्षेत्र के रहने वाले एक पिकअप चालक ने नियमों की अनदेखी की। वह रसगोविंदपुर से अमरदा की ओर अपना वाहन लेकर बढ़ रहा था।
चालक ने पिकअप को लबालब भरे पुल पर उतार दिया। पुल के मध्य में पहुंचते ही पानी का दबाव इतना अधिक था कि पिकअप गाड़ी अपना संतुलन खो बैठी। क्षण भर में ही पिकअप पुल के किनारे से बहते हुए सीधे नीचे पानी में समा गई। गाड़ी के डूबते ही चालक और उसका हेल्पर तत्परता दिखाते हुए किसी तरह वाहन से बाहर निकले और पानी की सतह पर तैरते हुए अपनी जान बचाने के लिए मदद का इंतजार करने लगे।
रसगोविंदपुर फायर ब्रिगेड ने बोट से चलाया तीन घंटे का रेस्क्यू
घटना की सूचना मिलते ही रसगोविंदपुर फायर ब्रिगेड की रेस्क्यू टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। नदी के प्रचंड बहाव और उफनते पानी के कारण राहत अभियान चलाना दमकल कर्मियों के लिए आसान नहीं था। विपरीत परिस्थितियों में दमकल टीम ने सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए बचाव नौका यानी बोट को पानी में उतारा और उफनती धारा में आगे बढ़े।
लगभग तीन घंटे तक चले कड़ी मशक्कत वाले इस बचाव अभियान के बाद फायर ब्रिगेड के जवानों ने चालक और हेल्पर दोनों को सकुशल बोट में बैठाया और सुरक्षित किनारे पर ले आए। दोनों की जान बचने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने राहत की सांस ली। फिलहाल प्रशासन ने सन्नई पुल पर पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा कड़ी कर दी है और जलस्तर घटने तक आवाजाही पूरी तरह रोक रखी है।
सरसकना-झारखंड मार्ग पर भी बह गया था ई-रिक्शा
मयूरभंज जिले में बाढ़ के पानी में वाहनों के बहने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी जिले के सरसकना इलाके में एक ऐसा ही जोखिमभरा हादसा देखने को मिला था। सरसकना क्षेत्र को पड़ोसी राज्य झारखंड से जोड़ने वाले प्रमुख मुख्य मार्ग पर जलभराव के दौरान एक बैटरी चालित ऑटो-रिक्शा बह गया था।
उस हादसे के समय ई-रिक्शा में चालक सहित कुल चार यात्री सवार थे, यानी कुल पांच लोग वाहन में मौजूद थे। पानी के तेज बहाव में ई-रिक्शा बहने लगा तो वहां मौजूद स्थानीय ग्रामीणों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। ग्रामीणों ने तुरंत पानी में उतरकर एक-दूसरे का हाथ थामते हुए सभी चार यात्रियों और चालक को सुरक्षित पानी से बाहर निकाल लिया। इसके पश्चात ग्रामीणों ने भारी रस्सियों की मदद से जलमग्न ऑटो-रिक्शा को भी खींचकर सड़क पर खड़ा किया।



















