मनोरंजन की दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक अजीबोगरीब द्वंद्व छिड़ा हुआ है। एक तरफ जहां कई जाने-माने पटकथा लेखक, निर्देशक और अभिनेता एआई के इस्तेमाल का पुरजोर विरोध कर रहे हैं और इसके जरिए काम करने वालों के साथ काम न करने की कसमें खा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उद्योग का एक बड़ा हिस्सा इसे एक रचनात्मक साझेदार और लागत घटाने वाले सबसे कारगर हथियार के रूप में अपना रहा है। कुछ दिग्गज तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस शुरुआती दौर में ही एआई के व्यावसायिक अवसरों को भुनाकर करोड़ों डॉलर बना लिए हैं। हॉलीवुड के वरिष्ठ पत्रकार और मनोरंजन उद्योग के विधिक विश्लेषक मैट बेलौनी ने फिल्म निर्माण की इस बदलती दुनिया, स्टूडियो की मजबूरियों, ट्रेड यूनियनों की चिंताओं और जारी कानूनी बहसों पर कई अहम खुलासे किए हैं।
दो तरह की एआई: कॉरपोरेट सुगमता और जनरेटिव कंटेंट का निर्माण
फिल्म उद्योग में एआई के इस्तेमाल को दो अलग-अलग हिस्सों में विभाजित करके देखा जाना चाहिए। पहला कॉरपोरेट या प्रशासनिक एआई है, जिसका उपयोग प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, डेटा विश्लेषण और सर्च परिणामों को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। इस स्तर पर उद्योग का लगभग हर खिलाड़ी पहले से ही एआई का उपयोग कर रहा है। लेखन कक्षों में यह तकनीक तेजी से अपनी जगह बना रही है। कई शो-रनर और मुख्य लेखक अपनी टीमों को पटकथा में हास्य के संवाद, सीन की रूपरेखा तैयार करने या किसी इमारत के आंतरिक ढांचे के विवरण के लिए चैटजीपीटी जैसे टूल का उपयोग करने की सलाह दे रहे हैं।
राइटर गिल्ड ऑफ अमेरिका भी इस प्रकार के तकनीकी सहयोग से असहज नहीं है, बशर्ते हर स्क्रिप्ट पर किसी वास्तविक लेखक को श्रेय मिले और इस प्रक्रिया से किसी की नौकरी न जाए। लेकिन विवाद की असली वजह जनरेटिव एआई है, जो सीधे तौर पर वीडियो, शॉर्ट्स, एनिमेशन और टीवी पायलट तैयार कर रही है। हालांकि वर्तमान में जनरेटिव एआई से बनी अधिकांश फिल्में और वीडियो दृश्य गुणवत्ता के मामले में बहुत बेहतरीन नहीं हैं, फिर भी एनिमेशन के क्षेत्र में यह तकनीक बहुत तेजी से पैर पसार रही है। नेटफ्लिक्स ने अपनी अर्निंग कॉल में खुलासा किया था कि उनके लगभग 300 शो किसी न किसी रूप में जनरेटिव एआई का उपयोग करते हैं।
बेन एफ्लेक का 587 मिलियन डॉलर का सौदा और सामाजिक ट्रोलिंग
हॉलीवुड में सार्वजनिक रूप से एआई की आलोचना करने और निजी तौर पर इसका इस्तेमाल करने के बीच एक गहरा सामाजिक अंतर मौजूद है। कई रचनाकारों को एआई का उपयोग करने पर तीखी जन-आलोचना का सामना करना पड़ा है। उदाहरण के लिए, अमेज़न ने जब अपने अल्बर्ट चेंग द्वारा संचालित एआई जनरेटिव स्टूडियो के तहत कई नए एनिमेशन शो की घोषणा की, तो उसमें शामिल एक रचनाकार को इंटरनेट पर इतने भारी विरोध का सामना करना पड़ा कि उसे परियोजना से हटना पड़ा।
