हॉरर सिनेमा की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले फिल्ममेकर माइक फ्लैनगन ने अपनी नई फिल्म 'द एक्सॉसिस्ट: मार्टिअर्स' को लेकर पर्दे के पीछे की कई अहम बातों का खुलासा किया है। कैथोलिक मान्यताओं और खौफनाक कहानियों के मेल से फ्लैनगन लंबे समय से परिचित रहे हैं, जिसे उनकी पिछली कृतियों जैसे 'मिडनाइट मास' और स्टीफन किंग की कहानी पर आधारित 'कैरी' के रूपांतरण में भी देखा जा चुका है। अब वह मशहूर फ्रेंचाइजी 'द एक्सॉसिस्ट' के एक बिल्कुल नए अध्याय की कमान संभाल रहे हैं। फ्लैनगन द्वारा लिखित और निर्देशित यह फिल्म इस ऐतिहासिक हॉरर गाथा को एक नए नजरिए से पेश करने की तैयारी में है। रोमन कैथोलिक माहौल में अपनी परवरिश का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक पृष्ठभूमि किसी भी रचनाकार के लिए डरावनी कहानियों की दुनिया में कदम रखने का बेहतरीन रास्ता खोलती है। नई फिल्म एक सीरियल किलर थ्रिलर के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जिसका ताना-बाना अपवित्र इरादों से भरा है और जहां इंसानों की दर्दनाक मौतों के दृश्यों को एक अलग स्तर पर दिखाने की कोशिश की गई है। हालांकि शैतानी साए और झाड़-फूंक पर आधारित दर्जनों फिल्में पहले भी बन चुकी हैं, लेकिन फ्लैनगन का मानना है कि इस कहानी में कुछ ऐसा नया है जो दर्शकों को गहराई से हिलाकर रख देगा।
अंधेरी सीढ़ियां और रूह कंपा देने वाला खौफ
'द एक्सॉसिस्ट' फिल्मों में सीढ़ियों का अपना एक खौफनाक इतिहास रहा है, जैसा कि फादर कैरास के मामले में पहले देखा गया था। नई फिल्म में भी नीचे उतरती अंधेरी सीढ़ियां दर्शकों को एक गहरे शून्य की ओर ले जाने का संकेत देती हैं। फ्लैनगन ने वादा किया है कि यह उनके पूरे करियर की सबसे डरावनी फिल्म साबित होने वाली है। आमतौर पर अपनी कहानियों में जज्बातों और मानवीय संवेदनाओं को जगह देने के लिए पहचाने जाने वाले निर्देशक के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। 'कैरी' और 'द लाइफ ऑफ चक' जैसी दया और सहानुभूति से जुड़ी फिल्मों के बाद, यह उनके लिए क्रूर और भयावह विषयों को तलाशने का एक अनूठा अवसर था। उनका कहना है कि इस कहानी में सीमा से परे जाकर अंधेरे और खौफ को दिखाने की पूरी गुंजाइश थी, जिसे उन्होंने पूरी शिद्दत से पर्दे पर उतारा है।
स्कारलेट जोहानसन का हॉरर सिनेमा में पहला कदम
हॉलीवुड अभिनेत्री स्कारलेट जोहानसन आमतौर पर डरावनी फिल्मों से दूरी बनाकर रखती रही हैं, लेकिन इस फिल्म की पटकथा ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। फ्लैनगन के अनुसार, जोहानसन को हॉरर जॉनर देखना पसंद नहीं है, फिर भी कहानी की मजबूती के चलते वह इसमें काम करने के लिए तुरंत तैयार हो गईं। फिल्म में वह जूली मिलर नाम की एनवाईपीडी डिटेक्टिव का किरदार निभा रही हैं, जो अपने अतीत के बुरे सपने से जूझ रही है। एक नए पुलिस अधिकारी के तौर पर उन्होंने धार्मिक शैली में हत्याएं करने वाले एक कुख्यात सीरियल किलर को पकड़कर शोहरत हासिल की थी। वर्तमान में वह एक सिंगल मदर हैं और अपने काम और पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं। इसी बीच एक नया नकलची कातिल सामने आता है, जो खास तौर पर जूली के लिए ही अपराध स्थल तैयार कर रहा है। 'लॉस्ट इन ट्रांसलेशन' और 'गर्ल विद अ पर्ल इयररिंग' के समय से जोहानसन के प्रशंसक रहे निर्देशक ने उनके इस अभिनय को उनके बेहतरीन कामों में से एक बताया है।
मैनहट्टन की गलियों में शैतान की आहट
मूल कहानी में जहां पजूजू का ठिकाना वॉशिंगटन डीसी रहा था, वहीं इस नई फिल्म का पूरा परिवेश न्यूयॉर्क शहर के मैनहट्टन में रचा गया है। फ्लैनगन का मानना है कि न्यूयॉर्क जैसा शहर पूरे अमेरिका में कोई दूसरा नहीं है, जहां आधुनिक जगमगाहट के बीच एक गहरा और डरावना अंधेरा भी छुपा हुआ है। इतिहास में इस शहर ने कई खूंखार सीरियल किलर देखे हैं, जिनमें मैनहट्टन में दहशत फैलाने वाला 'सन ऑफ सैम' भी शामिल है। यहां गगनचुंबी आधुनिक इमारतें सत्रहवीं सदी के पुराने चर्चों और तहखानों के ठीक बगल में खड़ी नजर आती हैं, जो एक विचित्र विरोधाभास पैदा करती हैं। निर्देशक के मुताबिक, इस शहर का माहौल उन्हें डेविड फिन्चर की मशहूर फिल्म 'सेवन' की याद दिलाता है, जहां पूरा शहर ही इंसानों को अपने शिकंजे में कसता हुआ महसूस होता है।
