वैश्विक मुद्रा बाजार में शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में उल्लेखनीय मजबूती देखी गई। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े कमजोर आंकड़ों और केंद्रीय बैंक द्वारा आगामी मौद्रिक नीति बैठक में दरों में कोई बदलाव न करने की बढ़ती संभावनाओं ने मुद्रा को सहारा दिया। शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.38 प्रतिशत की बढ़त हासिल करने में सफल रहा, जिसके चलते इस सप्ताह कुल मिलाकर इसमें 0.58 प्रतिशत का शुद्ध उछाल दर्ज किया गया।
शुक्रवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान इस मुद्रा जोड़ी ने अपने साप्ताहिक निचले स्तर से वापसी करते हुए 0.7000 के स्तर की ओर रुख किया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट की वजह से अमेरिकी डॉलर अपने 18 महीने के उच्च स्तर से नीचे बना रहा, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को गति मिली। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक यानी रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया को लेकर बाजार में सख्त रुख की उम्मीदों ने भी इस मुद्रा के प्रदर्शन को सहारा दिया।
अमेरिकी उपभोक्ताओं का गिरता भरोसा और महंगाई की चिंता
अमेरिकी बाजार से आए हालिया आर्थिक आंकड़ों ने दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत दिए हैं। अक्टूबर महीने के लिए जारी उपभोक्ता विश्वास सूचकांक गिरकर 46.3 पर आ गया, जो पिछले महीने के 48.1 से कम है और विश्लेषकों के 47.6 के अनुमान से भी कमजोर रहा। इस गिरावट से साफ जाहिर होता है कि आम उपभोक्ता अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर आशंकित हैं।
इसी सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि उपभोक्ताओं की महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। एक साल की अवधि के लिए मुद्रास्फीति की उम्मीदें 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 4.7 प्रतिशत हो गईं। वहीं पांच साल की लंबी अवधि के लिए यह आंकड़ा 3.4 प्रतिशत से चढ़कर 3.5 प्रतिशत दर्ज किया गया। उपभोक्ताओं की यह मनोदशा केंद्रीय बैंक की नीतिगत प्राथमिकताओं को और जटिल बना रही है।
फेडरल रिजर्व की नीति और बाजार की उम्मीदें
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की पिछली बैठक के कार्यवृत्त से यह स्पष्ट हुआ कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर समिति में पूर्ण सहमति तो थी, लेकिन सदस्यों के विचार बंटे हुए थे। कुछ नीति निर्माताओं का मानना था कि यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया था, जबकि अन्य सदस्यों ने इसे मौद्रिक सख्ती के नए चक्र की शुरुआत माना।
मौजूदा समय में मनी मार्केट के आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बेहद कम नजर आ रही है। प्राइम टर्मिनल के आंकड़ों के आधार पर बाजार 81 प्रतिशत संभावना मान रहा है कि अक्टूबर में ब्याज दरों को यथावत रखा जाएगा। हालांकि दिसंबर की बैठक के लिए स्थितियां अलग हैं, जहां फेड फंड्स रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की 81 प्रतिशत संभावना जताई जा रही है।
ऑस्ट्रेलिया के आगामी आर्थिक आंकड़े और तकनीकी विश्लेषण
आने वाले सप्ताह में ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की चाल काफी हद तक घरेलू आर्थिक घटनाओं पर निर्भर करेगी। सप्ताह के दौरान रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया अपनी पिछली नीतिगत बैठक के मिनट्स जारी करेगा। इसके ठीक दो दिन बाद देश के रोजगार आंकड़े सामने आएंगे, जो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की दिशा तय करने में अत्यंत निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
तकनीकी मोर्चे पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए 50, 100 और 200 दिनों के सिंपल मूविंग एवरेज के आसपास 0.7089 पर तत्काल प्रतिरोध देखा जा रहा है। यदि यह स्तर पार होता है, तो 0.7198 के क्षैतिज स्तर पर अगला अवरोध सामने आ सकता है जहां बिकवाली का दबाव लौटने की संभावना है। वहीं निचले स्तरों पर 0.68 से 0.69 के क्षेत्र से उठती हुई ट्रेंड लाइन सपोर्ट संरचना को मजबूती प्रदान कर रही हैं। यह संकेत देता है कि अल्पकालिक दबाव के बावजूद जब तक भाव इन आधार रेखाओं से ऊपर बना रहता है, तब तक मध्यम अवधि का तेजी का रुझान बरकरार है।
वैश्विक मुद्राओं और अन्य परिसंपत्तियों का हाल
सप्ताह के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जहां यूरो के मुकाबले इसमें सर्वाधिक मजबूती देखी गई। दूसरी ओर डॉलर और येन की जोड़ी 158.00 के आसपास अपनी बढ़त बनाए रखने में कामयाब रही। जापान में घरेलू खर्च के आंकड़ों में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिसने जापानी येन पर दबाव बनाए रखा। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की गिरावट और भूराजनीतिक अनिश्चितताओं ने इस जोड़ी की गिरावट को सीमित रखा।
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली। शुरुआती तेजी के बाद जब सोना अपने साप्ताहिक उच्च स्तर की ओर बढ़ रहा था, शुक्रवार को यह 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे फिसल गया। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त के कारण पीली धातु की तेजी सीमित दायरे में सिमट गई।



