इसके विपरीत, नेटफ्लिक्स ने ऑस्कर विजेता अभिनेता और निर्देशक बेन एफ्लेक की एआई कंपनी को 587 मिलियन डॉलर (लगभग 600 मिलियन डॉलर) में खरीदकर इस तकनीक को एक प्रकार की वैधता प्रदान की। बेन एफ्लेक द्वारा विकसित तकनीक दरअसल पटकथा या कलाकारों को बदलने के बजाय शूट किए गए फुटेज को जनरेटिव एआई के लिए सुलभ बनाती है। इससे निर्माताओं को महंगे री-शूट से मुक्ति मिलती है और वे किसी सीन के कोण या परिदृश्य को तकनीक की मदद से बढ़ा सकते हैं। बेन एफ्लेक के इस भारी-भरकम सौदे ने पूरे उद्योग को चौंका दिया, क्योंकि उन्होंने अपनी कई सफल फिल्मों की कुल कमाई से भी ज्यादा इस एआई स्टार्टअप से कमा लिया।
फिल्मों की बढ़ती लागत और ट्रेड यूनियनों का रुख
फिल्म निर्माण की लगातार बढ़ती लागत ने स्टूडियो प्रमुखों को तकनीकी विकल्पों पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। पिक्सार जैसी प्रमुख कंपनियां 200 मिलियन डॉलर से कम में मौलिक एनिमेशन फिल्में नहीं बना पाती हैं, क्योंकि वहां कैलिफोर्निया के श्रम कानूनों और लंबी प्रक्रिया के तहत काम होता है। जब बॉक्स ऑफिस की कमाई अनिश्चित हो, तो निर्माताओं के पास गैर-यूनियन कर्मचारियों और तकनीक की मदद से लागत कम करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
दूसरी ओर, अभिनेताओं और कलाकारों के संगठन जैसे एसएजी-एएफटीआरए (SAG-AFTRA) एआई के सीधे विरोधी नहीं हैं, लेकिन वे अपने सदस्यों की नौकरियों की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध हैं। यूनियन के नियमों के अनुसार, यदि कोई निर्माता फिल्म में किसी सिंथेटिक (एआई जनित) कलाकार का उपयोग करता है, तो उसे एक निश्चित शुल्क का भुगतान करना होगा, जिससे उसकी लागत मानव अभिनेता के बराबर ही बैठती है। सबसे बड़ा खतरा नीचे के स्तर पर काम करने वाले उन गैर-यूनियन कर्मचारियों पर मंडरा रहा है, जो एनिमेशन और विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) में शुरुआती स्तर का काम करते हैं।
क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' और प्रामाणिकता की मांग
लागत कटौती और एआई के इस दौर में क्रिस्टोफर नोलन जैसे निर्देशक एक अलग मिसाल पेश करते हैं। ओपेनहाइमर की वैश्विक सफलता और 1 अरब डॉलर से अधिक की कमाई के बाद, नोलन ने लगभग 250 से 300 मिलियन डॉलर के बजट में अपनी अगली फिल्म 'द ओडिसी' पर काम शुरू किया। नोलन की फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत उनकी मौलिकता और वास्तविक लोकेशन पर शूटिंग होती है। दर्शकों को जब यह पता चलता है कि पर्दे पर दिखने वाले दृश्य असली हैं—जैसे समुद्र में नाव के पास से उछलती हुई डॉल्फ़िन का दृश्य वास्तव में कैमरे में कैद किया गया था—तो वह जुड़ाव एआई से बने विजुअल्स में नहीं मिलता।
आने वाले समय में सिनेमा दो स्पष्ट हिस्सों में विभाजित हो सकता है: एक तरफ जहां वास्तविक इंसानों और वास्तविक परिदृश्यों के साथ बनी प्रामाणिक फिल्में होंगी, वहीं दूसरी तरफ पूरी तरह से एआई जनित या डिजिटल रूप से निर्मित सामग्रियां होंगी, जिन्हें दर्शक केवल समय बिताने के लिए देखेंगे।
कानूनी कानूनी जंग: कॉपीराइट, डेटा माइनिंग और 1.5 अरब डॉलर का समझौता
तकनीकी कंपनियों और हॉलीवुड स्टूडियोज के बीच अधिकारों की लड़ाई अब अदालतों तक पहुंच चुकी है। डिज़नी, यूनिवर्सल पिक्चर्स और वार्नर ब्रोस जैसी दिग्गज कंपनियों ने मिडजर्नी जैसी एआई कंपनियों पर उनके बौद्धिक संपदा (आईपी) का उल्लंघन करने के लिए मुकदमा दायर किया है। मिडजर्नी के मॉडल से जब बार्ट सिम्पसन, ड्रेक या श्रेक जैसे किरदार बिना अनुमति तैयार होने लगे, तो स्टूडियोज ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