धार्मिक हत्याएं और पुलिसिया तफ्तीश का अनोखा संगम
'द एक्सॉसिस्ट' फ्रेंचाइजी में सीरियल किलर की कहानी पहली बार शामिल नहीं हो रही है। इससे पहले 'द एक्सॉसिस्ट III' में भी ऐसा ही प्रयोग किया गया था, जिसे फ्लैनगन व्यक्तिगत तौर पर बेहद पसंद करते हैं और मानते हैं कि उस फिल्म को उसका वाजिब श्रेय नहीं मिला। नई फिल्म 'मार्टिअर्स' में घिनौनी और धार्मिक शैली में की गई हत्याओं को दिखाया गया है, जिससे यह फिल्म एक पुलिसिया प्रक्रिया और शैतानी कब्जे की कहानी का दिलचस्प मेल बन जाती है। निर्देशक का तर्क है कि ये दोनों विचार एक-दूसरे से काफी मेल खाते हैं, क्योंकि दोनों का ही मकसद इंसानियत के भीतर छुपे हुए अंधेरे और बाहर से आने वाली काली ताकतों की पहचान करना होता है।
अनुभवी कलाकारों की मजबूत टोली
फिल्म में फ्लैनगन के साथ पहले काम कर चुके कई जाने-माने कलाकार शामिल हैं। इनमें हामिश लिंकलेटर, कार्ल लंबली, राहुल कोहली, रॉबर्ट लॉन्गस्ट्रीट, सामंथा स्लोयान, केट सीगल और बेंजामिन पाजक जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा चिवेटेल एजियोफोर भी 'द लाइफ ऑफ चक' के बाद लगातार दूसरी बार फ्लैनगन की फिल्म में नजर आ रहे हैं। वह इसमें फादर विलियम नाम के एक पादरी की भूमिका में हैं, जो कभी जेल में चैपलिन रह चुके हैं और अपराध एवं सजा की दुनिया से गहराई से जुड़े रहे हैं। जॉन लेगुइजामो भी इस फिल्म में एक बेहद अंधेरे और रोंगटे खड़े कर देने वाले किरदार में दिखाई देंगे, जिनके साथ फ्लैनगन पहली बार काम कर रहे हैं और भविष्य में भी उन्हें अपने प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनाए रखना चाहते हैं।
लॉरेंस फिशबर्न का रहस्यमयी किरदार
फिल्म में लॉरेंस फिशबर्न की मौजूदगी ने भी लोगों में भारी उत्सुकता पैदा की है। निर्देशक ने इस बात को रहस्य में रखा है कि क्या वह मुख्य झाड़-फूंक करने वाले की भूमिका में हैं या नहीं। उन्होंने सिर्फ इतना संकेत दिया कि फिशबर्न एक खास कौशल वाले पादरी का किरदार निभा रहे हैं, जिसे कहानी में एक बेहद खास वजह से बुलाया जाता है। उनके अनुसार, इस किरदार को स्क्रीन पर भारी वजन और अधिकार की जरूरत थी, जिसे लॉरेंस फिशबर्न जैसी शख्सियत ही पर्दे पर बखूबी उतार सकती थी।
घर के भीतर घुसता खौफ और एक मां का संघर्ष
ट्रेलर से यह भी साफ होता है कि यह धार्मिक आतंक जूली मिलर और उनके बेटे की निजी जिंदगी और घर तक पहुंच जाता है। फ्लैनगन का मानना है कि घर के भीतर का खौफ सबसे ज्यादा डरावना होता है, क्योंकि घर वह जगह है जहां इंसान खुद को सबसे सुरक्षित समझता है। लेकिन जब घर किसी मर्डर डिटेक्टिव का हो, तो वह इस खौफ के आगे झुकने के बजाय सीधे उसका सामना करती है और जांच-पड़ताल के जरिए उस अंधेरे को चुनौती देती है।
मूल फिल्म के मशहूर दृश्य की झलक
ट्रेलर में एक संक्षिप्त दृश्य ऐसा भी है जो घर के बाहर सड़क की बत्ती को दिखाता है। यह दृश्य मूल 'द एक्सॉसिस्ट' के उस ऐतिहासिक पल और पोस्टर की याद दिलाता है जब फादर मेरिन पहली बार घर के बाहर पहुंचते हैं। फ्लैनगन ने बताया कि हालांकि वे अपनी पूरी फिल्म को एक स्वतंत्र पहचान देना चाहते थे और पुरानी कड़ियों पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहते थे, लेकिन उस क्लासिक दृश्य को थोड़ा सम्मान देना उन्हें जरूरी लगा।
शहादत का फलसफा और रिलीज की तारीख
फिल्म के शीर्षक 'मार्टिअर्स' के पीछे के अर्थ को समझाते हुए फ्लैनगन ने कहा कि बचपन से ही शहादत की प्रकृति ने उन्हें गहराई से सोचने पर मजबूर किया है। जहां आम तौर पर किसी की मौत एक दुखद घटना होती है, वहीं चर्च में इसे एक महान उद्देश्य के रूप में मनाया जाता है। यह मान्यता कि चर्च की नींव शहीदों के खून पर टिकी है, उन्हें हमेशा हैरान भी करती रही है और अंदर तक डराती भी रही है। 'द एक्सॉसिस्ट: मार्टिअर्स' 12 मार्च 2027 को बड़े पर्दे पर रिलीज होने जा रही है।


