वर्तमान में अमेरिकी कॉपीराइट कानून में यह स्पष्ट नहीं है कि किसी मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए कॉपीराइट सामग्री का उपयोग (इनजेशन) अपने आप में कानून का उल्लंघन है या नहीं। हाल ही में एंथ्रोपिक नाम की एआई कंपनी ने लेखकों के एक समूह के साथ 1.5 अरब डॉलर ($1.5 billion) का एक ऐतिहासिक समझौता किया, जो कॉपीराइट कानून के इतिहास में सबसे बड़ा भुगतान माना जा रहा है। इसके साथ ही, केट ब्लैंचेट द्वारा समर्थित 'ह्यूमन कंसेंट रजिस्ट्री' और एसएजी-एएफटीआरए द्वारा संघीय स्तर पर पब्लिसिटी राइट्स की मांग यह दर्शाती है कि हॉलीवुड अपने चेहरों, आवाजों और पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल को रोकने के लिए गंभीर है।
अमेज़न की कॉरपोरेट सेंसरशिप: 40 मिलियन डॉलर की फिल्म को ठंडे बस्ते में डाला
टेक कंपनियों और हॉलीवुड के बीच बढ़ते वित्तीय रिश्तों का एक नकारात्मक पहलू कॉरपोरेट सेंसरशिप के रूप में सामने आया है। अमेज़न ने निर्देशक लुका गुआडाग्नीनो की फिल्म 'आर्टिफिशियल' के निर्माण पर लगभग 40 मिलियन डॉलर खर्च किए, जो कि ओपनएआई (OpenAI) के संस्थापक सैम ऑल्टमैन के जीवन और कंपनी के भीतर हुए विवादों पर आधारित थी।
लेकिन जब अमेज़न ने ओपनएआई के साथ 50 अरब डॉलर ($50 billion) का एक बड़ा सौदा किया, तो अमेज़न एमजीएम के प्रमुखों ने सैम ऑल्टमैन के साथ अपने संबंधों को बचाने के लिए इस तैयार फिल्म को रिलीज करने से मना कर दिया। अंततः, उन्होंने नियॉन (Neon) नाम के एक स्वतंत्र वितरक को शून्य डॉलर में इसके अधिकार दे दिए, बशर्ते वह इसे सिनेमाघरों में रिलीज करने के लिए 15 मिलियन डॉलर का प्रचार खर्च उठाए। यह घटना दर्शाती है कि जब बिग टेक कंपनियों का पैसा हॉलीवुड में आता है, तो सिनेमाई स्वतंत्रता किस तरह प्रभावित होती है।
सोशल मीडिया पर नकली प्रचार और फिल्मों की रेटिंग का कड़वा सच
डिजिटल दौर में फिल्मों का सोशल मीडिया पर हिट या फ्लॉप होना भी पूरी तरह से विपणन एजेंसियों द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है। कई वायरल मार्केटिंग एजेंसियां हर हफ्ते सैकड़ों-हजारों कृत्रिम ट्वीट्स और पोस्ट तैयार करती हैं ताकि किसी फिल्म के पक्ष या विपक्ष में माहौल बनाया जा सके। पहली प्रतिक्रिया देने वाले ज्यादातर ब्लॉगर्स और इन्फ्लुएंसर्स को स्टूडियो द्वारा मुफ्त यात्राएं और सुविधाएं दी जाती हैं, जिससे वे बढ़ा-चढ़ाकर समीक्षाएं लिखते हैं।
समीक्षा वेबसाइटों के मामले में रोटेन टोमैटोज़ पर अब आसानी से भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि पीआर एजेंसियां आलोचकों के अंकों में हेरफेर करने के आरोप झेल चुकी हैं। इसके विपरीत, मेटाक्रिटिक का 1-से-100 का स्केल और अधिक सख्त चयन प्रक्रिया दर्शकों को किसी फिल्म की वास्तविक गुणवत्ता का अपेक्षाकृत सटीक अनुमान प्रदान करती है। हॉलीवुड अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां तकनीक, कला और व्यापार के बीच का संतुलन पूरी तरह से बदल रहा है।



















